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High Court: 'स्थानांतरण याचिका में महिलाओं की समस्याओं को दें प्राथमिकता', बॉम्बे हाईकोर्ट ने की टिप्पणी
Mon, 22 Aug 2022 08:12 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Mon, 22 Aug 2022 08:12 PM IST
सार
दंपति एक वैवाहिक विवाद में उलझे हुए हैं और दोनों ने इस संबंध में पुणे और ठाणे की स्थानीय अदालतों में दो अलग-अलग याचिका दायर की थीं। जानकारी के मुताबिक, पति पुणे में रहता है उसने ठाणे अदालत में दायर आवेदन को पुणे अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी, जबकि मुंबई में रहने वाली महिला ने पुणे की अदालत में दायर मामले को ठाणे में स्थानांतरित करने की मांग की थी।
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कोर्ट ने सुनाया फैसला
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानून महिलाओं को समाज के कमजोर वर्ग से संबंधित एक वर्ग के रूप में मानता है,जिन्हें अधिक सुरक्षा की आवश्यकता होती है इसलिए स्थानांतरण याचिकाओं में उनकी समस्याओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी वैवाहिक विवाद के एक मामले की सुनवाई करते हुए की। इस मामले में महिला के अनुरोध पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुणे से एक वैवाहिक विवाद मामले को ठाणे स्थानांतरित करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति एस एम मोदक की पीठ ने एक महिला और उससे अलग हो चुके पति की दो याचिकाओं पर सुनवाई करते 17 अगस्त को आदेश पारित किया था, जिसकी प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।
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गौरतलब है कि दंपति एक वैवाहिक विवाद में उलझे हुए हैं और दोनों ने इस संबंध में पुणे और ठाणे की स्थानीय अदालतों में दो अलग-अलग याचिका दायर की थीं। जानकारी के मुताबिक, पति पुणे में रहता है उसने ठाणे अदालत में दायर आवेदन को पुणे अदालत में स्थानांतरित करने की मांग की थी, जबकि मुंबई में रहने वाली महिला ने पुणे की अदालत में दायर मामले को ठाणे में स्थानांतरित करने की मांग की थी।
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पति ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके पास उनके दो नाबालिग बच्चों की कस्टडी है, जिनकी देखभाल उसकी मां और बहन कर रहे हैं और इसलिए वह सुनवाई के लिए ठाणे की यात्रा नहीं कर पाएगा। वहीं, पत्नी ने अपनी याचिका में कहा है कि वह बेरोजगार है और पुणे की यात्रा नहीं कर पाएगी।
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दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति मोदक ने कहा कि बच्चों की देखभाल करने के लिए पति के पास उसका परिवार है। उसने ठाणे की यात्रा नहीं करने के लिए कोई अन्य कारण नहीं बताया है। वहीं, तथ्य यह है कि दूसरी आवेदक (पत्नी) एक महिला है, उसकी असुविधा को अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि कानून महिला को समाज के कमजोर वर्ग से संबंधित वर्ग के रूप में मानता है और उसे अधिक सुरक्षा की आवश्यकता है।
उन्होंने आगे कहा कि महिला ने यह शिकायत भी की थी कि अपने पति के साथ रहने के दौरान उसके साथ बुरा व्यवहार किया जाता था और वह फिर से उसी शहर में जाने को लेकर आशंकित थी।