{"_id":"61523265bb4bab013e78ae78","slug":"bjp-mla-nimaben-acharya-becomes-first-woman-speaker-of-gujarat-legislative-assembly","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुजरात: भाजपा विधायक निमाबेन आचार्य विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
गुजरात: भाजपा विधायक निमाबेन आचार्य विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष बनीं
Tue, 28 Sep 2021 02:36 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, गांधीनगर
एजेंसी, गांधीनगर
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 28 Sep 2021 02:36 AM IST
सार
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने निमाबेन के नाम का प्रस्ताव रखा, जिस पर कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष परेश धनानी ने सहमति दी। भूपेंद्र पटेल ने कहा, गुजरात के इतिहास में यह दिन काफी महत्वपूर्ण है। 1960 के बाद पहली बार राज्य विधानसभा को महिला अध्यक्ष मिला है।
विज्ञापन
निमाबेन आाचार्य
- फोटो : Twitter @Nimaben_BJP
विस्तार
भाजपा की वरिष्ठ विधायक निमाबेन आचार्य को गुजरात विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिस पर कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष परेश धनानी ने सहमति दी। इसके बाद उन्हें निर्विरोध चुन लिया गया।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा, गुजरात के इतिहास में यह दिन काफी महत्वपूर्ण है। 1960 के बाद पहली बार राज्य विधानसभा को महिला अध्यक्ष मिला है। मैं उन्हें पूरे सदन की ओर से बधाई देता हूं। वहीं, आचार्य ने सदन को आश्वासन दिया कि वह अपनी नई जिम्मेदारी पूरी क्षमता से निभाने का प्रयास करेंगी।
विज्ञापन
राजेंद्र त्रिवेदी के 16 सितंबर को इस्तीफा देने और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाले नए राज्य मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद अध्यक्ष का पद खाली हो गया था। त्रिवेदी वर्तमान में भाजपा सरकार में राजस्व के साथ-साथ विधायी और संसदीय मामलों के विभागों का प्रभार संभाल रहे हैं।
विज्ञापन
राजनीति की शुरूआत कांग्रेस से
बता दें कि निमाबेन आचार्य भुज से भारतीय जनता पार्टी की विधायक हैं और चार बार विधानसभा की सदस्य रह चुकी हैं। आचार्य इससे पहले गुजरात परिवार नियोजन परिषद की अध्यक्ष रह चुकी हैं। उन्होंने अपनी राजनीति की शुरूआत कांग्रेस से की थी और इसी पार्टी के टिकट पर 2002 और 2007 का चुनाव लड़ा था। हालांकि 2007 के राष्ट्रपति चुनाव में तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत जब निर्दलीय चुनाव में खड़े हुए थे तब उनके पक्ष में मतदान करने के कारण आचार्य को पार्टी विरोधी गतिविधि के आरोप में कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया था। तब आचार्य के पति और छह नगरसेवकों ने कांग्रेस से भाजपा का दामन थाम लिया था, तभी आचार्य भी उनके पीछे-पीछे भगवा पार्टी में शामिल हो गईं।