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खतरनाक इरादे: पैंगोंग त्सो झील के पास एक और पुल बना रहा चीन, सैटेलाइट इमेज से हुआ खुलासा
Wed, 18 May 2022 08:11 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 18 May 2022 08:11 PM IST
सार
अगस्त 2020 में भारतीय सैनिकों द्वारा पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर कई रणनीतिक चोटियों पर कब्जा करने के बाद चीन अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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पैंगोंग झील
- फोटो : Social media
विस्तार
चीन पूर्वी लद्दाख में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पैंगोंग त्सो झील के आसपास के क्षेत्र में एक दूसरे पुल का निर्माण कर रहा है और यह चीनी सेना को इस क्षेत्र में अपने सैनिकों को जल्दी से पहुंचाने में मदद कर सकता है। सैटेलाइट इमेज और मामले के जानकार लोगों के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। दो साल से अधिक समय से पूर्वी लद्दाख में कई जगहों पर भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच जारी गतिरोध के बीच पुल का निर्माण किया जा रहा है। चीन के नए निर्माण पर भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या टिप्पणी नहीं आई है।
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पहले ही एक पुल बना चुका है चीन
अगस्त 2020 में भारतीय सैनिकों द्वारा पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर कई रणनीतिक चोटियों पर कब्जा करने के बाद चीन अपने सैन्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। भारत भी सैन्य तैयारियों को बढ़ाने के समग्र प्रयासों के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलों, सड़कों और सुरंगों का निर्माण कर रहा है। पता चला है कि चीन ने हाल ही में इलाके में पहले पुल का निर्माण कार्य पूरा किया है। जानकारों ने कहा कि नया पुल वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से 20 किमी से अधिक क्षेत्र में बनाया जा रहा है। एलएसी के साथ चीनी गतिविधियों पर नजर रखने वाले भू-स्थानिक खुफिया शोधकर्ता डेमियन साइमन ने ट्विटर पर नए निर्माण की उपग्रह छवियां पोस्ट की हैं।
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सैनिकों की भारी आवाजाही का उद्देश्य
@detresfa_ हैंडल का उपयोग करने वाले साइमन ने कहा कि एक बड़ा पुल पहले पुल के समानांतर विकसित किया जा रहा है। निर्माण का संभावित उद्देश्य झील के ऊपर भारी आवाजाही करना है। साइमन द्वारा पोस्ट की गई सैटेलाइट इमेज में कहा गया है कि पुल दोनों तरफ से एक साथ बनाया जा रहा है। पुल से पैंगोंग त्सो में एलएसी के आसपास के क्षेत्र में रुडोक के गहराई क्षेत्र से दूरी के काफी कम होने की संभावना है। पूर्वी लद्दाख विवाद 2020 में 4-5 मई को शुरू हुआ था।
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भारत का यसास्थिति बहाली पर जोर
भारत गतिरोध से पहले यथास्थिति की बहाली पर जोर देता रहा है। भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख विवाद को सुलझाने के लिए अब तक 15 दौर की सैन्य वार्ता की है। वार्ता के परिणामस्वरूप दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट पर और गोगरा क्षेत्र में सेना को हटाने की प्रक्रिया पूरी की। भारत लगातार इस बात पर कायम रहा है कि एलएसी पर शांति और शांति द्विपक्षीय संबंधों के समग्र विकास के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के पास अभी इस संवेदनशील क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं।