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नए श्रम कानूनों को लेकर भारतीय मजदूर संघ ने किया राष्ट्रव्यापी विरोध, कानून में बदलाव की मांग
Wed, 28 Oct 2020 05:32 PM IST
Harendra Chaudhary
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 28 Oct 2020 05:32 PM IST
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दिल्ली में श्रम-शक्ति भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन करते हुए भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता
- फोटो : Amar Ujala
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किसानों के साथ-साथ श्रमिकों ने भी नए कानूनों का विरोध करना जारी रखा हुआ है, जिससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नए श्रम कानूनों को मजदूर विरोधी बताते हुए भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने बुधवार को राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन किया और सरकार से कानूनों में उचित बदलाव की मांग की। इसके पहले 10 से 16 अक्टूबर के बीच में देशभर में इन कानूनों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया गया था।
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भारतीय मजदूर संघ के दिल्ली प्रांत के महामंत्री अनीश मिश्रा ने अमर उजाला को बताया कि नए श्रम कानून में कई प्रावधान श्रमिक विरोधी हैं। पहले सौ श्रमिकों के होने के बाद किसी कंपनी को उनकी छंटनी करने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होती थी, लेकिन अब यह संख्या बढ़ाकर 300 तक कर दी गई है। इसका असर ये हुआ है कि लगभग सत्तर फीसदी कंपनियां अब इस दायरे से बाहर हो गई हैं और अब वे श्रमिकों के साथ मनमानी कर सकती हैं।
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उन्होंने कहा कि नए श्रम कानूनों में श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य, सुविधाएं कम कर दी गई हैं। इसका यह असर होगा कि कोई दुर्घटना होने पर श्रमिकों के परिवार की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा नहीं की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि वे सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि कानून के इन विवादित प्रावधानों को वापस लिया जाना चाहिए।
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