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Hindi News ›   India News ›   Bihar: Why has Upendra Kushwaha suddenly started talking about making Nitish the Prime Minister, how his stature started increasing in the party

बिहार: अचानक नीतीश को प्रधानमंत्री बनाने की बात क्यों करने लगे हैं कुशवाहा, पार्टी में किस तरह बढ़ने लगा उनका कद

Tue, 31 Aug 2021 03:28 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 31 Aug 2021 03:28 PM IST
सार

उपेंद्र कुशवाहा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पीएम मैटेरियल कहने वालों में सबसे आगे हैं। नीतीश के व्यक्तित्व और बिहार में किए गए उनके कार्यों का प्रचार-प्रसार करने के लिए कुशवाहा देश भर में ‘मिशन नीतीश’ चलाएंगे। 

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Bihar: Why has Upendra Kushwaha suddenly started talking about making Nitish the Prime Minister, how his stature started increasing in the party
सीएम नीतीश कुमार से मिले उपेंद्र कुशवाहा - फोटो : social media

विस्तार

अपनी पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) का जनता दल (यूनाइटेड) में विलय करने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता उपेंद्र कुशवाहा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाने की जोरदार वकालत करने लगे हैं। कुशवाहा कर रहे हैं कि प्रधानमंत्री बनने के लिए नीतीश कुमार में पूरी काबिलियत है। बताया जा रहा है कि जैसे ही कुशवाहा ने नीतीश कुमार को लेकर यह अति महत्वकांक्षी बयान दिया है पार्टी में उनका कद अचानक बढ़ गया है। कल तक जो नेता कुशवाहा को जद (यू) में लिए जाने का विरोध कर रहे थे वे उनके करीब जाने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे भी संगठन की कमान अभी पूरी तरह उपेन्द्र कुशवाहा और ललन सिंह हाथो में ही बताई जाती है। 
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कुशवाहा के जरिए पीएम बनने की अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर कर रहे हैं नीतीश?
जद (यू) सूत्रों का कहना है कि जब से कुशवाहा पार्टी में आए हैं वो जो कह रहे हैं नीतीश कुमार उनकी हर बात मानते हैं। रविवार को पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया गया है कि नीतीश कुमार में प्रधानमंत्री बनने की तमाम योग्यता है, इस प्रस्ताव को लाने वाले के मुख्य सूत्रधार कुशवाहा ही माने जा रहे हैं।
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कहा जा रहा है कि कुशवाहा के इस बयान के बाद बिहार में राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला है। सोमवार को पार्टी महासचिव केसी त्यागी उनसे मिलने पहुंचे। दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई। के सी त्यागी से मिलने के बाद कुशवाहा ने कहा, जब मैंने यह बयान दिया कि नीतीश कुमार प्रधानमंत्री मैटेरियल हैं तो बहुत लोग असहज हो गए हुई, लेकिन यह समझिए मैं यूं ही कोई बयान नहीं दे देता, उपेंद्र कुशवाहा जो कहता है, वो होता है।
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तो क्या यह समझा जाए कि कुशवाहा के जरिए नीतीश कुमार पीएम बनने की अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर कर रहे हैं। राजनीति के जानकार बिल्कुल इस बात से सहमत नजर आते हैं। भले ही सीएम नीतीश यह कहते हों कि प्रधानमंत्री बनने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है और न ही कोई ऐसी कोई आकांक्षा है लेकिन लेकिन उनकी सहमति नहीं होती तो जद (यू) की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में नीतीश कुमार को पीएम  मैटेरियल बताने वाला प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कैसे होता?

जद (यू) के एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं लिखे जाने की शर्त पर बताया नीतीश कुमार का साथ है इसलिए कुशवाहा आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे हैं। राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा कोई नहीं जानता, क्या जाने नीतीश प्रधानमंत्री पद के दावेदार हो जाएं और कुशवाहा बिहार के मुख्यमंत्री पद के। वे कहते हैं कि कहीं कुशवाहा एक तीर से दो निशाने तो नहीं लगा रहे क्योंकि रालोसपा के जद (यू) में विलय के बाद उपेन्द्र कुशवाहा के समर्थक उनको भावी मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं।

हालांकि बिहार के एक वरिष्ठ पत्रकार इस बात से इंकार करते हैं कि नीतीश आरसीपी सिंह को छोड़कर कुशवाहा को सीएम उम्मीदवार बना सकते हैं। वे कहते हैं कि यह सच है कि नीतीश ने कुशवाहा को सम्मान दिया है लेकिन आरसीपी सिंह को नजरअंदाज करना नीतीश के लिए मुश्किल है।



