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Cash For Query: कभी महुआ मोइत्रा के दोस्त थे जय अनंत देहादराई, अब क्यों हैं उनके खिलाफ, जानें पूरी कहानी
Wed, 25 Oct 2023 04:14 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Wed, 25 Oct 2023 04:14 PM IST
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महुआ मोइत्रा और जय अनंत देहादराई
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा इन दिनों चर्चा में हैं। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने महुआ पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने का आरोप लगाया है। निशिकांत का दावा है कि महुआ मोइत्रा के खिलाफ आरोपों की जानकारी उन्हें सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहादराई ने दी थी। हालांकि, महुआ मोइत्रा ने इन आरोपों को आधारहीन और मानहानिकारक बताया और भाजपा सांसद और देहादराई के खिलाफ मानहानि का मामला दायर कर दिया।इस मामले में जिन किरदारों की चर्चा हो रही है उनमें जय अनंत देहादराई भी हैं। जय कभी महुआ के दोस्त हुआ करते थे लेकिन अब दोनों एक दूसरे के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कौन हैं वकील जय अनंत देहादराई? वह अभी क्यों चर्चा में आए? महुआ से जय का क्या रिश्ता?
जय अनंत देहादराई
- फोटो :
SOCIAL MEDIA
कौन हैं जय अनंत देहादराई?
जय अनंत देहादराई पेशे से वकील हैं। उनकी विशेषज्ञता आपराधिक कानून में है। उन्होंने लॉ चैंबर्स ऑफ जय अनंत देहादराई नाम की संस्था की स्थापना की थी। जय के लिंक्डइन के अनुसार, उन्होंने आपराधिक और वाणिज्यिक कानूनों से जुड़े कई मामलों पर काम किया है और दिव्यांगजन कानून और पर्यावरण के क्षेत्रों में अहम योगदान दिया है।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय और विभिन्न अन्य न्यायालयों, न्यायाधिकरणों और अपीलीय निकायों के समक्ष केंद्र और राज्य सरकारों, मंत्रालयों और विभागों के अलावा व्यावसायिक घरानों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बैंकों, पीएसयू सहित सैकड़ों भारतीय और विदेशी मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व किया है।
जय को कानूनी क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव है। अपने कानूनी विशेषज्ञता के अलावा उन्हें प्रकाशन में भी काफी रुचि है। वह ऑल इंडिया रिपोर्टर (एआईआर) लॉ पब्लिशर्स द्वारा 2014 में प्रकाशित पुस्तक 'एक्वेबिलिस: फेयरनेस, इक्विटी एंड जस्टिस" के लेखक हैं।
जय अनंत देहादराई पेशे से वकील हैं। उनकी विशेषज्ञता आपराधिक कानून में है। उन्होंने लॉ चैंबर्स ऑफ जय अनंत देहादराई नाम की संस्था की स्थापना की थी। जय के लिंक्डइन के अनुसार, उन्होंने आपराधिक और वाणिज्यिक कानूनों से जुड़े कई मामलों पर काम किया है और दिव्यांगजन कानून और पर्यावरण के क्षेत्रों में अहम योगदान दिया है।
उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय, दिल्ली उच्च न्यायालय और विभिन्न अन्य न्यायालयों, न्यायाधिकरणों और अपीलीय निकायों के समक्ष केंद्र और राज्य सरकारों, मंत्रालयों और विभागों के अलावा व्यावसायिक घरानों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों, बैंकों, पीएसयू सहित सैकड़ों भारतीय और विदेशी मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व किया है।
जय को कानूनी क्षेत्र में 12 वर्षों का अनुभव है। अपने कानूनी विशेषज्ञता के अलावा उन्हें प्रकाशन में भी काफी रुचि है। वह ऑल इंडिया रिपोर्टर (एआईआर) लॉ पब्लिशर्स द्वारा 2014 में प्रकाशित पुस्तक 'एक्वेबिलिस: फेयरनेस, इक्विटी एंड जस्टिस" के लेखक हैं।
जय अनंत देहादराई
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SOCIAL MEDIA
ऐसा रहा है सफर
जय ने 2011 में आईएलएस लॉ कॉलेज, (पुणे विश्वविद्यालय) से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका का रुख और 2013 में पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के लॉ स्कूल से एलएलएम की डिग्री हासिल की।
2014-2015 के दौरान उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के विधि लिपिक के रूप में काम किया। इसके बाद 2015-2017 में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आत्माराम एनएस नाडकर्णी के कक्ष में काम किया। 2016-2019 जय ने ने पहली बड़ी जिम्मेदारी संभाली जब उन्हें गोवा के लिए स्थायी वकील बनाया गया। जय ने 2016-2020 तक गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीएसपीसीबी) के स्थायी वकील के तौर पर काम किया।
