{"_id":"5792a38c4f1c1bc148c4c3aa","slug":"children-are-not-football-sc","type":"story","status":"publish","title_hn":"'बच्चे फुटबाल नहीं जिन्हें इधर से उधर फेंका जाए'","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
'बच्चे फुटबाल नहीं जिन्हें इधर से उधर फेंका जाए'
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 23 Jul 2016 04:21 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बच्चों को एक स्कूल से दूसरे स्कूल में शिफ्ट करने की बात से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बच्चे फुटबाल नहीं हैं कि उन्हें यहां से वहां फेंक दिया जाए। मामला लखनऊ के सिटी मॉंटेसरी स्कूल का है। वास्तव में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सिटी मॉंटेसरी स्कूल ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 13 बच्चों का दाखिला लिया था लेकिन अब उसका कहना है कि क्यों नहीं इन बच्चों को उनके घर के नजदीक वाले स्कूलों में शिफ्ट कर दिया जाए।
विज्ञापन
मालूम हो कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत सभी निजी और सरकारी स्कूलों में 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित होने की बात है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल के पीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सिटी मॉंटेसरी स्कूल की ओर से कहा गया कि उसने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 13 बच्चों को अपने स्कूल में दाखिला दे दिया है। स्कूल ने पीठ के समक्ष शिकायत की कि लखनऊ में और भी स्कूल हैं लेकिन सिर्फ उसे ही सिर्फ आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को दाखिला लेने के लिए क्यों कहा गया।
विज्ञापन
सिटी मॉंटेसरी स्कूल का कहना था कि जो स्कूल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के घरों से नजदीक है, उन स्कूलों में भी बच्चों को शिफ्ट किया जा सकता है। स्कूल की इस दलील पर पीठ ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि बच्चे फुटबाल नहीं हैं कि उन्हें एक जगह से उठाकर दूसरी जगह फेंक दिया जाए। पीठ ने इस संबंध में स्कूल और यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने भी कहा कि बच्चों को दूसरे स्कूलों में नहीं शिफ्ट किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
स्कूल की दलीलों पर राज्य सरकार ने भी कड़ी आपत्ति जताई। गौरतलब है कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सिटी मॉंटेसरी स्कूल को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के 13 बच्चों को दाखिला लेने के लिए कहा था।
एकलपीठ केआदेश को स्कूल ने खंडपीठ ने चुनौती दी थी, लेकिन स्कूल को वहां भी निराशा हाथ लगी। जिसकेबाद स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन गत वर्ष सितंबर महीने में सुप्रीम कोर्ट ने भी स्कूल को राहत देने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसकेबाद सिटी मॉंटेसरी स्कूल ने 13 बच्चों को दाखिला तो ले लिया लेकिन अब यह कह रही है कि इन बच्चों को उनके घरों के नजदीक स्कूल में शिफ्ट किया जाना चाहिए।