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Bihar BJP : बिहार में अब कानून व्यवस्था को हथियार बनाएगी भाजपा, नड्डा और शाह ने कोर ग्रुप के साथ किया मंथन

Wed, 17 Aug 2022 04:52 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Wed, 17 Aug 2022 04:52 AM IST
सार

पार्टी सूत्रों ने बताया कि बैठक में अगड़ा, अति पिछड़ा और दलित मतदाताओं को साधने की रणनीति बनी है। इस रणनीति के तहत विधानसभा और विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष का पद इन्हीं तीन वर्गों में बांटा जाएगा। इसकी घोषणा इसी हफ्ते कर दी जाएगी।

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BJP raise law and order issue in Bihar decided in meeting of JP Nadda Amit Shah with Bihar core group
जेपी नड्डा और अमित शाह के साथ बिहार भाजपा कोर ग्रुप की बैठक। - फोटो : Twitter@BJP4Bihar

विस्तार

बिहार में जदयू की अलग राह से लगे सियासी झटके की भरपाई के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में अगड़ा, अति पिछड़ा और दलित का नया जातीय समीकरण तैयार करेगी। लोकसभा चुनाव तक पार्टी कानून व्यवस्था से जुड़ी एक-एक घटना पर लगातार आंदोलन करेगी। मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह की राज्य के कोर ग्रुप के नेताओं के साथ चली तीन घंटे की मैराथन बैठक में विशेष तौर पर लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार की गई। भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बिहार से 40 में से 35 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है।

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बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में 35 से अधिक सीटें जीतकर कीर्तिमान स्थापित करेगी। बिहार में 40 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से वर्तमान में 17 भाजपा के पास हैं जबकि जदयू के पास 16 सीटें हैं। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी के पास छह और कांग्रेस के पास एक सीट है।
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पार्टी सूत्रों ने बताया कि बैठक में अगड़ा, अति पिछड़ा और दलित मतदाताओं को साधने की रणनीति बनी है। इस रणनीति के तहत विधानसभा और विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेश अध्यक्ष का पद इन्हीं तीन वर्गों में बांटा जाएगा। इसकी घोषणा इसी हफ्ते कर दी जाएगी। गौरतलब है कि जदयू के महागठबंधन के साथ सरकार बनाने के बाद विधान परिषद और विधानसभा में भाजपा मुख्य विपक्षी दल बन गई है।
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कानून व्यवस्था और कामकाज पर रहेगी नजर
बैठक में कोर ग्रुप के नेताओं से कहा गया है कि वह सरकार के कामकाज की निगरानी करें। भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को जोरशोर से उठाएं। लोकसभा चुनाव तक कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़ी घटनाओं पर तीखा रुख अपनाएं। सरकार में अति पिछड़ा को आबादी के अनुरूप भागीदारी नहीं मिलने, सरकार में महज यादव और मुसलमान बिरादरी को प्राथमिकता मिलने जैसे विषयों पर आवाज बुलंद करें।

शाह बोले- जदयू का जाना हमारे लिए अवसर
बैठक में मौजूद पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि गृह मंत्री शाह ने कहा कि जदयू का महागठबंधन के साथ जाना भाजपा के लिए बड़ा अवसर है। वह इसलिए कि जदयू और राजद सहित अन्य दलों का गठबंधन प्राकृतिक नहीं है। विभिन्न नीतियों पर इन दलों के बीच जबरदस्त विरोधाभास है। यह विरोधाभास समय आने पर और बढ़ेगा। सतर्क विपक्ष की भूमिका निभा कर भाजपा नई राजनीतिक परिस्थिति को अपने लिए अवसर बना सकती है। शाह ने कहा कि पार्टी का अगड़ों, दलितों और अति पिछड़ों में अच्छा आधार है। जरूरत इस आधार को बढ़ाने और जनमानस में विश्वास पैदा करने की है।

अगड़ा-अति पिछड़ा-दलित को साधने पर रहेगा जोर
नीतीश मंत्रिमंडल के 40 फीसदी मंत्री यादव और मुसलमान हैं। भाजपा अगड़ा-अतिपिछड़ा कार्ड के जरिये नए समीकरण तैयार कर सकती है।

  • नीतीश मंत्रिमंडल में डिप्टी सीएम तेजस्वी सहित आठ मंत्री यादव बिरादरी से तो पांच मुसलमान बिरादरी से हैं। चार अति पिछड़ा, छह अगड़ा और छह दलित वर्ग के मंत्री शामिल हैं। इसके अलावा पिछड़ा वर्ग में शामिल कुर्मी बिरादरी के दो तो कुशवाहा बिरादरी से एक मंत्री हैं।
  • महागठबंधन की कोशिश यादव, मुस्लिम और कुर्मी वोटों को साधे रखने की है। इन तीनों बिरादरी के मतदाताओं की संख्या करीब 39 फीसदी है। दूसरी ओर अगड़े मतदाता (बनिया समेत) करीब 24 फीसदी हैं। ये जातियां अरसे से मजबूती से भाजपा के साथ जुड़ी रही हैं, जबकि अति पिछड़ा वोट बैंक 25 फीसदी है। अति पिछड़ा वर्ग में राजद का प्रभाव बहुत कम है। अब चूंकि आबादी के अनुरूप इस वर्ग को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। लुहार, कुम्हार, बढ़ई, सुनार, कहार, केवट का प्रतिनिधित्व लगभग नगण्य है। ऐसे में भाजपा स्थिति का लाभ उठा सकती है।


तेजप्रताप भी बने मंत्री, शपथ के तुरंत बाद विभाग भी बंटे
बिहार में मंत्रिमंडल का मंगलवार को विस्तार किया गया। राज्यपाल फागू चौहान ने 31 मंत्रियों को शपथ दिलाई। मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद विभागों का भी बंटवारा हो गया। मंत्रिमंडल में राजद का दबदबा है। लालू के बड़े तेजप्रताप को भी मंत्री बनाया गया है। तेजस्वी उपमुख्यमंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल हैं। नए मंत्रियों में राजद के 16, जदयू के 11, कांग्रेस के दो, जीतन राम मांझी की पार्टी हम के एक और एक निर्दलीय विधायक शामिल हैं।



नीतीश ने अपने पास रखा गृह, तेजस्वी के जिम्मे स्वास्थ्य व सड़क
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पास गृह मंत्रालय रखा है। इसके अलावा सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय, निर्वाचन और निगरानी विभाग भी अपने पास रखा है। वहीं, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, शहरी आवास और विकास और ग्रामीण कार्यों जैसे विभाग सौंपे गए हैं। लालू प्रसाद के बड़े पुत्र तेज प्रताप इस बार वन पर्यावरण मंत्री बने हैं। पिछली बार महागठबंधन की सरकार में तेज प्रताप के पास स्वास्थ्य विभाग था।

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