एनजीटी का आदेश, एडीए की सूची पर आपत्ति दाखिल कर सकते हैं बिल्डर
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में यमुना किनारे डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण मामले पर सुनवाई की। पीठ ने फिर से दोहराया कि आगरा विकास प्राधिकरण के जरिए दिए गए आदेश का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों की जो संशोधित सूची दी गई है, यदि मामले के पक्षकार उस पर अपनी आपत्ति या पक्ष रखना चाहते हैं, तो वे अगली सुनवाई में रख सकते हैं। ट्रिब्यूनल ने अगली सुनवाई के लिए 27 जुलाई तय की है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को अनुश्रवण समिति के सदस्य डीके जोशी की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। मंगलवार को सुनवाई के दौरान आगरा विकास प्राधिकरण ने एनजीटी के सामने डूब क्षेत्र में निर्माण करने वाले बी कैटेगरी के कुल 58 परियोजना प्रस्तावकों की संशोधित सूची भी दाखिल की।
फैसला देने से पहले बिल्डरों को भी अपना पक्ष रखने की छूट दी
ट्रिब्यूनल ने इन्हें भी अगली सुनवाई तक अपना पक्ष रखने का विकल्प दिया है। सुनवाई के दौरान डीके जोशी की ओर से पेश अधिवक्ता ने इन बिल्डरों में से अधिकांश पर परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी न लेने का भी आरोप लगाया। पिछली सुनवाई में एडीए भी कह चुका है कि इन बिल्डरों के जरिए ही आदेश का उल्लंघन किया गया। बता दें कि आगरा में यमुना किनारे अवैध निर्माण का यह मामला काफी वर्षों से एनजीटी में लंबित पड़ा हुआ है।
हालांकि अब यह निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के नक्शे के मुताबिक डूब क्षेत्र में करीब 19 बिल्डरों ने निर्माण कार्य किया है, लेकिन बाद में प्राधिकरण ने सूची में संशोधन किया। साथ ही फैसला देने से पहले बिल्डरों को भी अपना पक्ष रखने की छूट दी।
ये हैं एडीए के मुताबिक आदेश का उल्लंघन करने वाले 19 बिल्डर्स के नाम
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