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सैन्य सुधारों में सोच का बदलाव बड़ी चुनौती: सीडीएस चौहान बोले- थिएटरीकरण में भारत अन्य देशों से 15 साल पीछे
Fri, 15 May 2026 05:57 AM IST
Jyoti Bhaskar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jyoti Bhaskar
Updated Fri, 15 May 2026 05:57 AM IST
सार
सैन्य सुधारों में सोच का बदलाव बड़ी चुनौती है। ये कहना है देश के सर्वोच्च सैन्य अफसर का। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कलम और कवच सम्मेलन के दौरान कहा कि थिएटरीकरण में भारत अन्य देशों से 15 साल पीछे है। जानिए उन्होंने और किन बातों को रेखांकित किया।
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सीडीएस अनिल चौहान (फाइल)
- फोटो : ANI
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विस्तार
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने सैन्य सुधारों की प्रक्रिया पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसमें सबसे बड़ी बाधा ढांचागत बदलाव नहीं, बल्कि पुरानी मानसिकता को बदलना है। कलम और कवच 2026 सम्मेलन में सीडीएस ने थिएटरीकरण, आत्मनिर्भरता और सेना की तैयारियों पर विस्तार से बात की।
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जनरल चौहान ने कहा, सेनाओं में थिएटर कमानों का गठन केवल संरचनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि इसके लिए मानसिकता में बदलाव लाना सबसे बड़ी चुनौती है। जब एक बार सोच बदल जाती है, तो ढांचागत सुधार अपने आप आसान हो जाते हैं। दुनियाभर के जिन देशों ने भी एकीकरण की कोशिश की है, उन्हें सेनाओं के बीच मतभेद, कार्यक्षेत्र बचाने की होड़ और संरक्षणवाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
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जनरल चौहान ने कहा, भारत इस समय थिएटरीकरण की प्रक्रिया में अन्य विकसित देशों से लगभग 10 से 15 साल पीछे है। इस अंतर को पाटने के लिए क्रमिक रूप से काम करने की बजाय एकसाथ कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जॉइंट ऑपरेशनल कंट्रोल सेंटर बनाने के लिए लगभग 500 अधिकारियों और 2,000 जवानों की जरूरत होगी, जिन्हें मौजूदा संसाधनों से ही व्यवस्थित किया जाएगा।
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सीडीएस ने कहा, भारत ने थिएटरीकरण के लिए आम सहमति का रास्ता चुना है। ढेरों सैन्य संस्थानों और अधिकारियों से बात की है, ताकि जागरूकता बढ़ाई जा सके। जब लोग यह समझ जाते हैं कि हमें भविष्य के मल्टी-डोमेन युद्धों के लिए तैयार रहना है, तो वे बदलाव को स्वीकार करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुधार देश के रक्षा इतिहास के सबसे परिवर्तनकारी बदलावों में से एक होगा।
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ऑपरेशन सिंदूर में चारों दिन भारत की रही बढ़त
सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने कहा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों के पास बेहतर परिस्थितिजन्य आकलन और युद्धक्षेत्र की स्पष्ट जानकारी थी। इसके चलते संघर्ष के सभी चार दिनों में भारत ने बढ़त बनाए रखी। भारतीय सेना को न सिर्फ अपनी तरफ की स्थिति की सटीक जानकारी थी, बल्कि सीमा पार की गतिविधियों पर भी पूरी नजर थी। हम जानते थे कि हमने क्या निशाना बनाया है और जमीन पर क्या हो रहा है। इसी वजह से हम संघर्ष के हर स्तर पर बढ़त बनाए रखने में सफल रहे।