{"_id":"5a61e8444f1c1b8c268b5431","slug":"boost-for-nsg-membership-as-india-enters-in-australia-group-despite-chinas-intervention","type":"story","status":"publish","title_hn":"चीन के दखल के बावजूद भी भारत को मिली बड़ी सफलता, जल्द मिलेगी NSG की सदस्यता ","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
चीन के दखल के बावजूद भी भारत को मिली बड़ी सफलता, जल्द मिलेगी NSG की सदस्यता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 19 Jan 2018 06:36 PM IST
विज्ञापन
एनएसजी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) क्लब में शामिल होने के लिए अरसे से जीतोड़ कोशिश कर रहे भारत को अपने इस अभियान में बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस कड़ी में भारत को इससे जुड़े निर्यात नियंत्रक संगठन ऑस्ट्रेलिया ग्रुप की सदस्यता हासिल हो गया है।
विज्ञापन
इससे पहले भारत पहले ही इससे जुड़े दो अन्य संगठनों वासेनार अरेंजमेंट और मिसाइल टेक्नॉलोजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर) क्लब में पहले ही शामिल हो चुका है। ऐसे में एनएसजी में भारत के प्रवेश पर वीटो लगाने वाले चीन पर जहां कूटनीतिक दबाव बढ़ेगा, वहीं भारत को एनएसजी सदस्य देशों से सीधा संवाद स्थापित करने का बड़ा कूटनीतिक मौका हासिल होगा।
विज्ञापन
गौरतलब है कि चीन ने भारत द्वारा परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर न करने को मुख्य मुद्दा बनाते हुए उसके एनएसजी में प्रवेश की राह में अड़ंगा डाल दिया था। कूटनीतिक चाल चलते हुए चीन ने यह भी तर्क दिया था कि अगर बगैर एनपीटी भारत को एनएसजी की सदस्यता दी जा सकती है तो इस क्लब में पाकिस्तान को भी शामिल करना चाहिए। हालांकि अब बदली परिस्थितियों में भारत बिना एनपीटी पर हस्ताक्षर किए एनएसजी सदस्यों से सीधा संवाद कर पाएगा।
विज्ञापन
दरअसल, एनएसजी की सदस्यता के सवाल पर भारत को चीन को छोड़ कर अन्य सभी ताकतवर सदस्य देशों का साथ हासिल है। अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस जैसे देशों की सहमति के बाद भारत को इसके निर्यात नियंत्रक संगठनों में शामिल किया गया। चूंकि चीन इन संगठनों का सदस्य नहीं है, ऐसे में इन संगठनों में शामिल होने के लिए भारत को किसी तरह के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा।
कूटनीतिक विशेषज्ञ जी पार्थसारथी केमुताबिक ऑस्ट्रेलिया ग्रुप में शामिल होना भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है। जाहिर तौर पर चूंकि एनएसजी के अतिरिक्त इन संगठनों के सदस्य देश भारत के साथ खड़े हो गए हैं। ऐसे में निश्चित रूप से चीन पर कूटनीतिक दबाव होगा।