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CAA: 'बिना एनआरसी के आवेदन पर किसी को भी नागरिकता मिली तो दे दूंगा इस्तीफा', बोले सीएम सरमा
Tue, 12 Mar 2024 03:11 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहटी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहटी
Published by: श्वेता महतो
Updated Tue, 12 Mar 2024 03:11 PM IST
सार
असम में प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सीएए लागू होने के बाद लाखों की संख्या में लोग राज्य में प्रवेश किए थे। इस पर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि अगर ऐसा होता है तो मैं विरोध करने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा
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हिमंत बिस्वा सरमा
- फोटो : Social Media
विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि अगर किसी व्यक्ति को बिना एनआरसी के आवेदन पर नागरिकता मिलती है तो वह इस्तीफा दे देंगे। उनका यह बयान सोमवार को केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन अधिनियम के नियमों को लागू करने पर असम में विपक्षी पार्टियों के प्रदर्शन के बाद आई है।
असम के सीएम ने कहा, "मैं असम का बेटा हूं और अगर एक भी व्यक्ति जिसने एनआरसी के लिए आवेदन नहीं किया है और उसे नागरिकता मिलती है तो मैं इस्तीफा देने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा।" प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सीएए लागू होने के बाद लाखों की संख्या में लोग राज्य में प्रवेश किए थे।
उन्होंने कहा, "अगर ऐसा होता है तो मैं विरोध करने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएए को लेकर कुछ भी नया नहीं है अब पोर्टल पर आवेदन का समय आ गया है।" उन्होंने कहा, "अब पोर्टल पर डेटा बताएगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कानून का विरोध करने वालों के लिए यह दावें सही है या नहीं।"
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सीएए का समर्थन नहीं करने वालों को अदालत जाने का सुझाव
सीएम सरमा ने आगे कहा, "सीएए का समर्थन करने वाले भी असम में है और जो इसका समर्थन नहीं कर रहे हैं, वे भी यहां है। जो भी सीएए का विरोध कर रहे हैं, वे कोर्ट जा सकते हैं। हमारा उद्देश्य राज्य में शांति बनाए रखना है। मैं सभी से अपील करना चाहता हूं कि वे इस दिशा में आगे बढ़ें।"
क्या है नागरिकता संशोधन अधिनियम
बता दें कि सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। ऐसे अल्पसंख्यक, 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों। इससे पहले भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 11 साल तक भारत में रहना जरूरी था। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत इस नियम को आसान बनाया गया है। नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक से छह साल किया गया है।
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असम के सीएम ने कहा, "मैं असम का बेटा हूं और अगर एक भी व्यक्ति जिसने एनआरसी के लिए आवेदन नहीं किया है और उसे नागरिकता मिलती है तो मैं इस्तीफा देने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा।" प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सीएए लागू होने के बाद लाखों की संख्या में लोग राज्य में प्रवेश किए थे।
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उन्होंने कहा, "अगर ऐसा होता है तो मैं विरोध करने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएए को लेकर कुछ भी नया नहीं है अब पोर्टल पर आवेदन का समय आ गया है।" उन्होंने कहा, "अब पोर्टल पर डेटा बताएगा। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि कानून का विरोध करने वालों के लिए यह दावें सही है या नहीं।"
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सीएए का समर्थन नहीं करने वालों को अदालत जाने का सुझाव
सीएम सरमा ने आगे कहा, "सीएए का समर्थन करने वाले भी असम में है और जो इसका समर्थन नहीं कर रहे हैं, वे भी यहां है। जो भी सीएए का विरोध कर रहे हैं, वे कोर्ट जा सकते हैं। हमारा उद्देश्य राज्य में शांति बनाए रखना है। मैं सभी से अपील करना चाहता हूं कि वे इस दिशा में आगे बढ़ें।"
#WATCH | On CAA, Assam CM Himanta Biswa Sarma says, "Those who support CAA are also in Assam and those who do not support it are also there... Those who oppose CAA can go to the court. Our aim is to ensure peace in the state and I would appeal to everyone to move forward in this… pic.twitter.com/bQZhyIi6Jk
— ANI (@ANI) March 12, 2024
क्या है नागरिकता संशोधन अधिनियम
बता दें कि सीएए के जरिए पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता लेने में आसानी होगी। ऐसे अल्पसंख्यक, 31 दिसंबर, 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हों। इससे पहले भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए किसी भी व्यक्ति को कम से कम 11 साल तक भारत में रहना जरूरी था। नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत इस नियम को आसान बनाया गया है। नागरिकता हासिल करने की अवधि को एक से छह साल किया गया है।