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CJI UU Lalit: नागपुर में बिताए दिनों को याद कर भावुक हुए चीफ जस्टिस, पूरी क्षमता के साथ काम करने का किया वादा
Sat, 03 Sep 2022 09:44 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 03 Sep 2022 09:44 PM IST
सार
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से उनके लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। यहां उन्होंने सीजेआई के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अपने सर्वोत्तम ज्ञान और क्षमता के अनुसार सबकुछ करने का वादा किया।
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सीजेआई यूयू ललित
- फोटो : ANI
विस्तार
भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) यूयू ललित शनिवार को एक वकील के रूप में अपने शुरुआत के महाराष्ट्र के नागपुर में बिताए दिनों को याद करते हुए भावुक हो गए और उनके आंसू छलक पड़े।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से उनके लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। यहां उन्होंने सीजेआई के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अपने सर्वोत्तम ज्ञान और क्षमता के अनुसार सबकुछ करने का वादा किया।
नागपुर में बोलते हुए सीजेआई भावुक हुए जहां उन्होंने अपनी कानून के साथ यात्रा शुरू की थी। सीजेआई ने रुडयार्ड किपलिंग की एक कविता का उल्लेख किया और कहा- जीवन एक यात्रा है जि आप करते हैं और यह भावुक कर देता है कि यह (जीवन) वह नहीं है जिसे आपने पूरा किया है, लेकिन आप इसे किस तरह पूरा करते हैं।
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इसके बाद सीजेआई के आंसू निकल पड़े। फिर कुछ क्षण के लिए उन्होंने खद को संभाला और अपने आंसू पोंछे और वहां मौजूद लोगों से इसके लिए क्षमा मांगी।
उन्होंने कहा, "मुझे सिर्फ एक वादा करना है..मैं अपनी पूरी जानकारी और क्षमता के अनुसार सबकुछ करूंगा।" उन्होंने कहा कि उनके पास नागपुर की यादें हैं।
सीजेआई ने कहा, मैं भाग्यशाली रहा हूं कि मैं वकीलों के परिवार से आता हूं। मेरे दाता ने 1920 में जिला सोलापुर में शुरुआत की थी। तीन महीने बाद जब में पद छोड़ दूंगा तो मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी कि मेरी पिछली और अगली पीढ़ी अभ्यास में हैं।
उन्होंने पिछले हफ्ते भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ली है और इस साल 8 नवंबर तक इस पद पर रहेंगे।
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हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से उनके लिए एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। यहां उन्होंने सीजेआई के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अपने सर्वोत्तम ज्ञान और क्षमता के अनुसार सबकुछ करने का वादा किया।
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नागपुर में बोलते हुए सीजेआई भावुक हुए जहां उन्होंने अपनी कानून के साथ यात्रा शुरू की थी। सीजेआई ने रुडयार्ड किपलिंग की एक कविता का उल्लेख किया और कहा- जीवन एक यात्रा है जि आप करते हैं और यह भावुक कर देता है कि यह (जीवन) वह नहीं है जिसे आपने पूरा किया है, लेकिन आप इसे किस तरह पूरा करते हैं।
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इसके बाद सीजेआई के आंसू निकल पड़े। फिर कुछ क्षण के लिए उन्होंने खद को संभाला और अपने आंसू पोंछे और वहां मौजूद लोगों से इसके लिए क्षमा मांगी।
उन्होंने कहा, "मुझे सिर्फ एक वादा करना है..मैं अपनी पूरी जानकारी और क्षमता के अनुसार सबकुछ करूंगा।" उन्होंने कहा कि उनके पास नागपुर की यादें हैं।
सीजेआई ने कहा, मैं भाग्यशाली रहा हूं कि मैं वकीलों के परिवार से आता हूं। मेरे दाता ने 1920 में जिला सोलापुर में शुरुआत की थी। तीन महीने बाद जब में पद छोड़ दूंगा तो मुझे सबसे ज्यादा खुशी होगी कि मेरी पिछली और अगली पीढ़ी अभ्यास में हैं।
उन्होंने पिछले हफ्ते भारत के 49वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ली है और इस साल 8 नवंबर तक इस पद पर रहेंगे।