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चंद्रा को एक्सटेंशन का इंतजार और कानून मंत्रालय ने की रिटायर करने की तैयारी
शशिधर पाठक, नई दिल्ली
Updated Thu, 29 Nov 2018 07:29 PM IST
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प्रमुख सचिव सुरेश चंद्रा (फाइल फोटो)
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कानून मंत्रालय के सचिव सुरेश चंद्रा को सचिव पद पर सेवा विस्तार मिलने का भरोसा है। उनकी लॉबी के अफसर भी बड़ी उम्मीद के साथ सेवा विस्तार की खबर आने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं मंत्रालय ने अपने शीर्षस्थ अफसर को 30 नवंबर 2018 को रिटायर करने की तैयारी कर ली है।
इसके लिए बाकायदा चंद्रा को उनकी बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाने वाला मोमेंटो भी तैयार है। इतना ही नहीं सुरेश चंद्रा के लिए 30 नवंबर 2018 को फेयरवेल पार्टी का इंतजाम भी किया जा चुका है। अमर उजाला को प्राप्त जानकारी के अनुसार यह फेयरवेल 30 नवंबर को 3.30 बजे होना प्रस्तावित है।
फेयरवेल का सर्कुलर कानून मंत्रालय के विधायी विभाग के सचिव के राजू और मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी रामायण यादव, रीता वशिष्ठ, के विश्वाल, सभी संयुक्त सचिव और अन्य को भी भेज दिया गया है। हालांकि मंत्रालय के आधे अधिकारियों को अपने सचिव सुरेश चंद्रा की अच्छी पकड़ पर पूरा भरोसा है। सूत्र मानते हैं कि अभी उनके कामकाज का शुक्रवार को आखिरी दिन है। शुक्रवार को सेवा विस्तार की खबर आते ही सारा मामला पलट सकता है।
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जेटली और रविशंकर का विश्वास हासिल
बताते हैं कानून मंत्रालय के सचिव चंद्रा को वित्त मंत्री अरुण जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का पूरा भरोसा हासिल है। एक संयुक्त सचिव का कहना है कि उनके साहब का भाग्य ने हमेशा साथ दिया है। जब मंत्रालय में सचिव पद की नियुक्ति होनी थी, तब वहीं पिक्चर में नहीं थे। यहां तक कि उनके सचिव बन पाने का कोई चांस नहीं था।
बताते हैं चंद्रा की योग्यता पूरी नहीं हो रही थी, लेकिन उन्हें सचिव बनाने के लिए जो योग्यता का पैमाना बनाया गया, उसमें कोई भी मंत्रालय का अधिकारी फिट नहीं बैठा। सूत्र का कहना है कि आप इंतजार कीजिए, शुक्रवार तक भाग्य फिर पलटी मार सकता है और चंद्रा को सचिव पद पर सेवा विस्तार मिल सकता है।
मंत्रालय के कुछ अधिकारी जोह रहे हैं बाट
मंत्रालय में कुछ अधिकारी अपना भाग्य चमकने का इंतजार कर रहे हैं। कानून मामलों के मंत्रालय में एक एडिशनल सेक्रेटरी के चेहरे पर खास रौनक है। उनके करीबी मानकर चल रहे हैं कि चंद्रा को सेवा विस्तार मिलना मुश्किल है, क्योंकि चंद्रा का नाम सीबीआई अफसरों के विवाद में आया है।
सीबीआई के डीआईजी एमके सिन्हा ने चंद्रा पर सतीश बाबू सना को बचाने के लिए चंद्रा पर हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। सूत्र का कहना है कि यह मामला गंभीर है और चंद्रा को आसानी से सेवा विस्तार नहीं मिल सकता। ऐसा होने पर एडिशनल सेक्रेटरी के हाथ में भी शीर्ष पद आ सकता है। एक कयास यह भी है कि यदि चंद्रा को विस्तार न मिला तो विधायी विभाग के सचिव को लीगल अपेयर मामलों के सचिव की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है और विधायी विभाग में नया सचिव तैनात किया जा सकता है।
ऐसा होने पर विधायी विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी का भाग्य साथ दे सकता है। एक चर्चा और भी है। कदाचित एक साल का सेवा विस्तार मिल गया तो कुछ एडिशनल सेक्रेटरी कभी मंत्रालय का सचिव नहीं बन पाएंगे। क्योंकि रिटायर होने में साल भर से भी कम समय बचा है।
गेंद पीएमओ में
सचिव चंद्रा को सेवा विस्तार मिलने का मामला पीएमओ में है। केंद्रीय कैबिनेट सचिवालय और डीओपीटी को इस पर निर्णय लेना है। माना जा रहा है कि यह निर्णय प्रधानमंत्री की सहमति से ही संभव है। क्योंकि चंद्रा का नाम सीबीआई के अफसरों के विवाद में आ चुका है।
