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Content Accessibility: ओटीटी प्लेटफॉर्म के फीचर्स पर सरकार का मसौदा जारी, भारतीय सांकेतिक भाषा होगी अनिवार्य
Wed, 08 Oct 2025 10:36 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 08 Oct 2025 10:36 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : फ्रीपिक
सरकार ने बुधवार को ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए एक नया मसौदा दिशानिर्देश जारी किया है। इसका मकसद सुनने और देखने में अक्षम लोगों की डिजिटल कंटेंट तक आसान पहुंच प्रदान करना है। इसके मुताबिक, नई प्राग्रामिंग में भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) में व्याख्या, कैप्शनिंग या ऑडियो विरण जैसा कम से कम एक एक्सेसिबिलिटी फीचर देना अनिवार्य होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने इन दिशानिर्देशों पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं, जिन्हें 22 अक्तूबर तक जमा किया जा सकता है। एक बार जब ये दिशानिर्देश अधिसूचित हो जाएंगे, तो ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म्स इन्हें दो चरणों में दो साल की अवधि में लागू करेंगे। पहले चरण में, दिशानिर्देशों के अधिसूचना के छह महीने बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म्स सभी नई सामग्री (कंटेंट) को क्लोज्ड या ओपन कैप्शनिंग, ऑडियो डिस्क्रिप्शन या भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) व्याख्या कम से कम एक एक्सेसिबिलिटी फीचर के साथ रिलीज करेंगे। दिशानिर्देशों में यह भी अनिवार्य किया गया है कि प्लेटफॉर्म्स एक्सेसिबिलिटी संकेतक दिखाएंगे और सुनिश्चित करें कि एक्सेसिबिलिटी फीचर्स उनके यूजर इंटरफेस में पूरी तरह से शामिल हों।
ये भी पढ़ें: 'सभी राज्य औषधि नियम का सख्त अनुपालन सुनिश्चित करें'; केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने लिखा पत्र
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दूसरे चरण में प्रकाशकों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे अपनी पूरी कंटेंट लाइब्रेरी को धीरे-धीरे एक्सेसिबल बनाएं, जिसमें दिशानिर्देशों के प्रकाशन के 12 महीनों के भीतर कम से कम 30 फीसदी, 18 महीनों के भीतर 60 फीसदी और 24 महीनों के भीतर पूरी तरह से एक्सेसिबिलिटी हासिल करनी होगी।
मसौदे में कुछ श्रेणियों को इन अनिवार्यताओं से मुक्त रखा गया है। इनमें लाइव और डिफर्ड-लाइव कंटेंट, केवल ऑडियो कंटेंट जैसे कि म्यूजिक और पॉडकास्ट और 10 मिनट या उससे कम के शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट शामिल हैं।
मंत्रालय अनुपालन की निगरानी के लिए एक निगरानी समिति बनाएगा, जिसका नेतृत्व एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे। यह समिति त्रैमासिक बैठक करेगी, प्रगति की समीक्षा करेगी, शिकायतों को संबोधित करेगी और ओटीटी पारिस्थितिकी तंत्र में लगातार अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी करेगी।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (एमआईबी) ने इन दिशानिर्देशों पर आम जनता और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे हैं, जिन्हें 22 अक्तूबर तक जमा किया जा सकता है। एक बार जब ये दिशानिर्देश अधिसूचित हो जाएंगे, तो ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म्स इन्हें दो चरणों में दो साल की अवधि में लागू करेंगे। पहले चरण में, दिशानिर्देशों के अधिसूचना के छह महीने बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म्स सभी नई सामग्री (कंटेंट) को क्लोज्ड या ओपन कैप्शनिंग, ऑडियो डिस्क्रिप्शन या भारतीय सांकेतिक भाषा (आईएसएल) व्याख्या कम से कम एक एक्सेसिबिलिटी फीचर के साथ रिलीज करेंगे। दिशानिर्देशों में यह भी अनिवार्य किया गया है कि प्लेटफॉर्म्स एक्सेसिबिलिटी संकेतक दिखाएंगे और सुनिश्चित करें कि एक्सेसिबिलिटी फीचर्स उनके यूजर इंटरफेस में पूरी तरह से शामिल हों।
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दूसरे चरण में प्रकाशकों को प्रोत्साहित किया गया है कि वे अपनी पूरी कंटेंट लाइब्रेरी को धीरे-धीरे एक्सेसिबल बनाएं, जिसमें दिशानिर्देशों के प्रकाशन के 12 महीनों के भीतर कम से कम 30 फीसदी, 18 महीनों के भीतर 60 फीसदी और 24 महीनों के भीतर पूरी तरह से एक्सेसिबिलिटी हासिल करनी होगी।
मसौदे में कुछ श्रेणियों को इन अनिवार्यताओं से मुक्त रखा गया है। इनमें लाइव और डिफर्ड-लाइव कंटेंट, केवल ऑडियो कंटेंट जैसे कि म्यूजिक और पॉडकास्ट और 10 मिनट या उससे कम के शॉर्ट-फॉर्म कंटेंट शामिल हैं।
मंत्रालय अनुपालन की निगरानी के लिए एक निगरानी समिति बनाएगा, जिसका नेतृत्व एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे। यह समिति त्रैमासिक बैठक करेगी, प्रगति की समीक्षा करेगी, शिकायतों को संबोधित करेगी और ओटीटी पारिस्थितिकी तंत्र में लगातार अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी करेगी।