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ऐ दिल.. की मुश्किलें हल कर खुद मुश्किल में फंसे फडणवीस
अमर उजाला ब्यूरो/ मुंबई
Updated Tue, 25 Oct 2016 05:18 AM IST
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देवेंद्र फड़णवीस
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फिल्म ए दिल है मुश्किल की मुश्किलें हल करने वाले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की मुश्किलें बढ़ गई है। उन पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने देशभक्ति की कीमत पांच करोड़ रूपए लगाई है। फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी ने 5 करोड़ में देशभक्ति बेचने का आरोप लगाते हुए फडणवीस पर हमला बोला है। वहीं, शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के नेताओं ने पर्दे के पीछे के घटनाक्रम को लेकर राज ठाकरे और मुयमंत्री को कटघरे में खड़ा किया है।
दरअसल, ए दिल.. फिल्म की मुश्किल के बड़े पर्दे पर प्रदर्शित होने का रास्ता साफ होने के बाद पर्दे के पीछे के घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरु हो गई है। कहा जा रहा है कि देशभक्ति की कीमत लगाने वाले मुख्यमंत्री और राज ठाकरे कौन होते हैं। क्या मुख्यमंत्री ने इस फिल्म का विवाद खत्म करने के लिए ब्रोकर की भूमिका निभाई है। भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भीनब्यंज्य किया है कि यह तो होना ही था। हालांकि फिल्म के प्रदर्शन को लेकर सत्ता के दरबार में हुए समझौते से राज्य की कानून-व्यवस्था का संकट टल गया लेकिन, इससे हमारे जवानो की शहादत का का अपमान हुआ।
मुखपत्र सामना की संपादकीय में शिवसेना ने यह भी कहा है कि पर्दे के पीछ बहुत कुछ हुआ है। वहीं, सूबे के पूर्व उपमुयमंत्री अजीत पवार ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इसमें कुछ आर्थिक डील हुई है। जिस तरह राज ठाकरे ने पहले फिल्म का विरोध किया और उसके बाद यू टर्न लिया उससे उन्हें पक्का यकीन है कि डील हुई है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने मुख्यमंत्री के घर हुई बैठक का व्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। निरूपम ने चेतावनी दी है कि यदि इसे सार्वजनिक नहीं किया गया तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। निरुपम ने कहा कि फिल्म प्रदर्शन को रोकने की धमकी देने वाले राज ठाकरे के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन्हें आवास पर बुलाकर समझौता करवाया जाता है। यह दुखद है।
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उड़ी हमले के बाद मनसे ने पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान को लेकर बनी फिल्म ए दिल है मुश्किल का विरोध शुरु किया था। दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज ठाकरे, फिल्म निर्माता करण जौहर और फिल्म प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मुकेश भट्ट को अपने घर पर बुलाकर समझौता कराया था। राज ठाकरे तीन शर्तो पर माने थे जिसमें से एक सैनिक कल्याण निधि में पांच करोड़ रूपए देने की शर्त शामिल थी।
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दरअसल, ए दिल.. फिल्म की मुश्किल के बड़े पर्दे पर प्रदर्शित होने का रास्ता साफ होने के बाद पर्दे के पीछे के घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चा शुरु हो गई है। कहा जा रहा है कि देशभक्ति की कीमत लगाने वाले मुख्यमंत्री और राज ठाकरे कौन होते हैं। क्या मुख्यमंत्री ने इस फिल्म का विवाद खत्म करने के लिए ब्रोकर की भूमिका निभाई है। भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने भीनब्यंज्य किया है कि यह तो होना ही था। हालांकि फिल्म के प्रदर्शन को लेकर सत्ता के दरबार में हुए समझौते से राज्य की कानून-व्यवस्था का संकट टल गया लेकिन, इससे हमारे जवानो की शहादत का का अपमान हुआ।
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मुखपत्र सामना की संपादकीय में शिवसेना ने यह भी कहा है कि पर्दे के पीछ बहुत कुछ हुआ है। वहीं, सूबे के पूर्व उपमुयमंत्री अजीत पवार ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि इसमें कुछ आर्थिक डील हुई है। जिस तरह राज ठाकरे ने पहले फिल्म का विरोध किया और उसके बाद यू टर्न लिया उससे उन्हें पक्का यकीन है कि डील हुई है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने मुख्यमंत्री के घर हुई बैठक का व्योरा सार्वजनिक करने की मांग की है। निरूपम ने चेतावनी दी है कि यदि इसे सार्वजनिक नहीं किया गया तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। निरुपम ने कहा कि फिल्म प्रदर्शन को रोकने की धमकी देने वाले राज ठाकरे के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाए उन्हें आवास पर बुलाकर समझौता करवाया जाता है। यह दुखद है।
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उड़ी हमले के बाद मनसे ने पाकिस्तानी कलाकार फवाद खान को लेकर बनी फिल्म ए दिल है मुश्किल का विरोध शुरु किया था। दो दिन पहले ही मुख्यमंत्री फडणवीस ने राज ठाकरे, फिल्म निर्माता करण जौहर और फिल्म प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मुकेश भट्ट को अपने घर पर बुलाकर समझौता कराया था। राज ठाकरे तीन शर्तो पर माने थे जिसमें से एक सैनिक कल्याण निधि में पांच करोड़ रूपए देने की शर्त शामिल थी।