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चंपावत जंगल आग मामला: एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार को पुनर्वास के लिए कार्रवाई करने का दिया निर्देश

Wed, 04 May 2022 04:24 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 04 May 2022 04:24 AM IST
सार

एनजीटी ने कहा कि हमने मामले पर मीडिया की रिपोर्ट पर गौर किया है और हमारा यह विचार है कि आग को नियंत्रित करने और भविष्य की आग को रोकने के लिए उपचारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है।

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Champawat Forest Fire Case NGT directs Uttarakhand government to take Action for Rehabilitation
एनजीटी - फोटो : NGT

विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तराखंड सरकार को हाल ही में चंपावत डिवीजन के जंगल में लगी आग के मामले में प्रभावित क्षेत्र की बहाली और पीड़ितों के पुनर्वास का निर्देश दिया है।

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एनजीटी के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल की अगुवाई वाली पीठ ने 29 अप्रैल को जारी अपने आदेश में कहा, "हम सचिव, वन, उत्तराखंड को मीडिया में उल्लिखित आग की घटना को देखने और प्रभावित व्यक्तियों के पुनर्वास व प्रभावित क्षेत्र की मौजूदा योजनाओं व राज्य के पास उपलब्ध सीएएमपीए फंड के तहत बहाली के लिए निर्देशित करना उचित समझते हैं।"
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एनजीटी ने यह भी कहा, हमने मामले पर मीडिया की रिपोर्ट पर गौर किया है और हमारा यह विचार है कि आग को नियंत्रित करने और भविष्य की आग को रोकने के लिए उपचारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है। पीठ ने कहा, संकट प्रबंधन, पुनर्वास और बहाली के माध्यम से ऐसी जंगल की आग को रोकने और नियंत्रित करने के लिए मानक हैं।
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निवारक उपायों में अलर्ट सिस्टम, जागरूकता पैदा करना, निगरानी करना और मॉक ड्रिल शामिल हैं। आदेश में यह भी कहा गया है कि जंगल की आग पर वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जंगल की आग पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (एनएपीएफएफ) अपनाया है। जिसमें जंगल की आग को रोकने, नियंत्रित करने की कई रणनीतियां हैं।  

उत्तराखंड: लखवाड़ परियोजना की पुनर्विचार मांग वाली याचिका खारिज 
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उस उच्च समिति के गठन के अपने आदेश की समीक्षा की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है, जिसे उत्तराखंड में लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना पर एक रिपोर्ट पेश करने का काम सौंपा गया था।

एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि समीक्षा के आवेदन में कोई ठोस वजह नहीं है, लिहाजा इसे खारिज किया जाता है। पीठ ने कहा, आवेदन में शिकायत की गई है कि मामले के प्रभावी निपटारे के लिए इसमें उभरने वाले मुद्दों पर अपनी राय देने के लिए एक उच्च समिति का गठन करना अधिकार क्षेत्र के बाहर है। ऐसे में समिति का गठन उचित नहीं है।


हम समीक्षा के आवेदन में कोई ठोस वजह नहीं देखते हैं। 
एनजीटी ने परियोजना की व्यावहारिकता, पर्यावरण पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के बारे में अध्ययन करने के लिए जल संसाधन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन किया था। गत 20 जनवरी को जारी आदेश में एनजीटी ने समिति को दो महीने के भीतर अपना अध्ययन पूरा करने का निर्देश दिया था।

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