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भीड़ की हिंसा: केंद्र ने राजस्थान और मणिपुर का एंटी लिंचिंग बिल लौटाया, मांगे कुछ स्पष्टीकरण
Tue, 15 Mar 2022 07:49 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 15 Mar 2022 07:49 PM IST
सार
नोडल मंत्रालयों और विभागों के साथ परामर्श के बाद राजस्थान सरकार और मणिपुर सरकार से 12 अक्टूबर 2021 और 18 नवंबर 2021 को कुछ स्पष्टीकरण मांगे गए हैं।
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पाकिस्तान में मॉब लिंचिंग
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
केंद्र ने कुछ स्पष्टीकरण की मांग करते हुए राजस्थान और मणिपुर के लिंचिंग विरोधी बिल संबंधित राज्य सरकार को वापस कर दिए हैं। केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी के सवाल के जवाब में यह बात कही कि क्या केंद्र सरकार दो विधेयकों के संबंध में समीक्षा और परामर्श प्रक्रिया में देरी कर रही है। सरकार को 'द राजस्थान प्रोटेक्शन फ्रॉम लिंचिंग बिल 2019' और 'द मणिपुर प्रोटेक्शन फ्रॉम मॉब वायलेंस बिल 2018' मिले हैं।
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राय ने एक लिखित प्रश्न के उत्तर में कहा कि नोडल मंत्रालयों और विभागों के साथ परामर्श के बाद राजस्थान सरकार और मणिपुर सरकार से 12 अक्टूबर 2021 और 18 नवंबर 2021 को कुछ स्पष्टीकरण मांगे गए हैं। राजस्थान विधानसभा ने अगस्त 2019 में विधेयक पारित किया और इसमें पीड़ित की मौत के कारण मॉब लिंचिंग के मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों को आजीवन कारावास और 1-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने का प्रावधान है।
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मणिपुर विधानसभा ने दिसंबर 2018 में विधेयक पारित किया और भीड़ की हिंसा में किसी की मौत होती है तो इसमें शामिल लोगों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान करता है।
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