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सचिन पायलट के लिए भाजपा आसान विकल्प, नए दल के लिए करनी होगी फिर मेहनत

Wed, 15 Jul 2020 04:32 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला, नेटवर्क, नई दिल्ली 
अमर उजाला, नेटवर्क, नई दिल्ली  Published by: अवधेश कुमार Updated Wed, 15 Jul 2020 04:32 AM IST
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BJP is easy option for Sachin pilot new party will have to work again
सचिन पायलट (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook
राजस्थान में कांग्रेस की आंतरिक कलह ने उसे विभाजन के मोड़ पर ला दिया है। सचिन पायलट की बर्खास्तगी के साथ संगठन के पदाधिकारियों ने जिस तरह इस्तीफे देना शुरू किया, उससे जाहिर हो गया है कि राज्य के सीएम गहलोत और सचिन की लड़ाई में कांग्रेस विभाजित हो गई है। अब देखना यह है कि सचिन जाते कहां हैं?
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पायलट के पास अब विकल्प कम बचे हैं। कहा जा रहा है कि वे नए क्षेत्रीय दल की नींव डालकर आगे बढ़ेंगे, लेकिन राजनीतिक पंडितों का कहना है कि राजस्थान की धरती पर कोई तीसरा दल पनपा नहीं है। कुछ विश्लेषकों का कहना है, पायलट के लिए भाजपा ही आसान रनवे हैं। वहीं कुछ का यह भी कहना है, पायलट के सामने जो रास्ता है, वो तंग है। भाजपा में जाते हैं, तो उन्हें कितना स्वीकार किया जाएगा, यह देखने की बात होगी। 
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हमारी विचारधारा मानने वालों के लिए पार्टी के दरवाजे खुले : भाजपा

कांग्रेस में बगावत के बीच भाजपा ने कहा है कि पार्टी के दरवाजे हर उस व्यक्ति के लिए खुले हैं जो हमारी विचारधारा मानता है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, कोई भी जनाधार वाला नेता भाजपा या किसी अन्य पार्टी से जुड़ता है तो स्वागत होगा। 

जातिगत समीकरण पर नजर...

कांग्रेस अभी भी जातिगत समीकरण के साथ आगे बढ़ रही है। पायलट की बर्खास्तगी के साथ ही उसने जाट समुदाय से ज़ुड़े शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा को प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंप दी। इसी तरह, पायलट के साथ विश्वेंद्र सिंह और रमेश मीणा को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया है। विश्वेंद्र जाट समुदाय से जबकि उनका ससुराल पक्ष गुर्जर समुदाय से है।

राजस्थान की राजनीति में सिंह और मीणा दोनों का अपना दबदबा है, लेकिन अब असल परीक्षा होनी है जिससे पता चलेगा रेगिस्तान का जहाज किस करवट बैठेगा। जातिगत समीकरण की गहराई से समझने वाले कहते हैं कि पायलट के साथ हर जाति के विधायक हैं। जातिगत वोट से खुद को मजबूत किया जाता है, लेकिन एक मुकाम के बाद सफर ठहर जाता है। इस मुकाम पर आने के बाद वही व्यक्ति आगे बढ़ता है, जो सभी जातियों, समूहों को आगे लेकर चलने की ताकत रखता हैं।
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