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कोयला घोटाला: पूर्व CBI निदेशक रंजीत सिन्हा को नहीं मिली राहत, होगी CBI जांच

Mon, 30 Jan 2017 06:46 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 30 Jan 2017 06:46 PM IST
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Coal block scam: Ranjit Sinha seeks relief from CBI probe, Supreme Court turns down plea

कोयला घोटाले में नाम आने के बाद शीर्ष अदालत से सहानुभूति की संभावना तलाश रहे पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने सिन्हा की उस मांग को ठुकरा दिया जिसमें उन्होंने उनके खिलाफ सीबीआई जांच को स्थगित करने की बात कही थी। सिन्हा के खिलाफ कोयला घोटाले की जांच को प्रभावित करने के आरोप लगे हैं। कोर्ट ने कहा कि सिन्हा के खिलाफ सीबीआई जांच जारी रहेगी।

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मालूम हो कि नवंबर, 2014 में रंजीत सिन्हा सेवानिवृत्त हुए थे। इससे पहले न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने कहा था कि प्रथम दृष्टया पूर्व सीबीआई निदेशक पर अथॉरिटी के दुरूपयोग का मामला नजर आता है। पीठ ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा पर कथित तौर पर लगे आरोपों की जांच के लिए करने का निर्देश दिया था।
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पीठ ने आलोक वर्मा को सीबीआई के दो अधिकारियों का चयन कर एसआईटी को नेतृत्व करने के लिए कहा था। यह पहला मौका है जब सीबीआई निदेशक अपनी ही एजेंसी के पूर्व प्रमुख पर लगे आरोपों की जांच कर रहे हैं।

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सिन्हा की जांच सीबीआई के वर्तमान निदेशक के हाथ

Coal block scam: Ranjit Sinha seeks relief from CBI probe, Supreme Court turns down plea

एसआईटी इस बात का पता लगाएगी कि क्या पूर्व निदेशक और कोयला घोटाले के आरोपियों की मुलाकात के बाद जांच प्रभावित हुई या अभियोजन पक्ष को फायदा पहुंचाने की कोशिश हुई थी। आलोक वर्मा जांच के काम में केंद्रीय सर्तकता आयुक्त से भी मदद लेंगे। पीठ ने यह भी कहा कि सीबीआई निदेशक कोयला घोटाला मामले के विशेष अभियोजन अधिकारी आरएस चीमा से भी मदद ले सकते हैं। 

तीन सदस्यीय इस पीठ ने सीबीआई के पूर्व स्पेशल डायरेक्टर एमएल शर्मा की कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट पर गौर करते हुए यह निर्देश दिया है। मालूम हो कि एमएल शर्मा की कमेटी ने इशारा किया है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि रंजीत सिन्हा ने कोयला खदान आवंटन मामलों की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी और अपने निवास पर इस मामले के आरोपियों से कई बार मुलाकात भी की थी।

कमेटी ने रंजीत सिन्हा के सरकारी आवास की विजिटर्स डायरी को सही करार दिया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि इन मुलाकातों से संभव है कि रंजीत सिन्हा ने जांच के काम को प्रभावित करने की कोशिश की हो।

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