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पूर्व निदेशकों की लड़ाई से सबक ले CBI ला रही है नया क्राइम मैनुअल, FBI सिस्टम को करेगी फॉलो

Wed, 11 Sep 2019 09:00 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 11 Sep 2019 09:00 PM IST
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CBI learned lesson from former CBI directors row, working on new CBI crime Manual
आलोक वर्मा बनाम राकेश अस्थाना - फोटो : अमर उजाला
सीबीआई (CBI) के पूर्व निदेशक आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी वर्चस्व की लड़ाई से केंद्रीय जांच एजेंसी को कई सबक मिले हैं। ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए क्राइम मैनुअल में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। पूर्व निदेशकों की लड़ाई से जांच एजेंसी के संगठन को जो नुकसान पहुंचा था, अब उसमें भी सुधार किया जाएगा। इस साल के अंत तक सीबीआई नए क्राइम मैनुअल पर काम करना शुरु कर देगी। वहीं साइबर क्राइम के मामलों से निपटने के लिए सीबीआई में एफबीआई (FBI) की तर्ज पर नया सिस्टम बनाया जाएगा।
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क्राइम मैनुअल को रखा ताक पर

पिछले साल सीबीआई के दो निदेशकों की आपसी कलह की वजह से जांच एजेंसी की छवि को बड़ा नुकसान पहुंचा था। इन अधिकारियों ने जांच एजेंसी को असहजता की स्थिति में ला खड़ा किया था। कई आदेश ऐसे भी जारी हुए थे जो किसी भी तरह से जांच एजेंसी के क्राइम मैनुअल से मेल नहीं खा रहे थे। अधिकारियों ने मनमर्जी चलाते हुए केस की जांच सौंपना, तबादला नीति, केस डायरी तैयार करना, छापेमारी, फोन इंटरसेप्ट प्रक्रिया, आर्थिक और साइबर अपराधों की जांच आदि मामलों में सीबीआई के क्राइम मैनुअल को फॉलो ही नहीं किया।

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यही वजह थी कि सीबीआई के एक अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जांच एजेंसी में चल रही अंदरुनी कलह का पर्दाफाश कर दिया था। उक्त अधिकारी ने सीबीआई में क्राइम मैनुअल का उल्लंघन कर लागू की जा रही फोन इंटरसेप्ट पॉलिसी के बारे में भी सनसनीखेज खुलासा किया था।

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2005 में बदला था क्राइम मैनुअल

बुधवार को सीबीआई प्रवक्ता नितिन ने बताया कि इससे पहले 2005 में क्राइम मैनुअल बदला गया था। अब उसमें कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जो सीबीआई मुख्यालय में अधिकारियों की एक टीम कर रही है। उम्मीद है कि इस साल के अंत तक सीबीआई को नया क्राइम मैनुअल मिल जाएगा। साथ ही, साइबर क्राइम को लेकर भी जांच एजेंसी विशेष योजना बना रही है। भारतीय राज्यों की पुलिस, इंटरपोल और सीबीआई के बीच साइबर क्राइम को लेकर बेहतर तालमेल बनाने और त्वरित गति से कार्रवाई संभव हो, इसके लिए भी एक नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है।

मोडस ऑपरेंडी को बेहतर बनाएंगे

एफबीआई या दूसरे देश, जो साइबर क्राइम में अच्छा काम कर रहे हैं, वहां की तकनीक और जांच प्रक्रिया से जुड़ी कई बातों को नए क्राइम मैनुअल में जगह मिल सकती है। दूसरे देशों से अंतरराष्ट्रीय अपराधियों की जानकारी के लिए सीबीआई के पास प्रार्थना पत्र आते रहते हैं और एजेंसी बिना देरी के उनकी मदद करती है। अगर उन्हें किसी राज्य से कोई सूचना लेनी है तो वह काम भी सीबीआई करती है। नए मैनुअल में विभिन्न पुलिस संगठनों की मोडस ऑपरेंडी, क्राइम के नए-नए तरीकों से निपटना और जांच एजेंसी में विशेषज्ञता, इन सबके बीच सामंजस्य को बढ़ाकर बेहतर काम किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में जारी किए थे ये आदेश...

1996 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिनमें पुलिस के अधिकारों के दुरुपयोग के अनेक मामले सामने आए थे। आरोप लगाया गया था कि पुलिसकर्मी राजनैतिक रूप से पक्षपातपूर्ण तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते हैं। 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्णय में केंद्र एवं राज्यों को पुलिस के कामकाज के लिए दिशानिर्देश तय करने, पुलिस के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने, तैनाती और तबादलों का फैसला लेने और पुलिस के दुर्व्यवहार की शिकायतें दर्ज करने के लिए प्राधिकरणों के गठन का आदेश दिया था।

न्यायालय ने यह भी अनिवार्य किया कि मुख्य पुलिस अधिकारियों को मनमाने तबादलों और तैनातियों का शिकार न होना पड़े, इसलिए उनकी सेवा की न्यूनतम अवधि तय की जाए।

नए मैनुअल में इन सब पर विचार होगा...

अपराध की जांच के लिए दक्षता और प्रशिक्षण, समय और संसाधनों और पर्याप्त फॉरेंसिक क्षमताओं तथा इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। विधि आयोग और दूसरे प्रशासनिक सुधार आयोग ने टिप्पणी की थी कि पुलिसकर्मियों की कमी और विभिन्न प्रकार के कार्यों के दबाव में राज्य पुलिस अधिकारी अक्सर इन जिम्मेदारियों की अवहेलना करते हैं। इसके अलावा पेशेवर जांच करने के लिए जरूरी प्रशिक्षण और विशेषज्ञता की भी उनमें कमी होती है। साथ ही, उनका कानूनी ज्ञान भी अपर्याप्त होता है (जैसे एडमिसिबिलिटी ऑफ एविडेंस जैसे पहलुओं पर) और एजेंसी का फॉरेंसिक और साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर भी अनुपयुक्त और आउटडेटेड होता है।



जिसके चलते पुलिस सबूत को बचाए रखने के लिए ताकत का इस्तेमाल और यातना देने जैसे काम करते हैं। साथ ही, अपराध की जांच को और ईमानदार एवं निष्पक्ष होने की जरूरत है। भारत में वह राजनैतिक या अप्रासंगिक तत्वों एवं विचारों से प्रभावित हो सकती है। इन पहलुओं के चलते, विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि राज्यों के पुलिस बलों की अपनी खुद की विशेषज्ञ जांच इकाइयां होनी चाहिए, जो अपराधों की जांच के लिए जिम्मेदार हों। सीबीआईं के नए मैनुअल में इन सभी बातों पर गौर किया जाएगा।

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