गरीबों को राशन बांटने में अब तक हो रही सेंधमारी, उत्तर प्रदेश सबसे आगे
- 5,28,317 फेयर प्राइस शॉप देशभर में, चार लाख में पीओएस मशीन है उपलब्ध
- एक लाख करोड़ की सेंधमारी रोकी गई पिछले चार सालों में
- 941 शिकायतें मिली मंत्रालय को सभी राज्यों से
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गरीबों को राशन मुहैया कराने वाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में आधार व्यवस्था के लागू होने के बावजूद भी सेंधमारी और उल्लंघन की घटनाएं रुक नहीं रही हैं। हालांकि इनमें कमी जरूर आई है और सरकार लगातार इस पर निगरानी रख रही है। सरकार को 2018 में लगभग साढ़े नौ सौ शिकायतें मिली, जिनमें सर्वाधिक 369 शिकायतें उत्तर प्रदेश से हैं। वहीं, त्रिपुरा और केंद्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली, दमण एवं दीव में एक भी शिकायत नहीं आई है।
राज्यों में मिली इन शिकायतों की फिलहाल जांच चल रही है। उपभोक्ता एवं खाद्य आपूर्ति मंत्रालय के मुताबिक, यह पीडीएस केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त जिम्मेवारी है। इसके क्रियान्वयन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों पर है और जब विभागों को किसी व्यक्ति, संगठन या मीडिया के जरिए शिकायत मिलती है, तो उनकी जांच होती है। पीडीएस के नियमों में किसी भी तरह का उल्लंघन दंडात्मक है।
राज्यों की सूचना के अनुसार, मंत्रालय को कुल 941 शिकायतों की जानकारी मिली है। इनमें उत्तर प्रदेश से 369 , बिहार से 135, दिल्ली से 76, पश्चिम बंगाल से 43, हरियाणा से 35, राजस्थान से 38, झारखंड से 33 शिकायतें आई हैं। देशभर में कुल 5,28,317 फेयर प्राइस शॉप हैं और इनमें से चार लाख से ज्यादा में प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन लग चुकी है। मार्च, 2019 तक सभी दुकानों में पीओएस लगाने का लक्ष्य है।
20 करोड़ राशन कार्ड ही आधार से जुड़े
उपभोक्ता मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, देश में लगभग 23.24 करोड़ राशन कार्ड हैं। इनका डिजिटलाइजेशन हो चुका है, लेकिन आधार से करीब 85 फीसदी यानी लगभग 20 करोड़ राशन कार्ड ही जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि पिछले चार साल में लाखों फर्जी राशन कार्ड को पकड़ा गया है और एक लाख करोड़ की सेंध मारी रोकी गई है।
मौजूदा समय आ रही शिकायतों में सेंधमारी के अलावा लाभार्थी तक खाद्यान्न नहीं पहुंचने, पीडीएस की कार्यप्रणाली में अनियमितताओं और उल्लंघन की शिकायतें भी हैं। सरकार पीडीएस को पूरी तरह से भ्रष्टाचार से मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसमें सेंधमारी पर रोक ही नहीं, लाभार्थी को सिर्फ अच्छा खाद्यान्न मुहैया कराना और आपूर्ति को अनियमितता मुक्त करना शामिल है।
क्रियान्वयन समेत कई पहलुओं पर होती है निगरानी
मंत्रालय के मुताबिक, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा पीडीएस के क्रियान्वयन समेत अन्य पहलुओं पर निगरानी की जाती है। शिकायत मिलने पर राज्यों के विभाग छापेमारी करते हैं और उल्लंघन होने की सूरत में जुर्माना लगाया जाता है। गौरतलब है कि पीडीएस नियंत्रण आदेश, 2015 में सजा का प्रावधान शामिल कर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दंडात्मक कार्रवाई करने का अधिकार प्रदान किया गया था।