2019 से जय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष संघ के मामलों के लिए केंद्र सरकार के वकील के रूप में काम कर रहे हैं। 2022 में वह बेनेट यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून पर विजिटिंग फैकल्टी बने थे।
जय ने 2011 में आईएलएस लॉ कॉलेज, (पुणे विश्वविद्यालय) से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका का रुख और 2013 में पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के लॉ स्कूल से एलएलएम की डिग्री हासिल की।
2014-2015 के दौरान उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के विधि लिपिक के रूप में काम किया। इसके बाद 2015-2017 में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल आत्माराम एनएस नाडकर्णी के कक्ष में काम किया। 2016-2019 जय ने ने पहली बड़ी जिम्मेदारी संभाली जब उन्हें गोवा के लिए स्थायी वकील बनाया गया। जय ने 2016-2020 तक गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जीएसपीसीबी) के स्थायी वकील के तौर पर काम किया।
2019 से जय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष संघ के मामलों के लिए केंद्र सरकार के वकील के रूप में काम कर रहे हैं। 2022 में वह बेनेट यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक कानून पर विजिटिंग फैकल्टी बने थे।
गौतम अदाणी और महुआ मोइत्रा
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जय अनंत देहादराई अभी क्यों चर्चा में आए?
दरअसल, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पैसे लेकर संसद में अदाणी समूह से संबंधित सवाल पूछे। दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से पैसे लिए थे। भाजपा सांसद ने इसके खिलाफ लोकसभा स्पीकर से शिकायत कर जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया था कि ये सबूत वकील जय अनंत देहादराई द्वारा प्रदान किए गए थे।
लोकसभा स्पीकर को लिखे अपने पत्र में दुबे ने कहा कि उन्हें वकील जय अनंत का एक पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने मोइत्रा और जाने-माने बिजनेस टाइकून दर्शन हीरानंदानी के बीच सवाल पूछने के लिए रिश्वत के आदान-प्रदान के सबूत साझा किए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जय ने एक विस्तृत शोध किया है जिसके आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि हाल ही में, मोइत्रा ने संसद में उनके द्वारा पूछे गए कुल 61 में से लगभग 50 प्रश्न दर्शन हीरानंदानी और उनकी कंपनी के व्यावसायिक हितों को बचाने के लिए थे। हालांकि, महुआ मोइत्रा ने जय अनंत का जिक्र करते हुए कहा कि आरोप झूठ पर आधारित थे।
दरअसल, भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया था कि टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने पैसे लेकर संसद में अदाणी समूह से संबंधित सवाल पूछे। दुबे ने आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा ने बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी से पैसे लिए थे। भाजपा सांसद ने इसके खिलाफ लोकसभा स्पीकर से शिकायत कर जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया था कि ये सबूत वकील जय अनंत देहादराई द्वारा प्रदान किए गए थे।
लोकसभा स्पीकर को लिखे अपने पत्र में दुबे ने कहा कि उन्हें वकील जय अनंत का एक पत्र मिला है, जिसमें उन्होंने मोइत्रा और जाने-माने बिजनेस टाइकून दर्शन हीरानंदानी के बीच सवाल पूछने के लिए रिश्वत के आदान-प्रदान के सबूत साझा किए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि जय ने एक विस्तृत शोध किया है जिसके आधार पर उन्होंने निष्कर्ष निकाला है कि हाल ही में, मोइत्रा ने संसद में उनके द्वारा पूछे गए कुल 61 में से लगभग 50 प्रश्न दर्शन हीरानंदानी और उनकी कंपनी के व्यावसायिक हितों को बचाने के लिए थे। हालांकि, महुआ मोइत्रा ने जय अनंत का जिक्र करते हुए कहा कि आरोप झूठ पर आधारित थे।
महुआ मोइत्रा
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जय अनंत देहादराई का मोइत्रा से क्या नाता?
