फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Complaints against SC, HC judges may go to panel

न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों के निपटारे के लिए बनेगा अलग सचिवालय

Mon, 01 Aug 2016 10:38 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 01 Aug 2016 10:38 AM IST
विज्ञापन
Complaints against SC, HC judges may go to panel
- फोटो : gettyimages
भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के प्रतिरोध के बावजूद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और देश के सभी 24 हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए एक तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव किया है।
विज्ञापन


न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सरकार ने एक अलग से सचिवालय के गठन का भी प्रस्ताव रखा है। सचिवालय को न्यायपालिका के खिलाफ शिकायतों का मूल्यांकन और कार्रवाई करने की सिफारिश का काम सौंपा जाएगा। सेवानिवृत्त न्यायाधीश भी इसके दायरे में आएंगे।
विज्ञापन


यह हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए उम्मीदवार जजों की जांच भी करेगा। मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ऐसी किसी भी व्यवस्था बनाए जाने के खिलाफ हैं। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि यह उसकी स्वतंत्रता पर अतिक्रमण करने जैसा होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए भी नियम

Complaints against SC, HC judges may go to panel

अभी तक, न्यायपालिका के खिलाफ शिकायतों आने वाली शिकायतों को मुख्य न्यायाधीश के पास भेजा जाता था। मुख्य न्यायाधीश ही फैसला लेते थे कि किस शिकायत पे क्या कार्रवाई करनी है।

उच्चतम स्तर पर लिए गए इस निर्णय में सरकार ने ना सिर्फ  सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में के लिए न्याधीशों की नियुक्ति के लिए सचिवालय बनाने का प्रस्ताव रखा है, बल्कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सचिवालयों में नियुक्ति के लिए भी नियमों की आधारशिला रखी है।

सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की सचिवालयों में नियुक्ति मुख्य न्यायाधीश और संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की सहमति से ही की जाएगी। सचिवालय के जरिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में नियुक्ति से पहले जजों की जांच करने का प्रस्ताव पेश कर लगता है सरकार ने न्यायाधीश जबाबदेही बिल को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया है जिससे न्यायपालिका से होने वाली किसी भी टकराव से बचा जा सके।

यह बिल 2012 में लोक सभा में पास किया गया था लेकिन 15वीं लेकसभा के विघटन के साथ ही यह बिल भी रद्द हो गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed