हरियाणा के सबक से दिल्ली में सतर्क हुई कांग्रेस, सभी गुटों को एक साथ लाने की कोशिशें तेज
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हरियाणा में सरकार बनाने से चूक गए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा था कि पार्टी ने राज्य में नेतृत्व के मसले पर फैसला लेने में देर कर दी अन्यथा राज्य के चुनाव परिणाम कुछ और हो सकते थे। क्या दिल्ली में भी पार्टी ने वही गलती कर दी है? पार्टी नेता मानते हैं कि नेतृत्व के मसले पर कुछ देरी जरूर हुई है लेकिन दिल्ली में पार्टी का आधार देखते हुए इसे 'मैनेज' कर लिया जाएगा।
फिलहाल नए नियुक्त किए गए अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा के सामने पार्टी के सभी गुटों को एक साथ लाने की चुनौती है। मंगलवार को पार्टी के प्रदेश कार्यालय पर आयोजित दिवाली मिलन के कार्यक्रम के जरिए सुभाष चोपड़ा ने सभी गुटों को अपने साथ दिखाने की कोशिश की जिसमें वे काफी हद तक सफल भी रहे। कार्यक्रम में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के ज्यादातर नेता उपस्थित हुए और चोपड़ा को अपनी सहमति देते दिखे।
हालांकि अजय माकन जैसे कुछ वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति ने यह संकेत भी दे दिया कि पार्टी में अभी भी सब कुछ ठीक नहीं है। लेकिन कीर्ति आजाद के अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा के बीच अलग झंडा बुलंद करने वाले संदीप दीक्षित के कार्यक्रम में शामिल होने से स्थिति बेहतर होने के संकेत जरूर मिले हैं।
प्रदेश कांग्रेस में आपसी तालमेल के सवाल पर सुभाष चोपड़ा ने अमर उजाला से कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। पार्टी में किसी तरह की गुटबाजी केवल मीडिया की उपज है। वे दिल्ली के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को बेहतर ढंग से समझते हैं।
यही कारण है कि वे अध्यक्ष बनने के बाद से सबसे लगातार मिल रहे हैं और आगे की रणनीति बनाने के लिए सबकी राय ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूरी पार्टी एकजुट होकर दिल्ली में कांग्रेस को मजबूत करने में अपना सहयोग करीगी।
हरियाणा से उत्साहित कार्यकर्ता
हरियाणा में कांग्रेस सरकार बनाने से भले ही चूक गई हो, लेकिन इसने पार्टी कार्यकर्ताओं में जान फूंकने का काम किया है। विधायक रह चुके कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि हरियाणा चुनाव ने साबित कर दिया है कि समाज में भाजपा के खिलाफ बड़ा आक्रोश है। इस आक्रोश को एक जगह केंद्रित कर परिणाम में बदलने की कोशिश की जानी चाहिए।
दलित समाज रविदास मंदिर पर तो जाट समाज आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा से बिदक चुका है। अल्पसंख्यक वर्ग पहले से ही भाजपा से नाराज है। दिल्ली में इन सभी वर्गों को एक साथ लाने और सहेजने की जिम्मेदारी कांग्रेस की है जिसे पूरा करने की कोशिश की जाएगी। पार्टी दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए तैयार होने की कोशिश कर रही है।