{"_id":"5d18bf858ebc3e3cdf12fe59","slug":"cases-of-japanese-encephalitis-in-assam-health-minister-sent-a-team-there","type":"story","status":"publish","title_hn":"असम में सामने आए जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले, स्वास्थ्य मंत्री ने रवाना की टीम","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
असम में सामने आए जापानी इंसेफेलाइटिस के मामले, स्वास्थ्य मंत्री ने रवाना की टीम
Sun, 30 Jun 2019 07:26 PM IST
Gaurav Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Gaurav Pandey
Updated Sun, 30 Jun 2019 07:26 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
बिहार में चमकी बुखार के बाद असम में सामने आए जापानी इंसेफेलाइटिस के मामलों को लेकर रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के निर्देश पर केंद्रीय दल रवाना हो चुका है। असम में जापानी इंसेफेलाइटिस को लेकर समीक्षा करने और उससे जुड़े हर पहलू की जानकारी दिल्ली तक भेजने की जिम्मेदारी इन्हें दी गई है। केंद्रीय दल में स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव संजीव कुमार की निगरानी में कई वरिष्ठ डॉक्टरों की टीम रवाना हुई। मंत्रालय के अनुसार रविवार शाम को केंद्रीय दल असम पहुंच चुका है।
विज्ञापन
इसके अलावा असम के सभी 27 जिलों में जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए टीके, अति गंभीर 10 जिलों में 7 बालरोग आईसीयू, रोग की जांच के लिए जांच किट, जापानी इंसेफेलाइटिस से पीड़ित बच्चों के पुर्नवास के लिए डिब्रूगढ़ और गुवाहटी मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों को तैनात किया है। जानकारों का कहना है कि मच्छर जनित यह रोग आमतौर पर धान की खेती या जलभराव के चलते फैलता है। एक से दूसरे क्षेत्र तक इसे पहुंचाने में प्रवासी पक्षी और सूअर की भूमिका अहम होती है।
विज्ञापन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन का कहना है कि असम में जापानी इंसेफेलाइटिस को लेकर मामले सामने आने के बाद केंद्र से मदद भेजना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार को हर संभव मदद और रोग को लेकर तमाम अपडेट बनाए रखने के लिए उन्होंने निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इलाज के अलावा रोग नियंत्रण को लेकर भी मंत्रालय और असम राज्य के स्तर पर काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि रविवार तक असम में जापानी इंसेफेलाइटिस के चलते 6 लोगों से ज्यादा की मौत हो चुकी है। जबकि एक दर्जन से ज्यादा मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं।
विज्ञापन