फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   BJP is trailing in election mode in up

यूपीः इन हालात में क्या खिल पाएगा कमल?

Sat, 26 Mar 2016 06:10 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 26 Mar 2016 06:10 PM IST
विज्ञापन
BJP is trailing in election mode in up
- फोटो : getty images

दिल्‍ली के बाद बिहार में मायूसी मिलने के बाद भाजपा की सारी आस अगर कहीं टिकी है तो वह है उत्तर प्रदेश। आबादी के हिसाब से देश के सबसे बड़े सूबे की अहमियत भाजपा के लिए इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पार्टी अगर यहां उम्‍मीदों के अनुरूप प्रदर्शन करने में सफल रहती है तभी उसे अगले लोकसभा चुनावों के लिए हौसला मिल सकेगा।

विज्ञापन


लेकिन पार्टी की मौजूदा तैयारियों पर गौर करें तो कहीं से ऐसा नजर नहीं आता कि पार्टी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर गंभीर है, जबकि राज्य के दूसरे दलों ने अपनी अपनी जमीन मजबूत करने की तैयारी कर ली है। बसपा लगभग अपने सभी उम्‍मीदवारों की घोषणा काफी पहले ही कर चुकी है तो सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी ने भी एक दिन पहले 143 उम्‍मीदवारों की सूची जारी कर टॉप गेयर में आने की तैयारी कर ली है।
विज्ञापन


वजह भी साफ है ‌चुनावों में एक साल से भी कम का समय रह गया है। ऐसे में क्या कारण है जो भाजपा लगातार विरोधियों के मुकाबले चुनावी तैयारियों में पिछड़ती जा रही है। पड़ताल करते हैं उन कारणों की।

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर एक राय नहीं

BJP is trailing in election mode in up

प्रदेश में भाजपा सबसे ज्यादा उलझन में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर है, उलझन इतनी ज्यादा है कि चार महीने से चल रही मा‌थापच्ची के बाद भी अभी तक मुखिया के नाम पर एकराय नहीं बन सकी है। पार्टी अभी तक यही तय नहीं कर पाई है कि अध्यक्ष के चेहरे पर किसी अगड़े को जगह दी जाए या पिछड़े को या फिर लीक से हटकर किसी दलित को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए। कभी केन्द्रीय मंत्री महेश शर्मा का नाम चलता है तो कभी लखनऊ के मेयर डा. दिनेश शर्मा का।

दलित चेहरे के तौर पर मानव संसाधन राज्यमंत्री डा. रामशंकर कठेरिया का नाम सामने आता है तो उनकी बॉस और केन्द्रीय मंत्री स्मृ‌ति ईरानी के नाम पर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। संगठन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और युवा चेहरे के तौर पर महंत आदित्यनाथ और सुल्तानपुर से सांसद वरुण गांधी के नाम पर भी कई बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन मुसीबत यही है कि किसी एक नाम पर भी सहमति नहीं बन सकी है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रदेश प्रभारी ओम माथुर भी कई बार एक साथ बैठक करके किसी एक नाम पर सहमत नहीं हो सके हैं। दिक्‍कत ये है कि जब तक पार्टी अध्यक्ष का नाम तय नहीं करेगी तब तक उसका चुनावी मोड में आना भी संभव नहीं दिखता। बिना नेतृत्व के मैदान में उतरना तो किसी भी पार्टी के ‌लिए संभव नहीं है।

संगठन स्तर पर भी काम अधूरा

BJP is trailing in election mode in up

पार्टी की मुसीबत प्रदेश अध्यक्ष को लेकर ही नहीं है, संगठन स्तर पर भी काम अधूरा पड़ा है। जब तक प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय नहीं हो जाता तब तक संगठन का काम भी परवान चढ़ना मुश्किल दिखता है। प्रदेश में सदस्यता अभियान 13 नवंबर 2014 को शुरू हुआ था। तब से 17 महीने गुजर गए।

सपा और बसपा उम्मीदवारों की तलाश और संगठन स्तर का काम काफी हद तक निपटा चुके हैं, पर भाजपा नेता 17 जिलों में भी पूरा संगठन नहीं खड़ा कर पाए। 58 जिला-महानगरों में ही अध्यक्ष बन पाए हैं। शेष 32 में अध्यक्ष बनना बाकी है। यह हालत तब है जब इस बार चुनाव न कराके जिलों में नामांकन करने वाले सभी दावेदारों के नाम मंगाकर दिल्ली से तय करके भेजे गए हैं।