 

Bihar: Why has Upendra Kushwaha suddenly started talking about making Nitish the Prime Minister, how his stature started increasing in the party
उपेंद्र कुशवाहा
लगातार बढ़ रहा पार्टी में कद
कुशवाहा का कद पार्टी में लगातार किस तरह बढ़ रहा है उसे इस बात से भी समझिए कि जद (यू) ने संविधान में संशोधन करके उपेंद्र कुशवाहा को राष्ट्रीय अध्यक्ष के समकक्ष कर दिया गया है। अभी वे पार्टी के संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष हैं। उन्होंने इसी साल मार्च में अपनी पार्टी का जद (यू) में विलय किया है। लेकिन वे पार्टी में कद्दावर हो गए हैं। पार्टी के यूपी प्रदेश अध्यक्ष अनूप सिंह पटेल ने भी उत्तर प्रदेश चुनाव को लेकर उनसे ही मुलाकात की। जबकि जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह हैं और उत्तर प्रदेश के प्रभारी के सी त्यागी हैं। पार्टी यहां 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है

पार्टी के साथ एजेंडा भी अपना लिया
रालोसपा में कुशवाहा के साथ रहे उनके एक वरिष्ठ साथी का कहना है, नीतीश ने न केवल कुशवाहा की पार्टी को अपनाया, बल्कि उनकी पार्टी के पुराने एजेंडे को भी अपना लिया। जाति जनगणना हो या जनसंख्या नियंत्रण कानून का विरोध या शिक्षा सुधार में शिक्षकों को मिड डे मील से दूर रखने की बात यह सब रालोसपा का एजेंडा हुआ करता था, जिसे जद (यू) ने हूबहू अपना लिया है।

नीतीश जाति जनगणना कराने की अपनी मांग लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक से मिल चुके हैं। इसी तरह वे जनसंख्या नियंत्रण कानून की मुखालफत कर रहे हैं। वहीं कुशवाहा यह मानते थे कि मिड डे मील योजना के संचालन में तकरीबन 3.25 लाख शिक्षकों के जुड़े रहने से पढ़ाई व्यवस्था बाधित हो रही है और वे इसलिए शिक्षा सुधार की बात कर रहे थे। वे जब जद (यू) में आए तो पार्टी ने उनकी इस बात का समर्थन किया और अब अब बिहार सरकार ने शिक्षकों को मिड डे मील से अलग करने का फैसला कर लिया है।  
 

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नीतीश कुमार - फोटो : पीटीआई
नीतीश कुमार के कार्यों का प्रचार करने के लिए ‘मिशन नीतीश’ पर हैं कुशवाहा 
पार्टी में अपना कद बढ़ने के साथ कुशवाहा नीतीश कुमार के लिए प्रचार-प्रसार भी कर रहे हैं। वे इन दिनों नीतीश कुमार के बिहार में किए गए कार्यों और उनके व्यक्तित्व का प्रचार करने के लिए बिहार यात्रा पर हैं। यह यात्रा 15 सितंबर तक खत्म होगी। इसके बाद वे उत्तर प्रदेश का रुख करेंगे।

मिशन नीतीश के तहत कुशवाहा पार्टी को मजबूत करने के लिए नीतीश के काम को अन्य राज्यों में ले जाना चाहते हैं जिससे कि देश भर में उनकी स्वीकार्यता और लोकप्रियता को टटोला जा सके। देश भर में घूम कर वे लोगों को यह बताएंगे कि मोदी को हराने के लिए विपक्ष के पास एकमात्र दावेदार नीतीश कुमार हैं। वे पुराने समाजवादी नेता हैं, उनकी साफ-सुथरी छवि हैं, काफी पढ़े-लिखे नेता हैं। 

पार्टी के एक नेता ने बताया, इस मिशन के पीछे एक बड़ा मकसद यह भी है कि पार्टी जहां-जहां विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, वहां कुछ दमदार जीत हासिल हो, जिससे पार्टी को राष्ट्रीय स्तर का बनाया जा सके। इसके बाद प्रधानमंत्री पद पर नीतीश कुमार की दावेदारी को लेकर सवाल नहीं खड़े होंगे। हालांकि अभी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए नीतीश के लिए यह बड़ी चुनौती होगी कि विपक्ष के प्रधानमंत्री पद का दावेदार होने के लिए वे कांग्रेस, और राजद जैसी पार्टियों को कैसे भरोसे में लेते हैं।   


 
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