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विझिंजम बंदरगाहः केरल हाई कोर्ट ने कहा- विरोध प्रदर्शनों पर रोक नहीं लगा सकते, आंदोलनकारियों को भी किया आगाह
Fri, 28 Oct 2022 06:07 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोच्चि
Published by: Amit Mandal
Updated Fri, 28 Oct 2022 06:07 PM IST
सार
अदालत ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वह उसे कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर न करें और यह भी निर्देश दिया कि उनके अंतरिम आदेशों को सख्ती से लागू किया जाए।
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केरल हाईकोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह विरोध प्रदर्शनों पर रोक नहीं लगा सकता है, लेकिन साथ ही किसी को भी विझिंजम बंदरगाह के खिलाफ आंदोलन करते समय कानून को अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए या कानून-व्यवस्था के लिए खतरा नहीं होना चाहिए। न्यायमूर्ति अनु शिवरामन ने यह टिप्पणी परियोजना के खिलाफ मछुआरों के लगातार विरोध में विझिंजम बंदरगाह निर्माण के लिए अडानी समूह की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
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अदालत ने कहा, हमें कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर न करें
अदालत ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि वह उसे कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर न करें और यह भी निर्देश दिया कि उनके अंतरिम आदेशों को सख्ती से लागू किया जाए। हाई कोर्ट के निर्देश और अवलोकन महत्वपूर्ण हैं क्योंकि स्थानीय मछुआरों ने तिरुवनंतपुरम के पास विझिंजम अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह परियोजना का विरोध करते हुए गुरुवार को एक मछली पकड़ने वाली नाव को आग लगाकर और पुलिस बैरिकेड्स को समुद्र में फेंक कर आंदोलन तेज कर दिया। आंदोलन अपने 100 वें दिन में प्रवेश कर गया है।
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याचिका पर सुनवाई के दौरान अदाणी समूह ने अदालत से कहा कि विरोध निर्माण कार्य में बाधा डाल रहा है और ऐसी संभावना है कि यह हिंसक हो सकता है। अदालत ने कहा कि निर्माण स्थल की ओर जाने वाले रास्ते में आने वाले अवरोधों को हटाया जाना चाहिए और विरोध प्रदर्शन से वहां की कानून व्यवस्था को खतरा नहीं होना चाहिए। पास के मुल्लूर में बहुउद्देश्यीय बंदरगाह के मुख्य द्वार के बाहर कुछ महीनों से बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
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वे अपनी मांगों के सात सूत्री चार्टर के लिए दबाव बना रहे हैं जिसमें निर्माण कार्य को रोकना और करोड़ों की परियोजना के संबंध में तटीय प्रभाव का अध्ययन करना शामिल है।
प्रदर्शनकारी आरोप लगाते रहे हैं कि ग्रोयन्स का अवैज्ञानिक निर्माण, आगामी विझिंजम बंदरगाह के हिस्से के रूप में कृत्रिम समुद्री दीवारें, बढ़ते तटीय क्षरण के कारणों में से एक थी। उच्च न्यायालय ने 19 अक्टूबर को यह स्पष्ट किया कि बंदरगाह के प्रवेश द्वार पर प्रदर्शनकारियों द्वारा बनाई गई बाधाओं को दूर करने के उसके अंतरिम आदेश को राज्य सरकार द्वारा लागू किया जाना चाहिए। यह निर्देश अदाणी समूह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।