जिला समितियों के लिए भी अब तक घोषित अध्यक्षों से नामों की सूची मंगा ली गई है लेकिन समितियों की घोषणा नहीं हो पा रही है। काफी समय पहले जोर-शोर के साथ शुरू किया गया सदस्यता अभियान भी अब ठंडा पड़ता नजर आ रहा है तो बूथ स्तर पर भी पार्टी की कोई खास तैयारी नजर नहीं आती। 

मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर असमंजस

BJP is trailing in election mode in up

लोकसभा चुनावों में भाजपा ने प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर नरेन्द्र मोदी का नाम आगे करके पूरा चुनाव लड़ा था‌ जिससे उसे जोरदार सफलता भी मिली। पार्टी ने इसे आगामी विधानसभा चुनावों में भी भुनाया और बजाय मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करने के मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़े गए। चार चुनावों में सफलता भी मिली लेकिन दिल्ली में आकर पार्टी ने अपनी रणनीति में एकाएक बदलाव कर दिया।

यहां केजरीवाल के सामने उनकी पुरानी साथी किरण बेदी को सीएम उम्‍मीदवार घोषित किया गया, लेकिन पार्टी यहां चारों खाने चित हो गई। बिहार चुनावों में रणनीति में फिर बदलाव किया और बिना मुख्यमंत्री के चेहरे के मोदी के नाम पर ही पुराना दांव लगाया गया लेकिन यहां भी दाल नहीं गल सकी।

नतीजतन इस मुद्दे पर आकर भाजपा उत्तर प्रदेश में फंस गई। पार्टी लाख प्रयास के बाद भी बसपा सुप्रीमो मायावती और अखिलेश यादव की टक्कर का नाम ढूंढने में सफल नहीं हो सकी है, तो मोदी के चेहरे का वो पुराना आकर्षण भी अब घटता दिख रहा है, जिससे वोटरों को बूथ तक खींचा जा सके। यही कारण है कि इस संबंध में पूछने पर वरिष्ठ नेता गोल मोल जवाब ही देते हैं।

यही नहीं विरोधी भी इस मुद्दे पर चुटकी लेने से नहीं चूकते। सपा नेता और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तो बीते दिनों यह कहकर चुटकी भी ली थी कि अभी तो उनके दूल्हे का ही पता नहीं है कौन होगा।

नहीं हुई अभी तक उम्‍मीदवारों की घोषणा

BJP is trailing in election mode in up

तैयारियों के मामले में पार्टी के पिछड़ने की एक बड़ी वजह अभी तक उम्‍मीदवारों के नामों की घोषणा न होना भी है। हालांकि यह पार्टी का पुराना रवैया है कि वह ऐन टाइम पर ही अपने उम्‍मीदवारों की घोषणा करती है। लेकिन हर समय एक ही रणनीति भी कारगर नहीं हो सकती, वो भी तब जब राज्य में पार्टी की स्थिति बहुत मजबूत न दिख रही हो।

पिछले विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने ऐन वक्त पर उम्‍मीदवारों की घोषणा की थी जिसका खामियाजा ये हुआ कि घोषित उम्‍मीदवारों को लेकर जमकर गुटबाजी हुई थी। सिर फुटौव्वल बढ़ती देख पार्टी को आनन फानन में कई उम्‍मीदवार बदलने पड़े थे। लेकिन भारी मतभेदों के बीच चुनाव में उतरी पार्टी को इसका खामियाजा उठाना पड़ा और पार्टी 50 के आसपास सिमटकर रह गई। जबकि काफी समय पहले ही उम्‍मीदवार घोषित करने वाली बसपा और सपा ने बेहतर प्रदर्शन कर उसे पछाड़ दिया।

इस बार भी पार्टी यही चूक करती दिख रही है, क्योंकि अभी तक तो चुनाव प्रचार समिति और प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर ही मुहर नहीं लग सकी है। समय से उम्‍मीदवारों की घोषणा करने से उन्हें भी चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त समय तो मिल ही जाता है क्षेत्र और जनता में भी पकड़ बनाने में आसानी होती है लेकिन शायद गलतियों से सीखने वाली पार्टी का नाम ही भाजपा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed