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AI हथियार: डिजिटल अरेस्ट गैंग से निपटने के लिए जल्द आएगा सीबीआई का 'अभय', नकली नोटिस से ठगी का खेल होगा खत्म
Sun, 19 Apr 2026 04:52 PM IST
Himanshu Singh Chandel
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Sun, 19 Apr 2026 04:52 PM IST
सार
सीबीआई डिजिटल अरेस्ट ठगी से निपटने के लिए 'अभय' नाम का एआई चैटबॉट लॉन्च करने जा रही है। यह लोगों को फर्जी नोटिस की सच्चाई जांचने में मदद करेगा। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत इसके लॉन्च कार्यक्रम में शामिल होंगे। देश में बढ़ते साइबर अपराधों के बीच यह कदम अहम माना जा रहा है, क्योंकि ठग लोगों को नकली नोटिस दिखाकर करोड़ों रुपये ठग रहे हैं।
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CBI
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश में बढ़ते डिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी के मामलों को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) एक नया एआई आधारित चैटबॉट अभय लॉन्च करने जा रहा है। इसका मकसद लोगों को फर्जी नोटिस और धोखाधड़ी से बचाना है। यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब देशभर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं और आम लोग ठगों का आसान निशाना बन रहे हैं।
यह चैटबॉट सोमवार को एक विशेष कार्यक्रम में लॉन्च होगा। इस मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मौजूद रहेंगे। अभय चैटबॉट की मदद से लोग यह जांच सकेंगे कि उन्हें मिला कोई नोटिस असली है या नकली। यह सुविधा खासतौर पर उन मामलों में मदद करेगी, जहां ठग खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं।
क्या है डिजिटल अरेस्ट ठगी का पूरा खेल?
डिजिटल अरेस्ट ठगी में अपराधी खुद को सीबीआई या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को फर्जी केस में फंसाने की धमकी देते हैं। वे नकली नोटिस दिखाकर पीड़ित को डराते हैं और उसे “डिजिटल गिरफ्तारी” के नाम पर पैसे देने के लिए मजबूर करते हैं। कई मामलों में लोगों से करोड़ों रुपये तक ठगे गए हैं।
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अभय चैटबॉट कैसे करेगा मदद?
सीबीआई का यह चैटबॉट लोगों को नोटिस की सच्चाई जांचने की सुविधा देगा। कोई भी व्यक्ति अपने पास आए नोटिस की जानकारी इसमें डालकर तुरंत जान सकेगा कि वह असली है या फर्जी। इससे लोगों को ठगी से बचने में मदद मिलेगी और अपराधियों का खेल कमजोर होगा।
साइबर अपराध कितना बड़ा खतरा बन चुका?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि साइबर अपराधियों ने अलग-अलग ठगी के मामलों में करीब 54 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। अदालत ने इसे “डकैती” जैसा गंभीर अपराध बताया है। इससे साफ है कि साइबर ठगी अब देश के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है।
लॉन्च कार्यक्रम में और क्या होगा?
यह चैटबॉट 22वें डी पी कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान लॉन्च किया जाएगा। इस कार्यक्रम में साइबर अपराध और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही उत्कृष्ट सेवा के लिए 24 अधिकारियों को सम्मानित भी किया जाएगा। डी.पी. कोहली CBI के पहले निदेशक थे और उन्होंने 1963 में इस संस्था की नींव रखी थी। उनकी याद में हर साल यह लेक्चर आयोजित किया जाता है, जिसमें कानून और जांच से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होती है।
अन्य वीडियो-
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यह चैटबॉट सोमवार को एक विशेष कार्यक्रम में लॉन्च होगा। इस मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत मौजूद रहेंगे। अभय चैटबॉट की मदद से लोग यह जांच सकेंगे कि उन्हें मिला कोई नोटिस असली है या नकली। यह सुविधा खासतौर पर उन मामलों में मदद करेगी, जहां ठग खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं।
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क्या है डिजिटल अरेस्ट ठगी का पूरा खेल?
डिजिटल अरेस्ट ठगी में अपराधी खुद को सीबीआई या पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को फर्जी केस में फंसाने की धमकी देते हैं। वे नकली नोटिस दिखाकर पीड़ित को डराते हैं और उसे “डिजिटल गिरफ्तारी” के नाम पर पैसे देने के लिए मजबूर करते हैं। कई मामलों में लोगों से करोड़ों रुपये तक ठगे गए हैं।
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अभय चैटबॉट कैसे करेगा मदद?
सीबीआई का यह चैटबॉट लोगों को नोटिस की सच्चाई जांचने की सुविधा देगा। कोई भी व्यक्ति अपने पास आए नोटिस की जानकारी इसमें डालकर तुरंत जान सकेगा कि वह असली है या फर्जी। इससे लोगों को ठगी से बचने में मदद मिलेगी और अपराधियों का खेल कमजोर होगा।
साइबर अपराध कितना बड़ा खतरा बन चुका?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि साइबर अपराधियों ने अलग-अलग ठगी के मामलों में करीब 54 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। अदालत ने इसे “डकैती” जैसा गंभीर अपराध बताया है। इससे साफ है कि साइबर ठगी अब देश के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है।
लॉन्च कार्यक्रम में और क्या होगा?
यह चैटबॉट 22वें डी पी कोहली मेमोरियल लेक्चर के दौरान लॉन्च किया जाएगा। इस कार्यक्रम में साइबर अपराध और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। साथ ही उत्कृष्ट सेवा के लिए 24 अधिकारियों को सम्मानित भी किया जाएगा। डी.पी. कोहली CBI के पहले निदेशक थे और उन्होंने 1963 में इस संस्था की नींव रखी थी। उनकी याद में हर साल यह लेक्चर आयोजित किया जाता है, जिसमें कानून और जांच से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा होती है।
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