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सीआईएसएफ का बड़ा फैसला: पूर्व सैन्य कर्मियों की भर्तियां खत्म करने की तैयारी, गृह मंत्रालय के आदेश का इंतजार
Sun, 20 Mar 2022 05:10 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Sun, 20 Mar 2022 05:10 PM IST
सार
सीआईएसएफ ने बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, सीआईएसएफ पूर्व सैन्य कर्मियों की भर्तियां खत्म करने की तैयारी में है। इसको लेकर बल गृह मंत्रालय के आदेश का इंतजार कर रहा है।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीआईएसएफ ने पूर्व सैन्य कर्मियों की भर्ती की प्रक्रिया को खत्म करने की मांग की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये प्रयोग सफल नहीं रहा। आधिकारिक सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, सीआईएसएफ ने केंद्रीय गृहमंत्रालय से इन अनुबंधों को समाप्त करने के लिए कहा है। सूत्रों ने कहा कि एमएचए से अंतिम निर्देश मिलने के बाद अनुबंधों को बंद कर दिया जाएगा।
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पिछले साल गृह मंत्रालय ने सीआईएसएफ को देश में अपनी 13 सुरक्षा इकाइयों में ' 'नॉन कोर' कामों जैसे अर्धसैनिक बलों की सहायता के लिए 2000 पूर्व सैन्यकर्मियों को नियुक्त करने को कहा था। इसमें थर्मल पावर प्लांट और कोल फील्ड भी शामिल थे। गृहमंत्रालय के आदेश पर यह नियुक्ति प्रायोगिक आधार पर की गई थी।
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एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये प्रयोग सफल नहीं रहा। सीआईएसएफ ने हाल ही में गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर अनुबंध को समाप्त करने की मांग की है। एक साल से भी कम समय में इसे रद्द करने की मांग करते हुए बल द्वारा कुछ कारणों का हवाला दिया गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व सैन्य कर्मियों को सीआईएसएफ अधिनियम 1968 या बल के नियमों के तहत कवर नहीं किया जाता है। उन्हें केवल अनुबंध के नियमों और शर्तों द्वारा शासित किया जाता है।
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उन्होंने कहा कि सुरक्षा एक गंभीर मुद्दा है और यदि किसी भी चूक के लिए जवाबदेही तय की जानी है, तो ऐसे कर्मियों को केवल अनुबंध के नियमों और शर्तों के अधीन नहीं किया जा सकता है जो सीआईएसएफ काउंटर के तहत यूनिट के समग्र सुरक्षा प्रोटोकॉल को प्रभावित कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि CISF संघ का एक सशस्त्र बल है और एक वर्दीधारी रेजिमेंट के लिए अनुशासन सबसे आवश्यक घटक है। पूर्व सैन्यकर्मियों के साथ यूनिट के भीतर अवज्ञा के मुद्दे हो सकते हैं जिससे सैनिकों के बीच टकराव हो सकता है इसलिए, प्रायोगिक भर्ती मौजूदा परिस्थितियों में काम नहीं करेगी।
गौरतलब है कि 1969 में सीआईएसएफ का गठन किया गया था। इसमें लगभग 1.64 लाख जवान हैं। ये बल नागरिक हवाई अड्डों, परमाणु और एयरोस्पेस सुविधाओं और निजी और सरकारी डोमेन में अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा का काम करता है।