बीजद एमपी ने कहा- संसद में खराब हुए समय के लिए वापस करेंगे अपना वेतन
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नोट बंदी के फैसले पर हंगामे के कारण संसद के शीतकालीन सत्र के पूरी तरह धुल जाने से व्यथित बीजेडी के सांसद जय पांडा ने वेतन और भत्ता नहीं लेने की घोषणा की है।
उन्होंने कहा कि संसद में काम नहीं होने की स्थिति में सांसद को वेतन-भत्ता हासिल करने का नैतिक हक नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले भी हंगामा होने पर वह संबंधित दिन का वेतन लेने से परहेज करते आए हैं। गौरतलब है कि इस सत्र के दौरान हंगामे से नाराज भाजपा के वयोवृद्घ सांसद लालकृष्ण आडवाणी और शांता कुमार ने हंगामा करने वाले सांसदों का वेतन काटने का सुझाव दिया था।
पांडा ने कहा कि चूंकि शीत सत्र में कोई कामकाज नहीं हुआ, इसलिए उन्होंने इस अवधि का वेतन और भत्ता नहीं लेने का फैसला किया है। बकौल पांडा देश की सबसे बड़ी पंचायत पर देश की उ मीदों का बोझ है।
हंगामे में एक बार भी भागीदारी नहीं की
संसद सार्थक चर्चा और लोगों की समस्या के निराकरण का रास्ता तलाशने की जगह है। हालांकि, उन्होंने हंगामे में एक बार भी भागीदारी नहीं की, इसके बावजूद चूंकि काम नहीं हुआ तो उन्हें लगा कि वेतन-भत्ता हासिल करने का उन्हें कोई हक नहीं है।
गौरतलब है कि संसद के शीत सत्र की 21 बैठकों में लोकसभा में महज 19 घंटे तो राज्यसभा में महज 22 घंटे ही कामकाज हुआ। इस दौरान एक भी मुद्दे पर चर्चा नहीं हो सकी। हंगामा और कार्यवाही न चलने पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी नाराजगी का इजहार करते हुए सांसदों से भगवान का हवाला देते हुए संसद चलाने की अपील की थी।