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लोकसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने घटाया यूपीए शासन का ‘विकास’, भड़की कांग्रेस

Thu, 29 Nov 2018 05:08 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 29 Nov 2018 05:08 AM IST
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Central Government decreased growth rate of UPA government before 2019 election

केंद्र सरकार ने बुधवार को कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के 10 साल के शासनकाल में देश की आर्थिक विकास दर का आंकड़ा घटा दिया। नए तरीके से की गई गणना के बाद जारी आंकड़ों में यूपीए शासनकाल की जीडीपी में लगभग हर साल करीब 1 फीसदी की कमी कर दी गई है।

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इस कवायद के लिए सरकार ने अर्थव्यवस्था के विकास की सही तस्वीर पेश करने का तर्क दिया है। लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों से ठीक पहले हुई इस कार्रवाई के चलते राजनीतिक घमासान मचने के आसार खड़े हो गए हैं।
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नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार और सांख्यिकी मंत्रालय सेक्रेटरी प्रवीण श्रीवास्तव ने केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) की तरफ से तैयार सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का बैक सीरीज डाटा जारी किया। उन्होंने कहा कि इसमें ज्यादा क्षेत्र शामिल किए गए हैं, ताकि जीडीपी की गणना ठीक से हो।
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सरकार ने 2004-05 के बदले जीडीपी का साल बदलकर 2011-2012 किया है। बता दें कि जनवरी, 2015 में सरकार ने राष्ट्रीय खातों के लिए 2004-05 के बजाय 2011-12 को आधार वर्ष घोषित किया था। इससे पहले 2010 में यूपीए सरकार ने आधार वर्ष को बदला था।

राजीव कुमार ने कहा कि इस आंकड़े में ताजा सर्वेक्षण और जनगणना के डाटा को शामिल किया गया है। इसके अलावा नई सीरीज के रिटेल और थोक महंगाई के आंकड़े भी जोड़े गए हैं। इसमें स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फंड कंपनी, सेबी, पीएफआरडीए और आईआरडीए को भी शामिल किया गया है। कुमार के मुताबिक, 2004-05 और 2011-12 के बेस ईयर बदलने पर एक कमेटी ने जीडीपी में 3 लाख करोड़ का अंतर बताया था। 

उन्होंने यह भी कहा कि इन आंकड़ों को पेश करने के पीछे सरकार की कोई गलत मंशा नहीं है। श्रीवास्तव ने भी कहा कि पुरानी और नई सीरीज के आंकड़ों की तुलना नहीं की जानी चाहिए। नई गणना पद्धति को शीर्ष सांख्यिकीविदों ने परखा है।

एनडीए शासन में सुधरी दिखी है विकास दर

श्रीवास्तव के मुताबिक, वर्ष 2011-12 सीरीज के हिसाब से वित्त वर्ष-2013 के लिए जीडीपी 5.5 फीसदी, वित्त वर्ष-2014 के लिए 6.4 फीसदी है। नई सीरीज के हिसाब से वित्त वर्ष-2015 के लिए जीडीपी 7.4 फीसदी, वित्त वर्ष 2016 के लिए 8.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2017 के लिए 7.1 फीसदी है। बता दें कि वित्त वर्ष 2015 से अब तक देश में वर्तमान एनडीए सरकार का शासन रहा है।

अगस्त वाली रिपोर्ट का असर तो नहीं
अगस्त 2018 में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग की तरफ से बैक सीरीज डाटा के आकलन के लिए एक समिति का गठन किया गया था। इस कमेटी की तरफ से जारी रिपोर्ट के ड्राफ्ट में वर्तमान सरकार के चार सालों के मुकाबले यूपीए के 2004-05 से 2013-14 तक के शासनकाल में अर्थव्यवस्था का विकास ज्यादा तेजी से होने की बात कही गई थी। 

रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2006-07 के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में जीडीपी दर 10.08 फीसदी पर पहुंच जाने की बात कही गई थी, जो वर्ष 1991 में देश में उदारीकरण की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा विकास दर थी। 

बता दें कि आजादी के बाद देश की सबसे ऊंची 10.2 फीसदी की विकास दर वित्त वर्ष 1988-89 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के शासनकाल में आंकी गई थी। हालांकि कमेटी की यह रिपोर्ट गणना में त्रुटि की बात कहकर खारिज कर दी गई थी। इसके बाद ही अब यह नया बैक सीरीज डाटा सामने आया है।

ऐसे बदल गए हैं यूपीए के आंकड़े

वित्त वर्ष    पुरानी दर             नई दर
2006        9.3 फीसदी         7.9 फीसदी
2007        9.3 फीसदी         8.1 फीसदी
2008        9.8 फीसदी         7.7 फीसदी
2009        3.9 फीसदी         3.1 फीसदी
2010        8.5 फीसदी         7.9 फीसदी
2011       10.3 फीसदी         8.5 फीसदी
2012        6.6 फीसदी         5.2 फीसदी
 

भड़के कांग्रेस नेता, चिदंबरम बोले- बंद कर देना चाहिए नीति आयोग

पूर्व वित्तमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने कहा कि नीति आयोग का संशोधित जीडीपी का आंकड़ा एक मजाक है। वह बेहद खराब मजाक है। असल में वह आंकड़े बुरे मजाक से भी वाहियात हैं। नीति आयोग ने यह डाटा किसी के मान- सम्मान को ठेस पहुंचाने के मकसद से किया है। यही समय है, जब इस बेकार संस्था को बंद कर दिया जाना चाहिए।


ऑपरेशन सफल, मरीज की मौत जैसा है ये मामला : सुरजेवाला

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा का यह कदम उस ‘क्लासिक’ मामले जैसा है, जिसमें ऑपरेशन सफल होने के बावजूद मरीज की मौत हो जाती है। ‘फर्जी’ बैक सीरीज डाटा मोदी सरकार के हटने की तारीख नहीं बदल सकता।

सुरजेवाला ने कहा कि जीडीपी बैक सीरीज डाटा के जरिए हारी हुई मोदी सरकार के भारत की पिछले 15 साल की सक्सेस स्टोरी को नीचा दिखाने का निराशाजनक प्रयास है। वह और उसकी कठपुतली नीति आयोग जनता को 2+2=8 होने का यकीन दिलाना चाहती है।

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