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राजीव गांधी की हत्या से 5 साल पहले ही CIA को थी भनक
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 29 Jan 2017 10:40 PM IST
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अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 1991 में हुई हत्या से पांच साल पहले ही इस बारे में अपनी आशंका को पुख्ता करते हुए विस्तृत खाका तैयार कर लिया था। इस बारे में पूरा आकलन भी कर लिया था कि यदि राजीव गांधी की हत्या हो जाती है या भारतीय राजनीतिक परिदृश्य से उनकी विदाई हो जाती है तो क्या होगा।
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‘इंडिया आफ्टर राजीव...’ नामक 23 पन्ने की यह रिपोर्ट मार्च 1986 में ही पेश हो गई थी जिसमें सीआईए के कई वरिष्ठ अधिकारियों के बयान दर्ज हैं। सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) ने हाल ही में यह रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट का कुछ हिस्सा मिट गया है इसलिए इसका पूरा शीर्षक भी पता नहीं चल पाया है। इसे सीआईए के पास जनवरी 1986 तक उपलब्ध इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है।
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रिपोर्ट का पहला वाक्य इस तरह लिखा है: ‘प्रधानमंत्री राजीव गांधी 1989 में अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले कम से कम एक बार हत्या की साजिश का शिकार हो सकते हैं।’ हालांकि इसमें स्पष्ट कहा गया है कि हत्या की साजिश निकट भविष्य में उनके लिए बड़ा खतरा है। पांच साल बाद ही 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुंबदूर में गांधी की हत्या हो जाती है।
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हत्या के बाद की स्थिति तक का आकलन है खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट में
रिपोर्ट के पहले खंड ‘की जजमेंट्स’ में पूरे विस्तार से वर्णन किया गया है कि राजीव गांधी की अनुपस्थिति में नेतृत्व में अचानक किसी तरह का बदलाव आता है तो भारतीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हालात कैसे होंगे और अमेरिका, तत्कालीन सोवियत रूस और एशियाई क्षेत्र के साथ भारत के संबंधों पर क्या असर पड़ेगा। इस रिपोर्ट में गांधी की जान के लिए खतरा समझे जाने वाले कई आतंकवादी समूहों और उनकी हत्या से उपजे परिणाम का भी जिक्र है।
रिपोर्ट में लिखा है, ‘यदि राजीव गांधी सिख या कश्मीरी मुस्लिम आतंकी संगठन के हाथों मारे जाते हैं तो भारतीय राष्ट्रपति द्वारा कड़े सुरक्षा उपाय करने के बावजूद देशव्यापी सांप्रदायिक हिंसा की आग भड़क सकती है। (आगे की पंक्तियां मिटी हुई हैं)।’ दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में उनके उत्तराधिकारी के तौर पर पीवी नरसिंहराव और वीपी सिंह या फिर किसी ऐसे ‘संभावित उम्मीदवारों’ के नाम भी बताए गए हैं, जो राजीव गांधी से अलग हो चुके हैं। गौरतलब है कि राजीव की हत्या के बाद ही नरसिंहराव 1991 में प्रधानमंत्री बने थे।
रिपोर्ट में लिखा है, ‘यदि राजीव गांधी सिख या कश्मीरी मुस्लिम आतंकी संगठन के हाथों मारे जाते हैं तो भारतीय राष्ट्रपति द्वारा कड़े सुरक्षा उपाय करने के बावजूद देशव्यापी सांप्रदायिक हिंसा की आग भड़क सकती है। (आगे की पंक्तियां मिटी हुई हैं)।’ दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में उनके उत्तराधिकारी के तौर पर पीवी नरसिंहराव और वीपी सिंह या फिर किसी ऐसे ‘संभावित उम्मीदवारों’ के नाम भी बताए गए हैं, जो राजीव गांधी से अलग हो चुके हैं। गौरतलब है कि राजीव की हत्या के बाद ही नरसिंहराव 1991 में प्रधानमंत्री बने थे।