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सीएए के नियम बनाते वक्त राज्यों से परामर्श नहीं करेगी केंद्र सरकार, संशोधन के दौरान ले ली थी सलाह

Fri, 03 Jan 2020 10:09 PM IST
देव कश्यप जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली  Published by: देव कश्यप Updated Fri, 03 Jan 2020 10:09 PM IST
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Central government not consult states while making CAA rules, advice was taken during Amendment
गृह मंत्रालय (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर अब राज्यों से कोई बातचीत नहीं की जाएगी। अब सीएए की नियमावली तैयार की जा रही है। केंद्र सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून में बदलाव करते समय राज्यों की सलाह ले ली थी। नागरिकता, जनगणना और जनसंख्या से जुड़े मामलों को संविधान की केंद्रीय सूची में रखा गया है।

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इसका मतलब यह है कि इन मुद्दों पर कानून बनाने का अधिकार सिर्फ संसद को है। संविधान के अनुच्छेद 11 में भी स्पष्ट रूप से लिखा है कि नागरिकता को लेकर कानून बनाने का अधिकार केवल भारतीय संसद को है। संसद द्वारा पारित कानून को रोकने का अधिकार राज्यों की विधानसभाओं के पास नहीं है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों ने शुक्रवार को यह पुष्टि कर दी है कि सीएए को लेकर जो राज्य विरोध कर रहे हैं, उनके साथ कोई बातचीत नहीं होगी। इस मामले में केंद्र सरकार पहले ही अपना रूख स्पष्ट कर चुकी है।विपक्षी दलों की सरकार वाले राज्यों में जानबूझकर सीएए का विरोध किया जा रहा है। नागरिकता संशोधन कानून के पास होने से पहले सभी राज्यों से बातचीत कर ली गई थी। नियमानुसार, राज्यों से बातचीत करने के बाद ही नागरिकता (संशोधन) बिल संसद में पेश किया गया था।
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अब जबकि यह बिल संसद के दोनों सदनों में पास हो चुका है और उसे नागरिकता संशोधन कानून का दर्जा मिल चुका है तो ऐसे में कुछ राज्यों का विरोध समझ से परे है। उच्चपदस्थ सूत्रों ने अनौपचारिक बातचीत के दौरान कहा, संसद में बिल पास होने के बाद सीएए के नियम बनाए जा रहे हैं। अब कुछ राज्य इसका विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार किसी भी सूरत में अब राज्यों से न तो बातचीत करेगी और न ही उनकी सलाह लेगी। विपक्षी दलों का विरोध बहुत जल्द ठंडा पड़ जाएगा। लोगों को पता है कि राज्य सरकारों को केंद्रीय सूची में शामिल विषयों पर कानून बनाने का कोई अधिकार नहीं है।

राज्यों की विधानसभाएं सिर्फ राज्य सूची के विषयों पर ही कानून बनाने का अधिकार रखती हैं। संविधान के अनुच्छेद 245 और 246 में भी संसद के कानून बनाने की शक्ति का विस्तार से जिक्र किया गया है। इस बाबत आम जनता को बताया जाएगा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को देश की संसद ने पारित किया है। इसमें कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा किसी भी तरह की कोई रोक नहीं लगा सकती। अगर केरल या कोई अन्य राज्य नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ कोई प्रस्ताव लाते हैं तो वो असंवैधानिक है।


सुप्रीम कोर्ट भी नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ तभी फैसला सुनाएगा, जब वह इसको संविधान या मौलिक अधिकारों के खिलाफ पाएगा। इसके अलावा नागरिकता संशोधन कानून को खत्म करने या इसमें परिवर्तन करने का कोई विकल्प नहीं है। राज्यों को नागरिकता संशोधन अधिनियम को लागू करना ही होगा।

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