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भीमा-कोरेगांव मामला: सीजेआई गोगोई ने गौतम नवलखा की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

Mon, 30 Sep 2019 02:23 PM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Mon, 30 Sep 2019 02:23 PM IST
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Bhima Koregaon case, CJI Gogoi recused himself from hearing Gautam Navlakha petition
जस्टिस रंजन गोगोई - फोटो : social media

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में नागरिक अधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार करने वाले बाम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने की याचिका पर सुनवाई से सोमवार को खुद को अलग कर लिया।

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प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि मामले को उस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करें, जिसमें मैं शामिल न रहूं। इस मामले को प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष पेश किया गया था। महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले में कैविएट दायर कर अनुरोध किया कि कोई भी आदेश पारित करने से पहले उसकी बात सुनी जाए। 

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जानिए मामला

दरअसल, 13 सितंबर को बाम्बे हाईकोर्ट ने 2017 में कोरेगांव-भीमा हिंसा और कथित तौर पर माओवादी संपर्कों के लिए नवलखा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था।

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उच्च न्यायालय ने कहा था कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हमें लगता है कि विस्तृत जांच की जरूरत है। पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 को एलगार परिषद के बाद जनवरी 2018 में नवलखा और अन्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। एलगार परिषद आयोजित करने के एक दिन बाद पुणे जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़क गई थी।

पुलिस ने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में नवलखा और अन्य आरोपियों के माओवादियों से संबंध हैं और वे सरकार को गिराने का काम कर रहे हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने नवलखा की गिरफ्तारी पर संरक्षण तीन सप्ताह की अवधि के लिए बढ़ा दिया था ताकि वह उसके फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें।


नवलखा और अन्य आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां निवारण कानून (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया। नवलखा के अलावा वरवरा राव, अरुण फरेरा, वर्नोन गोन्साल्विस और सुधा भारद्वाज मामले में अन्य आरोपी हैं।

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