फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Congress faces tough fight in Madhya Pradesh and Rajasthan

चेहरे की लड़ाई में मध्यप्रदेश-राजस्थान में कड़ी टक्कर में रही कांग्रेस 

Wed, 12 Dec 2018 06:47 AM IST
अनूप वाजपेयी , नई दिल्ली
अनूप वाजपेयी , नई दिल्ली Updated Wed, 12 Dec 2018 06:47 AM IST
विज्ञापन
Congress faces tough fight in Madhya Pradesh and Rajasthan
Congress

कांग्रेस भले तीन प्रमुख राज्य छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्यप्रदेश भाजपा से जीतकर फिलहाल सिकंदर बन गई है लेकिन एक ही नेता के नेतृत्व में लड़े गए चुनाव में हार-जीत का तौर तरीका और सीटों का अंतर अलग है। कांग्रेस मध्यप्रदेश-राजस्थान में ऐसा क्यों नहीं कर सकी जैसा छत्तीसगढ़ में हुआ। कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है कि आखिर अपने पुराने राज्यों की तर्ज पर मिजोरम को बचाने में क्यों नाकाम रही।        

विज्ञापन


विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने तीनों राज्यों में सीएम का कोई चेहरा घोषित नहीं किया लेकिन मध्यप्रदेश और राजस्थान में अघोषित तौर पर दो-दो चेहरे मैदान में थे। वे खेल तो रहे थे पूरी टीम को जिताने के लिए लेकिन कहीं न कहीं स्वकेंद्रित होकर उनका अपना स्कोर बढ़ाना नुकसान कर गया। जबकि छत्तीसगढ़ में एकतरफा जीत का बड़ा कारण कोई चेहरा न होना है।
विज्ञापन


राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट सीएम पद को लेकर प्रतिस्पर्धी जरूर थे लेकिन मध्यप्रदेश जैसा घमासान सामने नहीं हुआ तो कुछ जीत भी वैसी मिली। मध्यप्रदेश में जितना घमासान पहले था उतना ही हार-जीत का सबसे कम अंतर होने के बाद भी है। मध्य्रप्रदेश में एक-एक सीट के लिए अंतिम समय तक कशमकश करना पड़ा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

कांग्रेस अध्यक्ष ने लगभग एक जैसे मुद्दे तीनों राज्यों में उठाए और तीनों राज्य सरकारों पर भ्रष्टाचार समेत एक जैसे आरोप लगाकर घेरा। फिर भी कांग्रेस मध्य प्रदेश, राजस्थान में भाजपा के खिलाफ लोगों की नाराजगी ठीक से भुना नहीं पाई है। छत्तीसगढ़ की जीत का पूरा क्रेडिट राहुल गांधी के फैसलों को जाता है। मध्यप्रदेश और राजस्थान में दो-दो क्षत्रप मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदारों के रूप में थे और टिकटों को लेकर भी उनका अपने-अपने तरह से तर्क था। लिहाजा बड़ी संख्या में इन दोनों राज्यें में बागी भी मैदान में उतरे जिन्हें टिकट नहीं मिला वे सपा या बसपा की शरण में चले गए।        

छत्तीसगढ़ में चेहरे की लड़ाई न होने के साथ उम्मदीवारी के चयन में पारदर्शिता और जमीनी जुड़ाव फायदेमंद रहा। राहुल गांधी ने वहां रणनीति के तहत सांसद ताम्रध्वज साहू को अंतिम समय में मैदान में उतारा। छत्तीसगढ़ में राहुल ने अपने चार सचिवों पर विश्वास किया और बड़े नेताओं की सूची में जबरदस्त संशोधन भी किया। राहुल एक वरिष्ठ नेता से यहां तक कह दिया था कि आप उम्मीदवारों के वकील नहीं जज की भूमिका में रहे। जबकि मध्यप्रदेश और राजस्थान में राहुल चाहकर भी बड़े क्षत्रपों के दबाव में बदलाव नहीं कर सके। राजस्थान में तो चार सचिवों को उम्मीदवारी के फैसले से अलग राय रखने पर नाराजगी का सामना भी करना पड़ा।        

कांग्रेस के सामने इस जीत से अधिक महत्वपूर्ण एक अन्य राज्य मिजोरम का चले जाना है। शायद राहुल जानते थे कि मिजोरम में सरकार ने नहीं बनेगी लिहाजा पांच राज्यों में सबसे कम समय और रणनीति वहीं के लिए बनी। खुद राहुल ने भी दो ही रैलियां की। कांग्रेस के लिए मंथन का विषय है कि आखिर क्या कारण हैं जो राज्य कांग्रेस के पास रहते हैं उनमें वापसी क्यों नहीं हो रही है।        

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed