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चीन की इस बस पर आया नरेंद्र मोदी का दिल
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 07 Aug 2016 03:05 PM IST
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नॉर्थ चीन में इस बस का पहला ट्रायल किया गया।
- फोटो : Getty Images
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दुनिया की पहली ट्रांजिट एलिवेटेड बस (TEB) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दिल जीत लिया है। चीन ने इस ट्रेन का पहला सफल ट्रायल पूरा किया है।
रोड के ऊपर चलने वाली इस बस की खास बात ये है कि इसके नीचे से कारें निकल सकती है। प्रधानमंत्री ने रोड और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय से इस बस के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने को कहा है।
साथ ही देश के व्यस्त शहरों की सड़कों पर चलाए जाने की संभावना पर भी गौर करने को कहा है।
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रोड के ऊपर चलने वाली इस बस की खास बात ये है कि इसके नीचे से कारें निकल सकती है। प्रधानमंत्री ने रोड और ट्रांसपोर्ट मंत्रालय से इस बस के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने को कहा है।
साथ ही देश के व्यस्त शहरों की सड़कों पर चलाए जाने की संभावना पर भी गौर करने को कहा है।
'जुटाई जा रही है जानकारी'
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इस हफ्ते शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बस का खास तौर पर जिक्र किया। इस बैठक में हाइवे को विस्तार देने के प्रस्तावों के बारे में प्रेजेंटेशन भी दी गई।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तरी चीन के किनहुआंगदो में 3 अगस्त को टेब बस का सफल ट्रायल किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 22 मीटर लंबी टेब बस एक छोटी ट्रेन की तरह है, जो सड़क के दोनों किनारों को पकड़ चलती है। इसे बिजली से चलाया जाता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तरी चीन के किनहुआंगदो में 3 अगस्त को टेब बस का सफल ट्रायल किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक 22 मीटर लंबी टेब बस एक छोटी ट्रेन की तरह है, जो सड़क के दोनों किनारों को पकड़ चलती है। इसे बिजली से चलाया जाता है।
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ब्राजील और इंडोनेशिया की भी दिलचस्पी
सूत्रों का कहना है कि इस बस में 300 से 1200 लोग सफर कर सकते हैं। लिहाजा भारतीय शहरों में भीड़ भरे ट्रांसपोर्ट सिस्टम के लिए यह बेहतर विकल्प हो सकती है।
साथ ही यह प्रदूषण मुक्त भी है। हालांकि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह बस केवल सीधी सड़कों पर ही चल सकती है।
चीन की इस खास बस में ब्राजील और इंडोनेशिया ने भी दिलचस्पी दिखाई है।
साथ ही यह प्रदूषण मुक्त भी है। हालांकि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह बस केवल सीधी सड़कों पर ही चल सकती है।
चीन की इस खास बस में ब्राजील और इंडोनेशिया ने भी दिलचस्पी दिखाई है।