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एलएसी पर थोड़ा पीछे हटकर भारत को उलझाए रखना चाहता है चीन

Sun, 28 Jun 2020 05:00 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 28 Jun 2020 05:00 AM IST
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China wants to keep India entangled by retreating a bit on LAC
एलएसी पर अधिकारियों की बैठक (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। गलवां घाटी, पैंगोंग त्सो झील और हॉट स्प्रिंग से पीछे हटने के वादे के बाद चीन कई तरह के नए पैंतरे अपना रहा है।

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पिछले तीन चार दिन से चीनी सेना तीनों जगहों से थोड़े सैनिकों को पीछे कर भारत को उलझाए रखते हुए अन्य साजो सामान और निर्माण संबंधी तैयारियां मजबूत कर रहा है। इधर भारतीय सेना मिरर इमेज की रणनीति अपनाए हुए पूरी तरह तैयार है यानी भारत की एलएसी के प्रत्येक इलाके में चीनी सेना के बिल्कुल बराबर स्तर की तैनाती है।
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इधर दिल्ली में सेना और सरकार के शीर्ष अधिकारियों की बैठकें लगातार हो रही हैं। उच्चपदस्थ सैन्य सूत्रों के मुताबिक, भारत 22 जून को दोनों देशों के कोर कमांडरों की बातचीत में पीछे हटने पर बनी सहमति के बाद चीनी हरकतों को भांप रहा है।
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यह काम कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर हो रहा है। अगले दो तीन दिनों में कोई ठोस सकारात्मक संकेत नहीं मिला तो सेना अपने नए रंग दिखाएगी। हालांकि किसी भी कार्रवाई से पहले भारत चीन के साथ एक और सैन्य स्तर की बातचीत के लिए तैयार है। इसके लिए चीनी समकक्ष को न्योता भेजा गया है।

चीन से नहीं मिले सकारात्मक संकेत तो भारत और बढ़ाएगा तैनाती

भारत ने किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए दोतरफा तैयारी की है। सूत्रों ने बताया कि डेपसांग के वाई जंक्शन पर चीनी सेना के किसी भी दुस्साहस का जवाब देने के लिए तैयारी की गई है। इन तैयारियों को देखते हुए चीन फिलहाल पेट्रोलिंग प्लाइंट 10 (पीपी10) और पीपी 13 के बीच गश्त में कोई अड़चन नहीं डाल रहा है। सामरिक लिहाज से डेपसांग काफी अहम है क्योंकि यहां से दौलत बेग ओल्डी, काराकोरम रोड और सियाचिन के रास्ते निकलते हैं।

चीन को चुकानी होगी भारी कूटनीतिक कीमत

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत के प्रति आक्रामक रुख के लिए चीन को दशकों तक भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। विशेषज्ञों ने अमेरिका के साथ चीन के ‘टैरिफ वॉर’ और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर ऑस्ट्रेलिया के साथ बढ़ती तकरार और हांगकांग में तेजी से बिगड़ती स्थिति का भी जिक्र किया। पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा, चीन ने बड़ी गलती की है।

चीन ने भारत और अन्य स्थानों पर अपनी साख को खो दिया है। पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रत साहा ने कहा कि चीन ने अपनी अस्वीकार्य सैन्य आक्रामकता से खुद को अलग-थलग कर लिया है। इसके लिए उसे भारी कूटनीतिक और आर्थिक कीमत चुकानी होगी।

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