{"_id":"5dc9da0b8ebc3e5b6c69d1a6","slug":"congress-shivsena-friendship-is-not-new-both-were-in-alliance-in-1974","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"कांग्रेस-शिवसेना: अब नई बोतल में पुरानी है दोस्ती, 1974 में मिल कर लड़ा था चुनाव","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
कांग्रेस-शिवसेना: अब नई बोतल में पुरानी है दोस्ती, 1974 में मिल कर लड़ा था चुनाव
Tue, 12 Nov 2019 03:33 AM IST
संजीव कुमार झा
शोभित जायसवाल, अमर उजाला
शोभित जायसवाल, अमर उजाला
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Tue, 12 Nov 2019 03:33 AM IST
विज्ञापन
इंदिरा गांधी, बाल ठाकरे (फाइल फोटो)
- फोटो : twitter
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कई लोगों को आज जानकार अचरज हो रहा है कि शिवसेना कांग्रेस के बाहरी समर्थन से महाराष्ट्र में सरकार बनाने जा रही है। जिस शिवसेना को भाजपा का साथ देने वाली बच्चा पार्टी माना जाता रहा है वह सियासत के नए खेल में धुर विरोधी कांग्रेस से समर्थन लेेकर सरकार बना रही है।
विज्ञापन
मगर इतिहास इस कौतूहल के पक्ष में नहीं है। थोड़ा पीछे जाएं तो पता चलता है कि शिवसेना और कांग्रेस में अच्छे रिश्ते भी हुआ करते थे। इसकी मिसाल यह है कि सन 1974 में तत्कालीन बंबई में हुए म्यूनिसिपल चुनाव में शिवसेना और कांग्रेस का आधिकारिक गठबंधन भी हुआ था।
विज्ञापन
लेखक थामस ब्लोम हांसेन की किताब वेजस ऑफ वायलेंस:नेमिंग एडं आइडेंडिटी इन पोस्टकॉलोनियल बॉम्बे में इसका तफसील से ब्यौरा दिया गया है। इसमें बताया गया है कि 1969 तक शिवसेना और कांग्रेस के संबंध दोस्ताना ही थे। चाहे वह बंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन हो या फिर विधानसभा।
विज्ञापन
किताब में आम लोगों में फैली इस चर्चा का भी जिक्र है कि ठाकरे परिवार के दोस्त पूर्व मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वसंतदादा पाटिल ने शिवसेना के गठन और उसके विकास में योगदान दिया। इसकी यह थी कि कांग्रेस के ये नेता मजदूरों पर कम्युनिस्टों के असर को खत्म करना चाहते थे और शिवसेना उनके इस मंसूबे को पूरा कर सकती थी।
इस बात की पुष्टि तो नहीं हो सकी पर इससे बल इस बात से मिलता है कि कांग्रेस सरकारों ने हमेशा शिवसेना को लेकर नरम रवैया ही रखा। अपने हिंसक रवैये के बावजूद बाल ठाकरे को 1969 के अलावा कभी गिरफ़्तार नहीं किया गया। यहां तक कि 1993 के दंगो को लेकर भी इस पार्टी पर कभी कांग्रेस ने कोई कार्रवाई नहीं की।
इस किताब में दावा कहा गया है जो लोग शिवसेना को वोट करते हैं उनका सामाजिक प्रोफाइल कांग्रेस के पारंपरिक मतदाताओं से बहुत ज्यादा भिन्न नहीं है। यही वजह है कि शिवसेना को छोड़कर जाने वाले नेताओं की शरणस्थली लंबे समय तक कांग्रेस ही रही थी।
इमरजेंसी का किया था ठाकरे ने समर्थन
जब 1975 में देश में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया तो तकरीबन सभी राजनीतिक दलों ने इसका जमकर विरोध किया। इन दलों में एक अपवाद थी शिवसेना। शिवसेना ने भारतीय लोकतंत्र के इस काले अध्याय का समर्थन किया था। और यही वजह थी कि जहां सभी सियासी दलों के नुमाइंदों को जेल की सीखचों के भीतर डाल दिया गया था पर शिवसेना के नेता इस कार्रवाई से साफ बचे रहे थे।
तब शिवसेना नेतृत्व ने अपने दल की आवाजों को दरकिनार करके गुजराती मूल के कांग्रेस नेता मुरली देवड़ा का बिना शर्त समर्थन किया था। ठाकरे ने आपातकाल का विरोध नहीं करने की सफाई में व्यंग्य में कहा था कि उनके दांत में दर्द था इसलिए वह बोल नहीं पा रहे थे।
तब शिवसेना नेतृत्व ने अपने दल की आवाजों को दरकिनार करके गुजराती मूल के कांग्रेस नेता मुरली देवड़ा का बिना शर्त समर्थन किया था। ठाकरे ने आपातकाल का विरोध नहीं करने की सफाई में व्यंग्य में कहा था कि उनके दांत में दर्द था इसलिए वह बोल नहीं पा रहे थे।