सनातन संस्था के हिंसक खेल पर गृह मंत्रालय ने मूंदी आंखें
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धर्मांधता और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर की नृशंस हत्या के मामले में जनजागृति समिति के सदस्य की गिरफ्तारी ने उग्रवाद का नया चेहरा उजागर किया है। जनजागृति समिति सनातन संस्था से संबद्ध है। कम से कम दस साल से पर्दे के पीछे चल रही हिंसा के इस खतरनाक खेल पर गृह मंत्रालय ने आंखें मूंद रखी है। सनातन संस्था के सदस्यों के खिलाफ महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा जैसे राज्यों में हत्या और बम धमाके के दर्ज कई एफआईआर के बावजूद गृह मंत्रालय इसे खतरनाक नहीं मानता। गृह मंत्रालय ने संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग को खारिज कर रखा है।
2 दिसंबर 2015 को संसद के शीतकालीन सत्र में गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में उठे सवाल के जवाब में कहा था कि सनातन संस्था के किसी सदस्य का नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पनसारे और एमएम कलबुर्गी की हत्या से कोई संबंध नहीं है। लिहाजा सरकार का संस्था पर प्रतिबंध लगाने का कोई इरादा नहीं। जबकि उच्च सदन में दिए इस बयान से पहले पनसारे की हत्या के मामले में महाराष्ट्र एटीएस ने समीर गायकवाड़ नाम के सनातन संस्था के एक सदस्य की गिरफ्तारी भी हो चुकी थी।
सीबीआई के अनुसार संस्था पर कुछ नेताओं का है वरद हस्त
सीबीआई के अनुसार संस्था पर कुछ नेताओं का है वरद हस्त
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक दाभोलकर हत्या कांड की दो साल से चल रही जांच से एक बात साफ है कि सनानत संस्था पर महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत केंद्र के कुछ नेताओं का वरद हस्त है। सनातन संस्था के सदस्यों का धमाके और हत्या के मामले में कई बार नाम आया है। दाभोलकर की हत्या की जांच महाराष्ट्र पुलिस की कई संस्थानों ने की। लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। तब मामला सीबीआई के सुपुर्द किया गया था।