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वाशिंगटन, मॉस्को की तर्ज पर दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों की होगी हवाई सुरक्षा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 30 Jul 2018 04:21 AM IST
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वाशिंगटन और मॉस्को की तर्ज पर दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों को अभेद्य सुरक्षा मुहैया कराने के लिए हवाई रक्षा प्रणाली से लैस करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए केंद्र सरकार अमेरका, रूस और इस्राइल से मिसाइल, लांचर और अन्य हथियार खरीद रही है। वहीं इस योजना के तहत स्वदेशी विकसित मिसाइलों को भी तैनात किया जाएगा।
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अमेरका, रूस, इस्राइल से हो रही मिसाइल, लांचर आदि की खरीददारी
दिल्ली को मिलने वाले इस नए रक्षा कवच का मकसद किसी भी सैन्य और 9/11 सरीखे आतंकी हमलों से बचाना है, ताकि मिसाइल, ड्रोन और लड़ाकू विमानों के जरिये कोई हमला ना हो सके। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने अमेरिका से करीब 70 अरब रुपये में ‘नेशनल एडवांस्ड सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम-2’ (एनएएसएएमएस) को अधिग्रहण करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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अमेरिका से करीब 70 अरब रुपये में मिसाइल सिस्टम को मंजूरी
इसके तहत तीन दिशाओं में काम करने वाले सेंटिनल राडार, शॉर्ट और मीडियम रेंज की मिसाइलें, लांचर, फायर डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर और ‘कमांड एंड कंट्रोल यूनिट’ शामिल होंगी। इससे दुश्मन के हवाई हमलों को तेजी से पहचानने, उन्हें ट्रैक करने और हवा में ही मार गिराने में सफलता हासिल होगी। बता दें कि अमेरिकी राजधानी वाशिंगटन और रूस की राजधानी मॉस्को के पास भी ऐसी ही मिसाइल रक्षा प्रणाली का सुरक्षा कवच मौजूद है।
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एनएएसएएमएस हासिल के लिए भारत ने अपना कदम तब आगे बढ़ाया है जब डीआरडीओ अपनी 2 टियर बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (बीएमडी) शील्ड को विकसित करने के अंतिम चरण में है। इसे पृथ्वी के वायुमंडल के अंदर और बाहर परमाणु मिसाइलों को ट्रैक और नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है।
दोबारा गठित होगा वीआईपी-89
‘संपूर्ण दिल्ली एरिया एयर डिफेंस प्लान’ के तहत आने वाले वीआईपी-89 क्षेत्र को दोबारा गठित करने की बात हो रही है। इस क्षेत्र के तहत राष्ट्रपति भवन, संसद, नॉर्थ और साउथ ब्लॉक शामिल है। साथ ही विमानों को मार गिराने को लेकर फैसले लेने के टाइम को भी कम किया जाएगा, ताकि उन्हें समय रहते अपने कब्जे में भी लिया जा सके।
पहली बार गैर-नाटो देश को मिलेगा अमेरिकी ड्रोन
अमेरिका पहले ही 22 समुद्री गार्जियन ड्रोन भारत को बेचने की मंजूरी दे चुका है जिसकी कुल लागत दो अरब डॉलर है। यह पहला ऐसा मौका है जब वह एक ऐसे देश को ड्रोन की आपूर्ति कर रहा है जो कि ‘उत्तर अटलांटिक संधि संगठन’ (नाटो) का हिस्सा नहीं है। इसके साथ ही भारत अपनी हवाई रक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए लगभग 40 हजार करोड़ रुपये का एस-400 ट्रंफ हवाई रक्षा मिसाइल प्रणाली रूस से खरीद रहा है।