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सबरीमाला मंदिर की परंपराओं का सम्मान करने की मांग, बिना जानकारी के हो रहा हस्तक्षेप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 11 Nov 2018 07:48 PM IST
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सबरीमाला
- फोटो : SELF
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केरल में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर चल रहे विवाद के बीच राजधानी दिल्ली में मंदिर की प्राचीन परंपराओं के समर्थन में आवाज तेज हो गई है। दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने सिखों और हिंदुओं की एक बड़ी संख्या के साथ सबरीमाला की परंपराओं पर अपना विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कानून की आड़ में हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ करने की कोशिश करते हैं। उन्हें इसकी इजाजत नहीं दी जानी चाहिए और बहुसंख्यक समाज की भावनाओं की कद्र की जानी चाहिए।
सबरीमाला मंदिर पर उठे विवाद को देश-विदेश के सैकड़ों करोड़ हिंदुओं की भावनाओं का अनादर बताते हुए तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने रविवार को एक पोस्टर/स्टिकर लांच किया। उन्होंने कहा कि कानून की आड़ में कभी जलीकट्टू पर सवाल खड़ा किया जाता है तो कभी होली पर सुखी होली मनाने की सलाह दी जाती है। कभी दीवाली पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो कभी मूर्ति विसर्जन पर सवाल उठाया जाता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज हमेशा से प्रकृति की पूजा करने वाला और संविधान का पालन करने वाला रहा है। इसकी धर्म-परम्पराओं के कारण कभी किसी का कोई नुकसान नहीं हुआ है। ऐसे में किसी को बेवजह इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
केरल से आये एक श्रद्धालु और मामले के पक्षकार मिथुन ने कहा कि केवल दो-तीन लेख को आधार बनाकर सबरीमाला पर विवाद खड़ा किया गया है। जबकि दक्षिण भारत के समाज में लैंगिक भेदभाव की बात बेमानी है। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का नियम कुछ विशेष स्थितियों के लिए है और यह महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं है क्योंकि अन्य वर्ग की महिलाओं के साथ ऐसा अंतर नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि सबको दक्षिण भारत की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
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सबरीमाला मंदिर पर उठे विवाद को देश-विदेश के सैकड़ों करोड़ हिंदुओं की भावनाओं का अनादर बताते हुए तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने रविवार को एक पोस्टर/स्टिकर लांच किया। उन्होंने कहा कि कानून की आड़ में कभी जलीकट्टू पर सवाल खड़ा किया जाता है तो कभी होली पर सुखी होली मनाने की सलाह दी जाती है। कभी दीवाली पर पटाखों पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो कभी मूर्ति विसर्जन पर सवाल उठाया जाता है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज हमेशा से प्रकृति की पूजा करने वाला और संविधान का पालन करने वाला रहा है। इसकी धर्म-परम्पराओं के कारण कभी किसी का कोई नुकसान नहीं हुआ है। ऐसे में किसी को बेवजह इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
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केरल से आये एक श्रद्धालु और मामले के पक्षकार मिथुन ने कहा कि केवल दो-तीन लेख को आधार बनाकर सबरीमाला पर विवाद खड़ा किया गया है। जबकि दक्षिण भारत के समाज में लैंगिक भेदभाव की बात बेमानी है। मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का नियम कुछ विशेष स्थितियों के लिए है और यह महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं है क्योंकि अन्य वर्ग की महिलाओं के साथ ऐसा अंतर नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि सबको दक्षिण भारत की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
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