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राजे को लेकर भाजपा में असमंजस, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी को बनाया जा सकता है बली का बकरा

Mon, 05 Feb 2018 09:11 PM IST
संजय मिश्र, नई दिल्ली
संजय मिश्र, नई दिल्ली Updated Mon, 05 Feb 2018 09:11 PM IST
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Confusion in BJP about vasundhara Raje leadership State BJP president Ashok Paramani may be removed
वसुंधरा राजे
राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को मिली करारी हार के बाद सूबे की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ पार्टी के अंदर से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। उपचुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद कोटा भाजपा के ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष अशोक चौधरी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि राजस्थान भाजपा का कार्यकर्ता प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन चाहता है। उन्होंने प्रदेश की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद से अशोक परनामी को हटाने की मांग की है।
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चौधरी ने भाजपा अध्यक्ष को सूबे की जमीनी हालातों से अवगत कराते हुए लिखा है कि संगठन के एक-एक कार्यकर्ता के मन में भाजपा सरकार के प्रति गहरा आक्रोश पनप रहा है। प्रदेश के सरकार और संगठन दोनों ही जगह नेतृत्व परिवर्तन की मांग कर उन्होंने कहा है कि नए नेतृत्व में कार्यकर्ता जोश के साथ वर्ष के अंत में होने वाले चुनाव में उतरेंगे तो पार्टी हित के लिए बेहत्तर होगा। इससे पहले वित्त मंत्री अरूण जेटली भी राजस्थान उपचुनाव में पार्टी की करारी हार पर चिंता जता चुके हैं।
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खबरिया चैनलों से बातचीत में जेटली ने कहा है कि राजस्थान उपचुनाव के नतीजे पार्टी के लिए चिंताजनक है। इस मामले में उन्होंने सूबे की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से बातचीत भी की है। जेटली ने कहा है कि प्रदेश भाजपा उपचुनाव में हुई हार के कारणों को समझने में लगी है। सुधार के कदम उठाए जाएंगे। लेकिन जेटली के बयान के अगले दिन ही कोटा भाजपा के नेता का पत्र सामने आया है। 
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राजे पर अनिर्णय की स्थिति में भाजपा आलाकमान 

भाजपा के वर्तमान केंद्रीय नेतृत्व के साथ राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के राजनीतिक संबंध पहले से ही मधुर नहीं रहे हैं। बावजूद उसके भाजपा नेतृत्व ने राजे को मुख्यमंत्री पद पर बरकरार रखा है। नेतृत्व को राज्य के जमीनी सियासी हालातों से लगातार फीडबैक भी समय-समय पर प्राप्त होते रहे हैं। इस वर्ष के अंत में होने वाले भाजपा शासित राज्यों में अगर सबसे ज्यादा कहीं पार्टी की स्थिति खराब है तो वह राज्य राजस्थान है। उपचुनाव के नतीजों ने भी उसी ओर संकेत किए हैं। जिसके संकेत भाजपा आलाकमान को पहले से ही मिल रहे थे। बावजूद उसके केंद्रीय नेतृत्व राजे को मुख्यमंत्री बनाए हुए है। इस वजह से प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं और सांसदों में केंद्रीय नेतृत्व के प्रति भी निराशा का भाव है।

लेकिन इस हालात के बावजूद भाजपा आलाकमान अब भी राजे को सीधे हटाए जाने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। राजे पर अनिर्णय की स्थिति बनी हुई। सूबे में पार्टी की हार दिखने के बावजूद भी केंद्रीय नेतृत्व वसुंधरा राजे पर अभी निर्णय लेने की स्थिति में नहीं है। नेतृत्व को राजे का पुराना इतिहास याद आ रहा है। तब तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह के जरिए फरमान जारी करने के बावजूद भी राजे ने विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा नहीं दिया था। बाद में आलाकमान को ही पैर पीछे खींचने पड़े थे।

सूत्र बताते हैं कि राजे के इस अंदाज को भांपते हुए केंद्रीय नेतृत्व उनसे सीधा टकराव लेने के मूड में नहीं है। उसे देश में पार्टी का महौल बिगड़ने की आशंका सता रही है। लेकिन जेटली के जरिए सुधार के कदम उठाए जाने की बात को लेकर सियासी गलियारे में मायने निकाले जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि राजे को संदेश देने के लिए भाजपा नेतृत्व देर-सवेर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी को बली का बकरा बनाते हुए उपचुनाव में मिली हार का ठीकरा उन पर फोड़ सकती है। 

शाह को लिखे खत में झलक रही है पूरी वेदना 

Confusion in BJP about vasundhara Raje leadership State BJP president Ashok Paramani may be removed
वसुंधरा राजे
प्रदेश के सांसदों में बेचैनी 

राजस्थान उपचुनाव के नतीजों को लेकर प्रदेश भाजपा के सांसदों में भारी बेचैनी है। उन्हें वर्ष के अंत में होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव से ज्यादा अगले वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव की चिंता सता रही है। राजस्थान के एक लोकसभा सांसद का कहना है कि यदि विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार होती है और राज्य की सत्ता में कांग्रेस आ जाएगी तो 2019 में लोकसभा चुनाव जीतने में मुश्किलें आ सकती हैं। वर्ष 2014 में भाजपा ने सूबे की सभी 25 लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।

लेकिन सूबे के वर्तमान जमीनी हालातों को देखते हुए पार्टी सांसदों को राज्य की भाजपा सरकार जाने के साथ भविष्य में अपनी जीत को लेकर आशंका सता रही है। हालांकि सांसद इस बात से राहत महसूस कर रहे हैं कि प्रदेश की जनता राजे के कामकाज से बेशक नाराज हैं। मगर पीएम मोदी का जलवा उनमें अब भी बरकरार है। इसलिए विधानसभा के चुनाव में भाजपा बेशक हार सकती है। मगर लोकसभा के चुनाव में स्थिति पार्टी के पक्ष में रहेगी। 

शाह को लिखे खत में झलक रही है पूरी वेदना 

राजस्थान की राजनीतिक हालातों को लेकर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखने वाले कोटा जिला ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने अमर उजाला से बातचीत में यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने दो पन्नों का पत्र शाह को लिखा है। और पत्र में लिखी बातों को भी उन्होंने स्वीकार किया है। दो पन्नों के पत्र में चौधरी ने लिखा है कि राजस्थान उपचुनाव के आए नतीजों ने भाजपा कार्यकर्ताओं को काफी निराश किया है। इन परिणामों के बारे में मुझ जैसे पार्टी कार्यकर्ताओं को पूरा आभास था कि चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में नहीं आएंगे। प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की कार्यप्रणाली से खुश नहीं है। और उनकी कार्यशैली से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी लगातार गिरता जा रहा है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अशोक परनामी भी राजे के गुलाम की तरह संगठन को लगातार नुकसान पहुंचा रहे हैं। तो ब्यूरोक्रेसी के चक्कर में पड़कर राजे प्रदेश सरकार को ऐसे रास्ते पर लेकर जा रही हैं जहां केवल हार ही हार है और हार के सिवाय कुछ नहीं है। संगठन के एक-एक कार्यकर्ता के मन में सरकार के प्रति गहरा आक्रोश पनप रहा है। जिसे आगामी विधानसभा चुनावों से पहले दूर करने की उन्होंने वकालत की है। इसके साथ ही उन्होंने राजे और परनामी को उनके पद से हटाने की मांग केंद्रीय नेतृत्व से की है। 
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