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प्रशांत किशोर के सामने मचा प्रियंका गांधी के लिए हल्ला
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Wed, 27 Apr 2016 04:56 AM IST
सार
- विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए पार्टी का चेहरा बनाने की मांग
- चुनावी रणनीतिकारों ने सुनी पार्टी कार्यकर्ताओं के मन की बात
- मधुसूदन मिस्त्री से नाराज कार्यकर्ता, सुनाई खरी-खरी
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प्रियंका गांधी
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर की टीम ने मंगलवार को इलाहाबाद आकर पार्टी कार्यकर्ताओं के मन की बात जानने की कोशिश की। टीम के सदस्यों से मुलाकात के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं ने फिर यह मांग उठाई कि यूपी में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए प्रियंका गांधी को मुख्य चेहरा बनाया जाए। सभी कार्यकर्ता इस मसले पर अड़ गए और स्थिति हंगामेदार हो गई। ऐसे में जिलाध्यक्ष अनिल द्विवेदी को अपनी जगह से उठकर कार्यकर्ताओं को शांत कराना पड़ा।
प्रशांत किशोर की छह सदस्यीय टीम ने मंगलवार को शशांक शेखर शुक्ला के नेतृत्व में नैनी स्थित एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के हाल में जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों, ब्लॉक अध्यक्षों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक की। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेताओं ने टीम के सदस्यों को सलाह दी कि आगामी चुनाव के लिए टिकट फाइनल करने से पहले 2012 के चुनाव में कांग्रेस के हश्र पर विचार जरूर कर लिया जाए और टिकट आवंटन में जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाए।
कार्यकर्ताओं ने मधुसूदन मिस्त्री का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि 2010 में वह बड़े जोर-शोर से इलाहाबाद में कार्यकर्ताओं का इंटरव्यू लेने आए थे और कह गए थे कि टिकट सिर्फ उन्हीं को दिया जाएगा, जो छह माह से अधिक समय से पार्टी के सदस्य हैं लेकिन जब टिकट देने की बारी आई तो बाहरियों को बुलाकर टिकट बांट दिया गया। कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि कम से कम इस बार ऐसा नहीं होगा। कार्यकर्ताओं ने साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं को टिकट देने की वकालत की।
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इस बात पर भी मंथन हुआ कि चुनाव प्रबंधन को और बेहतर कैसे बनाया जाए। कुछ कार्यकर्ताओं ने बिहार की तर्ज पर गठबंधन कर चुनाव लड़ने तो कुछ ने अकेले चुनाव लड़े जाने पर जोर दिया। टीम के सदस्य बुधवार को शंकरलाल मेमोरियल हाल में शहर कांग्रेस के पदाधिकारियों एवं वार्ड अध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे।
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प्रशांत किशोर की छह सदस्यीय टीम ने मंगलवार को शशांक शेखर शुक्ला के नेतृत्व में नैनी स्थित एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के हाल में जिला कांग्रेस के पदाधिकारियों, ब्लॉक अध्यक्षों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अलग-अलग बैठक की। सूत्रों के मुताबिक पार्टी नेताओं ने टीम के सदस्यों को सलाह दी कि आगामी चुनाव के लिए टिकट फाइनल करने से पहले 2012 के चुनाव में कांग्रेस के हश्र पर विचार जरूर कर लिया जाए और टिकट आवंटन में जमीनी कार्यकर्ताओं को तरजीह दी जाए।
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कार्यकर्ताओं ने मधुसूदन मिस्त्री का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि 2010 में वह बड़े जोर-शोर से इलाहाबाद में कार्यकर्ताओं का इंटरव्यू लेने आए थे और कह गए थे कि टिकट सिर्फ उन्हीं को दिया जाएगा, जो छह माह से अधिक समय से पार्टी के सदस्य हैं लेकिन जब टिकट देने की बारी आई तो बाहरियों को बुलाकर टिकट बांट दिया गया। कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई कि कम से कम इस बार ऐसा नहीं होगा। कार्यकर्ताओं ने साफ-सुथरी छवि वाले नेताओं को टिकट देने की वकालत की।
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इस बात पर भी मंथन हुआ कि चुनाव प्रबंधन को और बेहतर कैसे बनाया जाए। कुछ कार्यकर्ताओं ने बिहार की तर्ज पर गठबंधन कर चुनाव लड़ने तो कुछ ने अकेले चुनाव लड़े जाने पर जोर दिया। टीम के सदस्य बुधवार को शंकरलाल मेमोरियल हाल में शहर कांग्रेस के पदाधिकारियों एवं वार्ड अध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे।