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भारत-चीन विवाद: हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा से उखड़ने लगे ड्रैगन के तंबू
Tue, 07 Jul 2020 06:03 PM IST
Rajeev Rai
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Tue, 07 Jul 2020 06:03 PM IST
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india china disputes
- फोटो : ANI
पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पिछले कुछ समय से चल रहे तनाव के बीच अब दोनों तरफ की सेनाओं ने आपसी सहमति से पीछे हटना शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी। भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक, इलाके में चीनी सेना ने कल से यहां बनाए अपने ढांचों को ध्वस्त करना शुरू कर दिया है।
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सूत्रों के मुताबिक, दोनों पक्ष विवाद वाली जगह से एक से डेढ़ किमी. पीछे जाएंगे। दोनों सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की वार्ता आयोजित होने की संभावना है।
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Under the mutual disengagement, both sides will disengage and move back by 1-1.5 km from the friction points. The two Armies are likely to hold further talks after the disengagement process is completed: Indian Army Sources
विज्ञापन विज्ञापन— ANI (@ANI) July 7, 2020
चीन की हेकड़ी
दरअसल चीन लगातार सीमा पर हेकड़ी दिखा रहा था और मनमानी कर रहा था, लेकिन भारत के सख्त रुख ने उसे झुकने पर मजबूर कर दिया। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच रविवार को हुई बातचीत के बाद नतीजा भी सामने आया। इस बातचीत के बाद सोमवार को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने अपने कदम पीछे खींच लिए। सूत्रों का कहना है कि इतने दिनों से लगातार आक्रामक रुख अपनाए चीन का यह फैसला भारत के जवाबी आक्रामक रुख को देखते हुए आया है।
हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि चीनी सेना कितनी पीछे हटी है। इसका सटीक तौर पर पता वेरिफिकेशन प्रक्रिया में ही चल पाएगा। सूत्रों का कहना है कि चीन की ओर से सैनिकों को कम करने की प्रक्रिया पर भारत पूरी नजर रखेगा। ऐसा 15 जून को गलवां क्षेत्र में दोनों सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प को देखते हुए किया जाएगा। यह झड़प इसलिए हुई थी क्योंकि चीन ने दोनों देशों के बीच छह जून को हुई सहमति को मानने से इनकार कर दिया था और अपने सैनिक पीछे नहीं हटाए थे। इस बार भारत कोई जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं है।
इसमें चरणवार तनाव खत्म करने के लिए जरूरी कदम उठाने पर सहमति बनी थी। लेफ्टिनेंट जनरल स्तर पर पहले चरण की बातचीत छह जून को हुई थी। इसमें दोनों ओर से सहमति बनी थी कि तनातनी वाले स्थानों से सेनाओं को पीछे हटाया जाएगा, हालांकि गलवां घाटी में पीपी-14 पर दोनों सेनाओं के बीच झड़प से हालात और बिगड़ गए। तीन दिन पूर्व शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा कर सैनिकों को संबोधन के माध्यम से चीन को कड़ा संदेश दिया था।