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राजस्थान चुनाव 2018: मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर कांग्रेस खामोश

Fri, 16 Nov 2018 12:42 AM IST
नारायण बारेठ जयपुर से, बीबीसी हिंदी
नारायण बारेठ जयपुर से, बीबीसी हिंदी Updated Fri, 16 Nov 2018 12:42 AM IST
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Congress silent on chief ministerial candidate in Rajasthan
Congress
राजस्थान में कांग्रेस ने लंबे समय तक चली अनिश्चितता के बाद ऐलान किया है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट दोनों विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस ने यह घोषणा ऐसे समय पर की, जब इन दोनों नेताओं के बीच मतभेद की खबरें आ रही थीं।
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प्रेक्षक कहते है कांग्रेस ने तस्वीर स्पष्ट करने में देरी की है और इससे उसे थोड़ा नुकसान हुआ है। मगर पार्टी ने अब भी यह संशय बरकरार रखा है कि चुनाव में जीत की स्थिति में मुख्यमंत्री कौन होगा। वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरती रही है।
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'मैं थांसे दूर नहीं'
पार्टी के इस ऐलान से कांग्रेस के सियासी पटल पर छाया कुछ कुहासा तो दूर हुआ है मगर 'नेता कौन होगा' इस सवाल पर अब भी धुंधलका बना हुआ है। पिछले दो महीने से कहा जा रहा था कि पार्टी के प्रमुख नेताओं को चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। पार्टी में कुछ जानकार कहते हैं कि इसे गहलोत को चुनाव लड़ने से दूर रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था।

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कभी भी अपनी इस मंशा को छिपाया नहीं कि वे अपने पारम्परिक चुनाव क्षेत्र जोधपुर के सरदारपुरा से चुनाव लड़ना चाहते हैं। बल्कि जब-जब ऐसी खबरें आईं, गहलोत ने एक स्थानीय मुहावरे 'मैं थांसे दूर नहीं' का इस्तेमाल किया और कहा कि वो अपनी अवाम से दूर नहीं होंगे।

 

राज्य में जब सत्ता के लिए सत्तारूढ़ बीजेपी और कांग्रेस में चुनावी लड़ाई तेज हुई तो कांग्रेस को लगा कि उसकी सियासत के पटल पर छाया यह कुहासा अब छंटना चाहिए। लिहाजा कांग्रेस ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तस्वीर साफ करने की कोशिश की। पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस माहौल की तोहमत बीजेपी पर मढ़ी और कहा कि राजस्थान में न केवल वो खुद बल्कि पायलट समेत सभी प्रमुख नेता चुनाव लड़ेंगे और बीजेपी को शिकस्त देंगे। गहलोत ने कहा, "कांग्रेस में कोई फूट नहीं है। बीजेपी जरूर यह माहौल बनाने का प्रयास कर रही थी। अब बीजेपी को जवाब मिल गया है।"

विधानसभा रणक्षेत्र में पहली बार सचिन पायलट
गहलोत के चुनाव क्षेत्र जोधपुर के सरदारपुरा में पार्टी के सदस्य और हमदर्द इस घोषणा का इंतजार कर रहे थे क्योंकि गहलोत ने लंबे समय तक पहले संसद और फिर विधानसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। गहलोत दो बार राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके समर्थक कहते हैं कि अगर गहलोत चुनाव नहीं लड़ते तो यह मान लिया जाता कि उन्हें मुख्यमंत्री की दौड़ से दूर कर दिया गया है। मगर अब ऐसा नहीं हो सकता।

 
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इसके साथ ही सचिन पायलट ने भी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। यह पहला मौका होगा जब पायलट विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। अभी यह साफ नहीं है कि वो किस विधानसभा क्षेत्र से चुनावी अखाड़े में उतरेंगे। पायलट ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के निर्देश और गहलोत के आग्रह पर चुनाव लड़ेंगे और बीजेपी को सत्ता से बाहर करेंगे।

'देर आए दुरुस्त आए'
प्रेक्षक कहते हैं कि इस फैसले में देरी करने से कांग्रेस को थोड़ा नुकसान हुआ है। विश्लेषक राजेश असनानी कहते हैं, "कांग्रेस ने इस उहापोह से निकलने में काफी वक्त लिया। इससे पार्टी कार्यकर्ताओ और उसके समर्थक वर्ग में गलत संदेश गया। पर अभी 'देर आए दुरुस्त आए' की तर्ज पर कांग्रेस ने कुछ तस्वीर साफ की है। मगर बीजेपी के पास अब भी यह कहने का मौक़ा है कि कांग्रेस में फूट है और मुख्यमंत्री के लिए उसके पास कोई चेहरा नहीं है।"

इधर सत्तारूढ़ बीजेपी कहती रही है कि कांग्रेस में गुटबाजी है और मुख्यमंत्री पद के लिए घमासान मचा है। बीजेपी ने मुख्य मंत्री वसुंधरा राजे को अपना नेता घोषित किया है और अगर चुनाव में कामयाबी मिली तो राजे ही मुख्य मंत्री होगी। बहरहाल कांग्रेस ने तस्वीर का एक रुख़ तो साफ कर दिया। मगर जीत की सूरत में मुख्यमंत्री का सेहरा किसके माथे बंधेगा, इस सवाल के रुख़ पर अब भी नक़ाब रखा हुआ है।
 
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