केंद्रीय सुरक्षा बलों में तबादलों को लेकर फंसा पेच, कैसे मिलेगी नई पोस्टिंग?
कोरोना संक्रमण की वजह से केंद्रीय सुरक्षा बलों के सामान्य तबादलों को लेकर पेच फंस गया है। लॉकडाउन के पहले चरण के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कहा गया था कि फिलहाल सभी तबादले रोक दिए जाएं। यदि किसी कर्मी का तबादला या प्रमोशन आदेश पहले जारी हो चुका है तो भी उन्हें नई पोस्टिंग न दी जाए।
बाद में केंद्र सरकार की ओर से दूसरा आदेश आया। इसमें खर्च घटाने की बात कही गई। चूंकि तबादला या प्रमोशन के चलते जो कोई भी नई पोस्टिंग पर जाता है तो उसे विभाग की ओर से यात्रा भत्ता भी देना पड़ता है। ऐसे में हजारों-लाखों कर्मियों के तबादले का मतलब है कि सरकारी खजाने पर भारी भरकम बोझ।
सीआईएसएफ ने 31 मार्च 2021 तक सामान्य तबादले रोक दिए हैं। सीआरपीएफ लॉकडाउन खत्म होने के बाद निर्णय लेगी। आईटीबीपी ने मार्च-अप्रैल में तबादले किए थे, लेकिन अभी तक नियुक्ति नहीं हो पाई। बीएसएफ ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन माना जा रहा है कि लॉकडाउन खत्म होने के बाद कर्मियों की आवाजाही शुरू होगी।
सीआरपीएफ की नीति अभी तय नहीं
देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के सूत्रों के अनुसार, अभी तबादलों को लेकर कोई नीति स्पष्ट नहीं है। लॉकडाउन 4.0 के खत्म होने के बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। केंद्र सरकार क्या नीति बनाती है, कोरोना संक्रमण को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की क्या गाइडलाइन रहेंगी, ये सब बातें ध्यान में रखकर ही अगला कदम उठाया जाएगा। अभी तो वे जवान और अधिकारी भी वापस नहीं आ सके हैं जो लॉकडाउन से पहले छुट्टी गए थे और वहीं फंस गए।
आईटीबीपी के एक अधिकारी के मुताबिक, हमने जूनियर एस्टेब्लिशमेंट बोर्ड 2020 के तहत 12 मार्च से 14 अप्रैल तक तबादले कर दिए हैं। इन कर्मियों को 30 अप्रैल तक कार्यमुक्त करना था, लेकिन लॉकडाउन की वजह से ऐसा संभव नहीं हो सका। अब इन कर्मियों को 30 जून तक नई ज्वाइनिंग करने के लिए कहा गया है। ट्रेन शुरू हो गई है और 25 मई से विमान सेवा भी शुरू हो रही है।
उन्होंने कहा कि ऐसे में कहा गया है कि आईटीबीपी कर्मियों को सबसे पहले ग्रीन जोन वाले इलाकों में ज्वाइन कराया जाए। वहां से कोई रिलीव होना है तो उसे भी आने दें। इसी तरह ऑरेंज और रेड जोन में भी ऐसी नीति बनाई जाए। यदि किसी कर्मी को अपने तबादले के खिलाफ कोई आवेदन देना है तो वह 15 जून तक दे सकता है। ध्यान रखें कि कोई भी तबादला फ्रंटियर और क्षेत्रीय हेडक्वार्टर नीति को प्रभावित न करे।
बीएसएफ और एसएसबी में बन रही है ये नीति
बीएसएफ में अभी तबादले नहीं हुए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बाबत अभी पॉलिसी बनाई जा रही है। चूंकि अभी तक बीएसएफ को अपना डीजी भी नहीं मिला है। ढाई माह से डीजी का पद खाली पड़ा है। आईटीबीपी के डीजी को बीएसएफ का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है।
लॉकडाउन खत्म होने के बाद यहां पर तबादले शुरू होंगे। इसी तरह एसएसबी में भी मार्च के दौरान तबादले हो चुके हैं, लेकिन किसी को रिलीव नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि अगले महीने में उन्हें नई पोस्टिंग के लिए रवाना किया जा सकता है।
लॉकडाउन की छुट्टियां कैसे एडजस्ट होंगी, कर्मियों की चिंता
बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एसएसबी, एनएसजी और असम राइफल में जवानों को अब यह चिंता सता रही है कि उनकी लॉकडाउन में खत्म हुई छुट्टियां कैसे एडजस्ट होंगी। क्या उन्हें कैजुअल लीव में जोड़ा जाएगा या कोई अन्य विशेष प्रावधान होगा। अगर कैजुअल लीव में जुड़ती हैं तो अधिकांश छुट्टियों का खत्म होना तय है।
लॉकडाउन के दौरान सभी केंद्रीय सुरक्षा बलों में उनकी कुल संख्या का करीब 20 फीसदी स्टाफ छुट्टी पर रहा है। सीआरपीएफ में 53 हजार, बीएसएफ में करीब 47 हजार, एसएसबी में 15 हजार, आईटीबीपी में भी 15 हजार से अधिक, सीआईएसएफ में 30 हजार और असम राइफल में लगभग 13 हजार जवान छुट्टी पर बताए गए हैं। एनएसजी में भी करीब 14 सौ जवान छुट्टी पर गए थे।