सीबीआई अफसरों के विवाद का मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। हालांकि चंद्रा के प्रबल पैरोकारों में वित्त मंत्री जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद माने जा रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने चंद्रा को सेवा विस्तार दिये जाने का अनुमोदन भी कर दिया है।
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इसके लिए बाकायदा चंद्रा को उनकी बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाने वाला मोमेंटो भी तैयार है। इतना ही नहीं सुरेश चंद्रा के लिए 30 नवंबर 2018 को फेयरवेल पार्टी का इंतजाम भी किया जा चुका है। अमर उजाला को प्राप्त जानकारी के अनुसार यह फेयरवेल 30 नवंबर को 3.30 बजे होना प्रस्तावित है।
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फेयरवेल का सर्कुलर कानून मंत्रालय के विधायी विभाग के सचिव के राजू और मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी रामायण यादव, रीता वशिष्ठ, के विश्वाल, सभी संयुक्त सचिव और अन्य को भी भेज दिया गया है। हालांकि मंत्रालय के आधे अधिकारियों को अपने सचिव सुरेश चंद्रा की अच्छी पकड़ पर पूरा भरोसा है। सूत्र मानते हैं कि अभी उनके कामकाज का शुक्रवार को आखिरी दिन है। शुक्रवार को सेवा विस्तार की खबर आते ही सारा मामला पलट सकता है।
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जेटली और रविशंकर का विश्वास हासिल
बताते हैं कानून मंत्रालय के सचिव चंद्रा को वित्त मंत्री अरुण जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का पूरा भरोसा हासिल है। एक संयुक्त सचिव का कहना है कि उनके साहब का भाग्य ने हमेशा साथ दिया है। जब मंत्रालय में सचिव पद की नियुक्ति होनी थी, तब वहीं पिक्चर में नहीं थे। यहां तक कि उनके सचिव बन पाने का कोई चांस नहीं था।
बताते हैं चंद्रा की योग्यता पूरी नहीं हो रही थी, लेकिन उन्हें सचिव बनाने के लिए जो योग्यता का पैमाना बनाया गया, उसमें कोई भी मंत्रालय का अधिकारी फिट नहीं बैठा। सूत्र का कहना है कि आप इंतजार कीजिए, शुक्रवार तक भाग्य फिर पलटी मार सकता है और चंद्रा को सचिव पद पर सेवा विस्तार मिल सकता है।
मंत्रालय के कुछ अधिकारी जोह रहे हैं बाट
मंत्रालय में कुछ अधिकारी अपना भाग्य चमकने का इंतजार कर रहे हैं। कानून मामलों के मंत्रालय में एक एडिशनल सेक्रेटरी के चेहरे पर खास रौनक है। उनके करीबी मानकर चल रहे हैं कि चंद्रा को सेवा विस्तार मिलना मुश्किल है, क्योंकि चंद्रा का नाम सीबीआई अफसरों के विवाद में आया है।
सीबीआई के डीआईजी एमके सिन्हा ने चंद्रा पर सतीश बाबू सना को बचाने के लिए चंद्रा पर हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है। सूत्र का कहना है कि यह मामला गंभीर है और चंद्रा को आसानी से सेवा विस्तार नहीं मिल सकता। ऐसा होने पर एडिशनल सेक्रेटरी के हाथ में भी शीर्ष पद आ सकता है। एक कयास यह भी है कि यदि चंद्रा को विस्तार न मिला तो विधायी विभाग के सचिव को लीगल अपेयर मामलों के सचिव की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है और विधायी विभाग में नया सचिव तैनात किया जा सकता है।
ऐसा होने पर विधायी विभाग के एडिशनल सेक्रेटरी का भाग्य साथ दे सकता है। एक चर्चा और भी है। कदाचित एक साल का सेवा विस्तार मिल गया तो कुछ एडिशनल सेक्रेटरी कभी मंत्रालय का सचिव नहीं बन पाएंगे। क्योंकि रिटायर होने में साल भर से भी कम समय बचा है।
गेंद पीएमओ में
सचिव चंद्रा को सेवा विस्तार मिलने का मामला पीएमओ में है। केंद्रीय कैबिनेट सचिवालय और डीओपीटी को इस पर निर्णय लेना है। माना जा रहा है कि यह निर्णय प्रधानमंत्री की सहमति से ही संभव है। क्योंकि चंद्रा का नाम सीबीआई के अफसरों के विवाद में आ चुका है।
सीबीआई अफसरों के विवाद का मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है। हालांकि चंद्रा के प्रबल पैरोकारों में वित्त मंत्री जेटली और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद माने जा रहे हैं। रविशंकर प्रसाद ने चंद्रा को सेवा विस्तार दिये जाने का अनुमोदन भी कर दिया है।