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दुष्कर्म से पैदा हुआ बच्चा भी अलग से मुआवजा पाने का हकदार: हाईकोर्ट

Tue, 13 Dec 2016 09:42 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 13 Dec 2016 09:42 PM IST
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Child born by Rape also deserves separate compensation: HC
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : Google

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दुष्कर्म से कोई बच्चा पैदा होता है तो वह अपनी मां को मिले मुआवजे से अलग से मुआवजा पाने का हकदार है। अदालत ने कहा बच्चे की मां को बतौर पीड़ित मिले मुआवजे का इससे कोई असर नहीं पड़ेगा। अदालत ने नाबालिग बेटी से दुष्कर्म के दोषी को मिली आजीवन कारवास की सजा को चुनौती अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।

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न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति आरके गाबा की खंडपीठ ने निचली अदालत द्वारा इस मामले में कई गलतियां करने पर भी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा हमने पहले ही तय कर दिया था कि पीड़िता को दिल्ली सरकार द्वारा मुआवजा स्कीम के तहत मुआवजा प्रदान किया जाए। निचली अदालत ने पीड़िता को 15 लाख रुपये मुआवजा प्रदान किया है जबकि कानून में यह अधिकतम राशि साढ़े सात लाख रुपये है। अत: वे मुआवजा राशि घटाकर साढ़े सात रुपये करते है।
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खंडपीठ ने कहा ट्रायल कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की पहचान भी सार्वजनिक कर तय दिशा निर्देशों का उल्लंघन किया है। अदालत ने कहा कि यह विडंबना है कि कानून में दुष्कर्म से पीड़िता के बच्चे के लिए मुआवजे का स्पष्ट प्रावधान नहीं है।
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अदालत ने कहा कि ऐसा बच्चा अपनी मां को मिले मुआवजे से अलग से स्वतंत्र रूप से मुआवजा पाने का हकदार है। अदालत ने अपनी सौतेली नाबालिग पुत्री से दुष्कर्म के दोषी को पूरी जिंदगी के लिए जेल भेजते हुए यह निर्णय दिया है।

'अपनी वासना की पूर्ति के लिए बेटी को अपना शिकार बनाया'

Child born by Rape also deserves separate compensation: HC

खंडपीठ ने कहा कि दुष्कर्म से पैदा हुआ बच्चा चाहे उसकी मां नागालिग हो या फिर बालिग, स्पष्ट है कि वह अपराधी के कार्य से पीड़ित है। ऐसे में बच्चा स्वतंत्र रूप से अपनी मां से अलग से मुआवजा पाने का हकदार है।

अदालत ने कहा दोषी के कृत्य से ही पीड़िता 14 वर्ष की आयु में मां बन गई और मां के प्रति किए गए अपराध से ही उसका जन्म हुआ है। अदालत ने कहा यह घिनौना कृत्य है और दोषी ने अपनी पत्नी व सौतेली बेटी के भरोसे को तोड़ा है।

उसने अपनी वासना की पूर्ति के लिए बेटी को अपना शिकार बनाया। उसके कृत्य का असर बेटी के मन व शरीर पर हमेशा बना रहेगा ऐसे में उसे राहत देना उचित नहीं है। अदालत ने कहा दोषी किसी भी प्रकार से दया का पात्र नहीं है और उसे पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

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