कई रिपोर्ट में दावा किया जाता है कि जय अनंत महुआ मोइत्रा के पूर्व मित्र हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई से के मुताबिक, पिछले छह महीनों में मोइत्रा ने जय के खिलाफ कई पुलिस शिकायतें दर्ज कराई हैं। महुआ ने इन शिकायतों में जय पर आपत्तिजनक संदेश भेजने, निजी समान की चोरी और मौखिक दुर्व्यवहार जैसे कई आरोप लगाए हैं।
कानूनी नोटिस के अनुसार, मोइत्रा और जय कभी करीबी दोस्त थे लेकिन उनके बीच अनबन हो गई। इस अनबन के कारण जय ने कथित तौर पर मोइत्रा को कई आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और भद्दे संदेश भेजे। इसके अलावा, उन पर उनके आधिकारिक आवास में अतिक्रमण करने और मोइत्रा के कुत्ते सहित निजी सामान चुराने का भी आरोप है।
कानूनी नोटिस में दावा किया गया है कि कुत्ते को अंततः वापस कर दिया गया। बार-बार जुर्म करने के कारण, मोइत्रा ने जय के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज करने का फैसला किया। नोटिस में दावा किया गया है कि जय ने पत्रकारों को मोइत्रा के बारे में झूठी खबरें प्रकाशित करने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन सबूतों की कमी के कारण असफल रहे। इसके बाद नोटिस में कहा गया है कि जय ने निशिकांत दुबे सहित भाजपा से संपर्क किया, जिन्होंने बिना कोई जांच किए इन आरोपों को प्रचारित किया।
नोटिस में आगे आरोप लगाया गया है कि दुबे और जय मोइत्रा की निजी तस्वीरें लीक करने में शामिल थे। इसमें मांग की गई है कि जय आरोपों को वापस लें और सार्वजनिक माफी जारी करें।
कई रिपोर्ट में दावा किया जाता है कि जय अनंत महुआ मोइत्रा के पूर्व मित्र हैं। समाचार एजेंसी पीटीआई से के मुताबिक, पिछले छह महीनों में मोइत्रा ने जय के खिलाफ कई पुलिस शिकायतें दर्ज कराई हैं। महुआ ने इन शिकायतों में जय पर आपत्तिजनक संदेश भेजने, निजी समान की चोरी और मौखिक दुर्व्यवहार जैसे कई आरोप लगाए हैं।
कानूनी नोटिस के अनुसार, मोइत्रा और जय कभी करीबी दोस्त थे लेकिन उनके बीच अनबन हो गई। इस अनबन के कारण जय ने कथित तौर पर मोइत्रा को कई आपत्तिजनक, दुर्भावनापूर्ण और भद्दे संदेश भेजे। इसके अलावा, उन पर उनके आधिकारिक आवास में अतिक्रमण करने और मोइत्रा के कुत्ते सहित निजी सामान चुराने का भी आरोप है।
कानूनी नोटिस में दावा किया गया है कि कुत्ते को अंततः वापस कर दिया गया। बार-बार जुर्म करने के कारण, मोइत्रा ने जय के खिलाफ पुलिस शिकायत दर्ज करने का फैसला किया। नोटिस में दावा किया गया है कि जय ने पत्रकारों को मोइत्रा के बारे में झूठी खबरें प्रकाशित करने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन सबूतों की कमी के कारण असफल रहे। इसके बाद नोटिस में कहा गया है कि जय ने निशिकांत दुबे सहित भाजपा से संपर्क किया, जिन्होंने बिना कोई जांच किए इन आरोपों को प्रचारित किया।
नोटिस में आगे आरोप लगाया गया है कि दुबे और जय मोइत्रा की निजी तस्वीरें लीक करने में शामिल थे। इसमें मांग की गई है कि जय आरोपों को वापस लें और सार्वजनिक माफी जारी करें।