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ब्रिक्स से उम्मीदें: कागजी वादों से बाहर आए कारोबारी हकीकत, राहत को जमीन पर उतारने की चुनौती

Thu, 10 Sep 2026 05:05 AM IST
Ashutosh Bhatia आशुतोष भाटिया
Updated Thu, 10 Sep 2026 05:05 AM IST
सार

ब्रिक्स संगठन दुनिया के सबसे प्रभावशाली संगठनों में से एक है। जल्द ही इसकी शिखर बैठक नई दिल्ली में आयोजित होगी। हालांकि ब्रिक्स के सामने कई चुनौतियां भी हैं, जिनमें सबसे प्रमुख छोटे निर्यातकों के बुनियादी सवालों का हल नहीं कर पाना है।

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brics summit 2026 Expectations Moving beyond paper promises to business realities the challenge
ब्रिक्स समिट (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

विस्तार

ब्रिक्स देशों के नेता जब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर चर्चा करेंगे, तब भारत के किसी छोटे निर्यातक का सबसे बुनियादी सवाल होगा- क्या विदेश से मिला ऑर्डर पूरा करने के लिए बैंक से कर्ज आसानी से मिलेगा। यही सवाल इस बार भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की असल कसौटी है। भारत ने एजेंडे में एमएसएमई, व्यापार वित्त, सीमा पार भुगतान और स्टार्टअप्स जैसे व्यावहारिक विषयों को तरजीह दी है। चुनौती यह है कि घोषणाएं कागजों से निकलकर भारतीय कारोबारियों तक कितनी जल्दी पहुंचती हैं।
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छोटे निर्यातकों को कर्ज देने से होगा गेम चेंज
अगस्त में हुई ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक में छोटे उद्यमों के लिए जयपुर-सहमति जैसे प्रस्ताव सामने आए। छोटे निर्यातकों की मुख्य समस्या सिर्फ बाजार तलाशना नहीं, बल्कि कच्चा माल खरीदने और भुगतान आने तक कारोबार चलाने के लिए पूंजी की दरकार है। यदि ब्रिक्स देश पारंपरिक गिरवी के बजाय छोटे कारोबारियों के बैंक खातों के लेन-देन और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर कर्ज देने की व्यवस्था बनाएं, तो यह निर्यात जगत के लिए गेमचेंजर साबित होगा। असली सफलता यह होगी कि अगले 6 से 12 महीनों में बैंक कितने नए निर्यातकों को कम ब्याज पर कर्ज देते हैं।
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यूपीआई से आगे की राह
सीमा पार भुगतान का मुद्दा इस दिशा में दूसरा बड़ा आयाम है। सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी और तेज भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने से भारत अपनी यूपीआई सफलता को अंतरराष्ट्रीय फलक पर ले जा सकता है। इससे भारतीय व्यापारी ब्राजील या रूस के ग्राहक से सीधे भुगतान ले सकेंगे। हालांकि, मुद्रा विनिमय (करेंसी स्वैप), नियामकीय अनुपालन और डेटा सुरक्षा जैसे सवालों का समाधान तलाशे बिना राह आसान नहीं होगी। सफलता का पैमाना लेन-देन की लागत और पारदर्शिता होगी।
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चीन के साये में आपूर्ति श्रंखला का पेच
भारत दवाइयों और इलेक्ट्रॉनिक्स में विनिर्माण क्षमता बढ़ाना चाहता है, जिसके लिए सुरक्षित आपूर्ति शृंखलाएं जरूरी हैं, लेकिन विरोधाभास यह है कि जिस समूह में आपूर्ति शृंखलाओं को विविधता देने की बात हो रही है, उसी का सदस्य चीन दुनिया की बड़ी विनिर्माण महाशक्ति है। यह परखना अहम होगा कि यह सहयोग चीन पर निर्भरता घटाता है या इसका नया मार्ग तैयार करता है।

असली रिपोर्ट कार्ड
ब्रिक्स का एजेंडा कृषि और स्टार्टअप्स तक फैला है। लेकिन यह तभी सार्थक होगा जब किसान को उपज के बेहतर दाम और स्टार्टअप्स को अन्य ब्रिक्स देशों में नया बाजार मिले।


तारिह रहमान के आने पर सस्पेंस
बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे या नहीं, इस पर अभी भी संशय बरकरार है। भारत की तरफ से निमंत्रण मिलने के बावजूद ढाका ने अभी तक ये साफ नहीं किया है कि तारिक रहमान भारत आएंगे या नहीं। 
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