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जजों की नियुक्ति के नए प्रावधानों पर कॉलेजियम को ऐतराज
एजेंसी/नई दिल्ली
Updated Wed, 29 Jun 2016 01:49 AM IST
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शीर्ष अदालतों में जजों की नियुक्ति से जुड़े नए मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के कुछ प्रावधानों पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने ऐतराज जाहिर किया है।
समझा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के उस प्रावधान पर आपत्ति है, जिसमें कॉलेजियम की ओर से की गई किसी जज की नियुक्ति की सिफारिश को राष्ट्रीय हित में खारिज करने का अधिकार सरकार को दिया गया है।
नए मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर की शर्तों के अनुसार, सरकार के पास यह अधिकार होगा कि राष्ट्रीय हित की चिंताओं के मद्देनजर वह कॉलेजियम की नियुक्ति की किसी सिफारिश को खारिज कर सकती है। यह प्रावधान मौजूदा व्यवस्था से अलग है।
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समझा जाता है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के उस प्रावधान पर आपत्ति है, जिसमें कॉलेजियम की ओर से की गई किसी जज की नियुक्ति की सिफारिश को राष्ट्रीय हित में खारिज करने का अधिकार सरकार को दिया गया है।
नए मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर की शर्तों के अनुसार, सरकार के पास यह अधिकार होगा कि राष्ट्रीय हित की चिंताओं के मद्देनजर वह कॉलेजियम की नियुक्ति की किसी सिफारिश को खारिज कर सकती है। यह प्रावधान मौजूदा व्यवस्था से अलग है।
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कॉलेजियम की सिफारिश खारिज के सरकार के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम को आपत्ति
वर्तमान प्रक्रिया के तहत, अगर कॉलेजियम में शामिल सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठतम जज और सीजेआई दोबारा सिफारिश करते हैं तो सरकार इसे मानने के लिए बाध्य है। नए मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर में यह भी कहा गया है कि अगर केंद्र सरकार एक बार किसी सिफारिश को खारिज कर देती है तो कॉलेजियम के दोबारा सिफारिश के बावजूद वह उस पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं होगी।
कॉलेजियम ने उस शर्त पर भी आपत्ति जताई है जिसके अंतर्गत केंद्र के अटॉर्नी जनरल और राज्यों के महाधिवक्ता नियुक्ति या प्रोन्नति के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश करने के मामले में अपना मत रख सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर का मसौदा अब भी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पास है और यह अपनी आपत्तियां केंद्र सरकार के समक्ष रख चुका है।
मार्च में सीजेआई को भेजा गया था मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित मेमोरेंडम में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ के आदेश के बाद संशोधन किया गया था।
कॉलेजियम प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी बनाने के प्रयासों के तहत सरकार ने इसे दोबारा तैयार किया था। इस मेमोरेंडम को कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने मार्च में मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर को भेजा था।
कॉलेजियम ने उस शर्त पर भी आपत्ति जताई है जिसके अंतर्गत केंद्र के अटॉर्नी जनरल और राज्यों के महाधिवक्ता नियुक्ति या प्रोन्नति के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश करने के मामले में अपना मत रख सकते हैं।
सूत्रों ने बताया कि मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर का मसौदा अब भी सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पास है और यह अपनी आपत्तियां केंद्र सरकार के समक्ष रख चुका है।
मार्च में सीजेआई को भेजा गया था मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति से संबंधित मेमोरेंडम में सुप्रीम कोर्ट की एक पीठ के आदेश के बाद संशोधन किया गया था।
कॉलेजियम प्रणाली को ज्यादा पारदर्शी बनाने के प्रयासों के तहत सरकार ने इसे दोबारा तैयार किया था। इस मेमोरेंडम को कानून मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने मार्च में मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर को भेजा था।