होली में क्षेत्र में न रहने का विधायकों को मलाल
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होली के अवसर पर क्षेत्र की जनता के बीच न रहने का मलाल उत्तराखंड के भाजपा विधायकों को खूब सता रहा है, लेकिन सियासी मजबूरी ने उन्हें त्यौहार के वक्त जनता और परिवार से दूर रहने को विवश कर दिया है। पार्टी के एक विधायक का कहना है कि पार्टी के आदेशों का पालन भारी पड़ रहा है। अब उत्तराखंड के सभी भाजपा विधायक और कांग्रेस के नौ बागी विधायक सूबे से कई सौ किलोमीटर दूर गुलाबी शहर जयपुर में एक-दूसरे के साथ होली खेलेंगे। विधायकों को क्षेत्र की जनता और परिवार से दूरी का मलाल तो है, मगर इस बात की उन्हें खुशी है कि इस साल पार्टी के सभी विधायक एक साथ उपस्थित हैं और आपस में होली खेलेंगे।
वहीं सियासी गलियारों में बेशक राष्ट्रपति शासन की चर्चाएं हैं, लेकिन राज्य के सियासी संकट से धुंध छंटने को लेकर भाजपा विधायकों की बीच चर्चा यही है कि 28 मार्च को शक्ति परिक्षण के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। पार्टी रणनीतिकार तो विधायकों का गणित बैठाने में जुटे ही हैं, लेकिन विधायकों के बीच भी अंकगणित का गुणा-भाग जारी है।
उन्हें पूरी उम्मीद है कि कांग्रेस से अभी और विधायक टूटेंगे। दिल्ली से जयपुर की ओर रवाना हुए खटीमा के विधायक पुष्कर सिंह धामी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि सूबे की जनता के हितों के लिए ही वे सब होली के अवसर पर अपनों से दूर हैं। उन्होंने कहा कि खनन माफिया, भूमाफिया और भ्रष्टाचारियों से घिरी राज्य की हरीश रावत सरकार का जाना अब तय है।
एकजुटता के लिए अवसर मान रहे विधायक
वैसे भाजपा के विधायक इस सियासी संकट को अपने लिए अवसर भी मान रहे हैं। आपस में कई गुटों में बंटी राज्य भाजपा के विधायकों पर भी इसका असर था, लेकिन एक साथ रहने के कारण उनमें समन्वय बढ़ा है। विधायक अपना अधिकांश समय राजनैतिक चर्चाओं में ही बिता रहे हैं।
एक विधायक के मुताबिक सभी विधायक एक साथ बैठते हैं और एक साथ ही भोजन करते हैं। हां, घर सरीखा स्वादिष्ट भोजन तो उन्हें नहीं मिल पा रहा है, लेकिन इसकी भरपाई के लिए अधिकांश विधायकों का जोर सादे भोजन पर ही है।